फास्ट फूड से हुईं दिमाग में 20 गांठें! बीमारी ने ली NEET छात्रा की जान
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दिमाग में गांठें बना सकता है पत्ता गोभी और संक्रमित मीट का सेवन

फास्ट फूड से हुईं दिमाग में 20 गांठें! बीमारी ने ली NEET छात्रा की जान

डॉक्टर्स ने बताया कि टेपवर्म परजीवी के अंडे हाइजीन की कमी, पत्तागोभी और संक्रमित पशु का मीट खान से शरीर में पहुंच जाते हैं। इसलिए ऐसे फास्टफूड जिनमें...


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फास्टफूड खाने के शौक ने एक NEET छात्रा की जान ले ली!दिमाग की बीमारी न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस (Neurocysticercosis) से पीड़ित इस लड़की ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में आखिरी सांसे लीं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा की रहने वाली 19-साल की छात्रा इलमा कुरैशी के मस्तिष्क में लगभग 20 गांठें बन गई थीं। डॉक्टर्स का कहना है कि ये गांठें पत्ता गोभी में पाए जाने वाले टेपवर्म के कारण बनती हैं। इलमा के परिजनों ने बताया कि वह फास्ट फूड और बाहर की चीजें अधिक खाती थी। हालांकि टेपवर्म शरीर में और भी कई कारणों से प्रवेश कर सकता है।

डॉक्टर्स ने बताया कि टेपवर्म परजीवी के अंडे हाइजीन की कमी, पत्तागोभी और संक्रमित पशु का मीट खान से शरीर में पहुंच जाते हैं। इसलिए ऐसे फास्टफूड जिनमें पत्ता गोभी और अन्य पत्तेदार सब्जियों का उपयोग होता है या नॉनवेज से बना भोजन सोच-समझकर खाएं। खान-पान को लेकर सतर्कता बरतना बहुत आवश्यक है। इस बीमारी के बारे में अधिक जानने और बचाव के उपाय जानने के लिए आगे पढ़ें...


दिमाग में गांठ बनने की बीमारी

मस्तिष्क में गांठें बनने वाली बीमारी को न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस (Neurocysticercosis)कहा जाात है। यह एक गंभीर परजीवी (पैरासाइटिक) संक्रमण है, जो दिमाग और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। यह तब होता है, जब पत्तेदार सब्जियों विशेषतौर से पत्ता गोभी, सुअर के शरीर में पाए जाने वाले परजीवी टैपवॉर्म (Taenia solium) के अंडे गलती से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और वहां लार्वा (बच्चे) छोड़ देते हैं।

ये लार्वा आतों के माध्यम से रक्त में मिल जाते हैं और शरीर के अंदर ब्लड फ्लो का हिस्सा बनकर मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। टेपवर्म के इन लार्वा के कारण मस्तिष्क की नसों में गांठें बनने लगती हैं। इन गांठों कारण दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है साथ ही तेज सिरदर्द, आंखों में धुंधलापन या दौरे पड़ने की समस्याएं हो सकती हैं।


कैसे फैलता है यह संक्रमण?

यह संक्रमण खासकर उन क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलते हैं, जहां खान-पान में स्वच्छता की कमी होती है। Neurocysticercosis मुख्य रूप से निम्न कारणों से फैल सकता है...

खाने या पानी के माध्यम से

कच्ची/अधपकी सब्जियों से

गंदे हाथों से भोजन करना

दूषित पानी पीना

अधपके मीट खाना

संक्रमित पशु का मीट खाना

इन्हें विस्तार से ऐसे समझें जैसे, खराब स्वच्छता और हाइजीन की कमी का अर्थ है भोजन से पहले और बाद में ठीक से हाथ ना धोना। खुले में शौच जाना और साबुन का उपयोग ठीक से ना करना। Cleveland Clinic के अनुसार, ध्यान रखने वाली बात यह है कि टैपवॉर्म भोजन से सीधे दिमाग में नहीं जाता बल्कि अंडे जब शरीर में प्रवेश कर जाते हैं तो आंतों से होकर रक्त में चलते हैं और वहां से दिमाग जैसे हिस्सों में पहुंचकर गांठें (cysts) बना लेते हैं।


लक्षण क्या हो सकते हैं?

न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस के लक्षण दिमाग पर सिस्ट के बनने की जगह और संख्या के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं। इसलिए हर मरीज में इसके लक्षण अन्य से अलग दिख सकते हैं। लेकिन कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं...

बार-बार दौरे (seizures) होना

तेज सिरदर्द

बहुत अधिक कमजोरी लगना

याददाश्त में कमी

गंभीर मामलों में उल्टी आना

शरीर का संतुलन खोना

देखने की क्षमता कमजोर होना

दिमाग में सूजन या अन्य न्यूरोलॉजिक समस्याए होना

यहाँ तक कि कुछ मामलों में ये गांठें जटिलताएँ और मौत तक का कारण बन सकती हैं।


न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस का उपचार कैसे होता है?

न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस का इलाज के दौरान पेशेंट को आमतौर पर एंटीपैरासाइटिक दवाएं दी जाती हैं,जो परजीवी को मारने में मदद करती हैं। साथ ही सहायक दवाएं दी जाती हैं, जो दिमाग में सूजन कम करने और दौरे रोकने का काम करती हैं। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक हो जाता है ताकि उसकी पल-पल की स्थिति पर नज़र रखी जा सके। मुख्य बात यह है कि इस बीमारी का उपचार लंबा और जटिल हो सकता है। और जितनी जल्दी यह पकड़ में आ जाए उतना बेहतर परिणाम संभव है।


न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस से कैसे बचें?

इस बीमारी से बचने के लिए इसकी रोकथाम और बचाव पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए। क्योंकि ज्यादातर मामलों में इस बीमारी को होने से रोका जा सकता है। वो भी मात्र साफ-सफाई का ध्यान रखकर।

जैसे, खाना खाने के पहले और बाद में साबुन से हाथ धोएं। टॉयलेट का उपयोग करने के बाद साबुन से हाथ धोएं।

पीने के लिए स्वच्छ पानी का उपयोग करें और पत्तेदार सब्जियों को बहुत अच्छी तरह धोकर पकाएं।

मीट खाने से पहले इस बात को पुख्ता कर लें कि ये स्वस्थ पशु का हो। सही से पका हुआ हो।

रसोई घर की साफ-सफाई पर ध्यान दें। फास्टफूड का सीमित उपयोग करें और प्रयास करें कि जहां भी आप इसे खा रहे हैं, वहां हाइजीन ठीक हो।

इस विषय में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पुष्टि करता है कि बेहतर सैनिटेशन, साफ पानी और खाद्य सुरक्षा Neurocysticercosis को रोकने के सबसे प्रभावशाली उपाय हैं।


डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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