
बस 2 सप्ताह शुगर ना खाने से घट जाता है, इन 3 जानलेवा बीमारियों का खतरा
चीनी छोड़ने से शरीर के अंदर जो बदलाव होते हैं, वे जीवन को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं। बस 2 सप्ताह में दिखने लगता है चमत्कार ...
चीनी को अधिकांश लोग केवल स्वाद से जोड़कर देखते हैं। चाय में थोड़ी-सी मिठास, त्योहारों की मिठाई या पैकेट वाले जूस में छुपी हुई शुगर। लेकिन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और मेटाबॉलिक साइंस बताती है कि चीनी केवल स्वाद नहीं बल्कि शरीर की ऊर्जा, हार्मोन और दिमागी संकेतों को नियंत्रित करने वाला एक शक्तिशाली रसायनिक तत्व है। यही कारण है कि जब कोई व्यक्ति सिर्फ 14 दिनों के लिए भी अतिरिक्त चीनी को अपनी दिनचर्या से हटाता है तो शरीर के भीतर बदलाव केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रहते बल्कि लिवर, आंत, दिमाग और इंसुलिन सिस्टम तक महसूस किए जाने लगते हैं...
चीनी छोड़ना किसी डाइट ट्रेंड की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। यह शरीर के लिए एक तरह का मेटाबॉलिक रीसेट होता है। जब तक शरीर को हर दिन चीनी की आसान ऊर्जा मिलती रहती है, तब तक उसे अपनी असली ऊर्जा प्रणाली को सक्रिय करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। लेकिन जैसे ही यह सप्लाई रुकती है, शरीर खुद को नए सिरे से संतुलित करना शुरू करता है और अपने स्तर पर ऊर्जा का उत्पादन और वितरण करता है।
3 से 4 दिन आती हैं ये चुनौतियां
चीनी छोड़ने के बाद शुरुआती तीन से चार दिन अक्सर सबसे कठिन होते हैं। इस दौरान सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और मीठा खाने की तीव्र इच्छा महसूस हो सकती है। यह अवस्था दरअसल दिमाग के डोपामिन सिस्टम के फिर से संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया होती है। वैज्ञानिक इसे शुगर विदड्रॉल कहते हैं। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि संकेत है कि दिमाग उस रसायनिक आदत से बाहर आ रहा है, जो लंबे समय से उसे त्वरित (तेजी और आसानी से) सुख देती रही है।
सबसे कठिन 5 दिन
लगभग पांचवें दिन से शरीर का व्यवहार बदलने लगता है। इंसुलिन का उतार-चढ़ाव पहले की तुलना में स्थिर हो जाता है। दिन के बीच अचानक आने वाली थकान कम होती है और भूख अधिक वास्तविक लगने लगती है। अब शरीर खाने की मांग आदत के कारण नहीं करता। यानी क्रेविंग की समस्या अधिक नहीं रहती बल्कि जरूरत के कारण करता है। यही वह चरण है, जहां कई लोगों को पहली बार महसूस होता है कि वे लंबे समय बाद बिना कुछ मीठा खाए भी सामान्य और ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं।
इन जानलेवा बीमारियों से बचाव
दो सप्ताह पूरे होते-होते बदलाव केवल महसूस ही नहीं होते बल्कि इस स्थिति में आने लगते हैं कि जैविक स्तर पर मापे जा सकते हैं। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ में प्रकाशित एक माइक्रो-सिम्यूलेशन अध्ययन बताता है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी डाइट में अतिरिक्त चीनी को मात्र 20 प्रतिशत तक भी कम कर दे तो टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर डिजीज और हृदय रोगों का जोखिम उल्लेखनीय रूप से घट सकता है। इस शोध में यह भी सामने आया कि चीनी में कटौती से डिजेबिलिटी-एडजस्टेड लाइफ ईयर्स (इसमें अकाल मृत्यु के कारण खोए गए जीवन के वर्षों और विकलांगता के साथ जीए गए वर्षों, दोनों को शामिल किया जाता है।) में सुधार होता है। यानी जीवन न केवल लंबा बल्कि स्वस्थ भी बनता है।
पतला होने का कारण
कई लोग 14 दिनों में पेट सपाट होने का अनुभव करते हैं और इसे सिर्फ वजन घटने से जोड़ देते हैं। जबकि असल में यह बदलाव सूजन के कम होने और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी के बाहर निकलने से जुड़ा होता है। जब चीनी कम होती है तो आंतों की सूजन घटती है, लिवर में जमा फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है और पाचन तंत्र हल्का महसूस करने लगता है।
नींद अच्छी आती है
नींद और मानसिक स्थिति पर भी इसका असर गहराई से देखा गया है। नेशनल जियोग्राफिक द्वारा संकलित न्यूरो-मेटाबॉलिक शोध बताते हैं कि अधिक चीनी मेलाटोनिन जैसे नींद से जुड़े हार्मोन को बाधित करती है और दिमाग में सूजन को बढ़ावा देती है। जैसे ही चीनी हटती है, नींद गहरी होने लगती है, सुबह उठते समय भारीपन कम होता है और मूड अधिक स्थिर महसूस होता है।
सॉफ्ट और एनर्जी ड्रिंक्स में बदलाव
यह असर केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि यदि शुगर-युक्त पेय पदार्थों में चीनी की मात्रा 30 प्रतिशत तक घटा दी जाए तो लाखों स्वस्थ जीवन-वर्ष बचाए जा सकते हैं। यह दर्शाता है कि चीनी कम करना केवल फिटनेस से जुड़ा निर्णय नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का भी एक अहम हिस्सा है।
क्या कहते हैं डॉक्टर्स?
चिकित्सकों की राय में चीनी छोड़ने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शरीर को पहली बार अपनी वास्तविक भूख, ऊर्जा और जरूरतों को पहचानने का अवसर मिलता है। यह कोई तात्कालिक डिटॉक्स नहीं बल्कि शरीर की स्वाभाविक मरम्मत प्रक्रिया है, जो तब शुरू होती है, जब हम उसे अनावश्यक मीठे की अधिकता से मुक्त करते हैं। इस बारे में एम्स के गट डॉक्टर सौरभ सेठी के सुझाव...
केवल दो सप्ताह तक बिना चीनी के रहने से शरीर अचानक आदर्श नहीं बन जाता... लेकिन वह ये स्पष्ट संकेत जरूर देता है कि अगर उसे मौका मिले तो वह खुद को ठीक करना जानता है। विज्ञान का यही सबसे सशक्त संदेश है और शायद यही कारण है कि चीनी छोड़ने का प्रभाव वजन से कहीं आगे जाकर महसूस होता है।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

