
प्रेग्नेंसी से जुड़े रिस्क का पहले पता लगाएगा नया ब्लड टेस्ट, स्टडी में खुलासा
प्रेग्नेंसी में लाख ध्यान रखने पर भी महिलाओं को कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जैसे, प्रीमैच्योर-डिलिवरी, खून की कमी आदि। अब इनका पहले से पता लग सकेगा
Pregnancy Complications And Blood Test: गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की जटिलता (complication) मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरी हो सकती है। लेकिन अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि एक ब्लड टेस्ट से इन कॉम्प्लिकेशन्स का पहले ही पता लगाया जा सकता है। यह इनोवेशन गर्भवती महिलाओं की हेल्थ केयर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है और समय रहते जरूरी इलाज संभव हो सकेगा। शुरुआती ट्रायल में 1000 से ज्यादा महिलाओं पर यह टेस्ट किया गया, जिसमें 85% तक सटीक नतीजे देखने को मिले।
कैसे काम करता है यह ब्लड टेस्ट?
इस ब्लड टेस्ट के जरिए खून के सैंपल में कुछ खास बायोमार्कर्स (Biomarkers) की जांच की जाती है, जो प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन्स की शुरुआती स्टेज में ही संकेत दे सकते हैं। इन बायोमार्कर्स के जरिए प्री-एक्लेम्प्सिया (preeclampsia), समय से पहले डिलीवरी (preterm birth) और अन्य गंभीर समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह टेस्ट गर्भावस्था के पहले ट्राइमेस्टर में ही संभावित जोखिमों का पता लगाने में मदद कर सकता है।
मां और बच्चे की सेहत पर असर
समय रहते प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन्स का पता लगने से महिलाओं को सही समय पर इलाज मिल सकता है, जिससे जटिलताओं को कम किया जा सकता है। इससे न सिर्फ मां की सेहत सुरक्षित रहेगी बल्कि शिशु के जन्म से जुड़ी समस्याएं भी काफी हद तक टाली जा सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह टेस्ट उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है जिनमें प्रेग्नेंसी के दौरान हाई रिस्क फैक्टर होते हैं।
इस इनोवेशन के पीछे की साइंस
यह टेस्ट बायोमार्कर्स पर आधारित है, जो शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव के संकेतक होते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन बायोमार्कर्स की जांच से गर्भावस्था के दौरान होने वाले संभावित जोखिमों की पहचान की जा सकती है। शुरुआती नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन अभी इस पर और रिसर्च की जा रही है। आने वाले समय में इसे भारत समेत कई देशों में उपलब्ध कराने की योजना है।
भविष्य में क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह ब्लड टेस्ट बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो जाता है तो यह प्रेग्नेंसी केयर में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा और मां और बच्चे की जान बचाने में मदद मिलेगी। भारत जैसे देशों में जहां गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं, वहां इस टेस्ट से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
नई तकनीक के जरिए प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन्स का जल्दी पता लगाने की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है। यह टेस्ट आने वाले समय में माताओं और शिशुओं की सेहत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।