सही मेंटल ग्रोथ के लिए बच्चे को जरूर दें ये जिम्मेदारी, बनेगा स्ट्रॉन्ग
x

सही मेंटल ग्रोथ के लिए बच्चे को जरूर दें ये जिम्मेदारी, बनेगा स्ट्रॉन्ग

युवाओं और टीनेजर्स में बढ़ती नेगेटिविटी और कमजोर इमोशनल हेल्थ का मुख्य कारण है ऑक्सिटोसिन का सीक्रेशन सही मात्रा में ना होना। इसकी मात्रा कैसे बढ़ेगी यहां जानें


How To Stop Childs Bad Behavior: सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा शांत, संस्कारी और बात मानने वाला हो। साथ ही वो कही कई बातों को ध्यान से सुने और जिम्मेदारी से उनका पालन करें। लेकिन बच्चे को सही परवरिश और संस्कार देना वाकई बच्चों का खेल नहीं है! पैरेंट्स को खुद बहुत सारे त्याग और अडजस्टमेंट्स करने होते हैं अपनी लाइफ में। आप चाहते हैं कि आप कम समय में ज्यादा चीजें अपने बच्चे को सिखा सकें और उसे अच्छा इंसान बनाने के साथ ही भावनात्मक रूप से मजबूत भी बना सकें तो आपको चाइल्ड सायकाइट्रिस्ट डॉक्टर राजेश कुमार द्वारा बताई गई इन बातों पर जरूर गौर करना होगा...

बच्चे को जिम्मेदार बनाने का सबसे आसान उपाय

डॉक्टर राजेश के अनुसार, किसी भी व्यक्ति में प्यार, जिम्मेदारी का भाव, आपसी सामंजस्य और शांत चित्त हमारे शरीर में बनने वाले हॉर्मोन ऑक्सिटोसिन (Oxytocin) के कारण आता है। बच्चों में भी बड़ों की बात मानना, कही गई बातों को ध्यान से सुनकर जीवन में फॉलो करने जैसे गुण आने में इसी हॉर्मोन की बड़ी भूमिका है। जिन बच्चों में इस हॉर्मोन का सीक्रेशन कम होता है, वे चिढ़चिढ़े, जिद्दी, गुस्सैल, बात ना मानने वाले और आक्रामक व्यवहार वाले हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स को ये पता हो कि बच्चे में सही मात्रा में ऑक्सिटोसिन के सीक्रेशन के लिए क्या करना चाहिए।

कैसे बनता है ऑक्सिटोसिन?

डॉक्टर कुमार कहते हैं कि ऑक्सिटोसिन का सीक्रेशन हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) में होता है। हाइपोथैलेमस हमारे ब्रेन का एक पार्ट है और इसमें ऑक्सिटोसिन बनने के बाद पिट्यूट्री ग्लैंड (Pituitary Gland) इसे हमारे शरीर में बह रहे रक्त में मिलाने का काम करती है। ऑक्सिटोसिन एक लव और अफैक्शन फील कराने वाला हॉर्मोन है और इसका सीक्रेशन तब अधिक होता है, जब कोई हमें प्यार से छूता है, किस करता है, हम एक्सर्साइज करते हैं या अच्छा फील कराने वाला कोई दूसरा फिजिकल टास्क करते हैं। जैसे, खेल खेलना इत्यादि।


क्यों बन रहें हैं बच्चे गुस्सैल और आक्रामक?

बच्चों में बढ़ रही निराशा, गुस्सा, हिंसक रवैया और नकारात्मक सोच पर बात करते हुए डॉक्टर कुमार ने बताया कि एक-दो दशक पहले तक संयुक्त परिवार हुआ करते थे, ऐसे में बच्चे को कई लोगों का लाड-प्यार मिलता था। दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊजी-ताईजी इत्यादि अलग-अलग रिश्तों के रूप में उसे कई लोग मिलते थे। ऐसे में पूरी अटेंशन मिलना, भावनात्मक सपोर्ट मिलना, प्यार और सुरक्षा भरा स्पर्श मिलना, ये सभी बच्चों में ऑक्सिटोसिन का सीक्रेशन बढ़ाकर उनके अंदर खुशी, शांति और समझ बढ़ाने में मदद करते थे। यानी ये सभी इनडायरेक्ट तरीके से बच्चे की सही मेंटल- इमोशनल ग्रोथ में मदद करते थे। जबकि आज के समय में ये चीजें लाइफ से मिसिंग हैं तो इसका बुरा असर भी देखने को मिल रहा है।


क्यों कम होने लगा है ऑक्सिटोसिन का रिसाव?

आज के समय में ज्यादातर घरों में पैरेंट्स के साथ दो या एक बच्चा होता है। पैरेंट्स अपनी जॉब और जिम्मेदारियों में व्यस्त होने के कारण बच्चे को उतना समय नहीं दे पाते,जितना बच्चे को चाहिए होता है। ...और ना ही बच्चे की इमोशनल नीड्स उस तरह से पूरी हो पाती हैं, जैसे जॉइंट फैमिलीज में हो जाया करती थीं। इसलिए बच्चों में ऑक्सिटोसिन का सीक्रेशन कम हो रहा है और इसकी कमी के चलते बच्चों के व्यवहार में नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।


बच्चे को शांत और समझदार बनाने का उपाय

यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे में बचपन से ही दूसरों की भावनाओं की कद्र करना, बड़ों का कहना मानना और शांत और फोकस्ड ब्रेन हो तो आप अपने बच्चे से हर दिन कोई ऐसा काम कराएं, जिससे वो खुद को जिम्मेदार समझे और किसी काम के प्रति उसके मन में ये भाव आए कि ये मुझे ही करना है। जैसे, आप घर में कोई पेट (Pet) पाल सकते हैं। कुत्ता, बिल्ली, खरगोश इत्यादि जो भी आपको पसंद हो। इन्हें खाना खिलाने की और टहलाने का काम अपने बच्चे को सौंप दें।

यदि घर में कोई छोटा बच्चा है तो बड़े बच्चे को उसे खाना खिलाने, पानी पिलाने, कपड़े पहनाने में सहायता करने, स्कूल जाता है तो होमवर्क कराने में मदद करने का काम सौंपे। ऐसा करने से दोनों बच्चों के बीच आपसी लगाव गहरा होता है, एक-दूसरे के इमोशन्स की समझ बढ़ती है और साथ ही बढ़ता है ऑक्सिटोसिन का सीक्रेशन। जिसका सकारात्मक असर बच्चों को लाइफटाइम हेल्प करता है। क्योंकि बचपन में बनी ये बॉन्डिंग बच्चों को बड़े होकर आपसी केमिस्ट्री बनाए रखने में मील के पत्थर का काम करती है।

Read More
Next Story