सोते समय होती है सांस लेने में दिक्कत, घुटन से खुल जाती है नींद?
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सोते समय होती है सांस लेने में दिक्कत, घुटन से खुल जाती है नींद?

गहरी नींद में सोते समय अचानक सांस लेने में दिक्कत होती है और दम घुटने के अहसास के साथ नींद टूटती है, जागने के कुछ मिनट में सब सामान्य हो जाता है...स्लीप एपनिया है


स्लीप एपनिया, एक ऐसी समस्या है, जिसमें गहरी नींद में सोते समय अचानक सांस थम जाती है, व्यक्ति जागता है और घबराया हुआ महसूस करता है। कुछ देर जागने और बैठकर-लेटकर या खड़े होकर सांस लेने के बाद फिर से सब कुछ सामान्य हो जाता है। लेकिन एक ही रात में यह बार-बार हो रहा हो... तो क्या करें? यह स्थिति स्लीप एपनिया हो सकती है, जो नींद से जुड़ा एक गंभीर विकार है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं...

स्लीप एपनिया क्या है?

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड से लेकर एक मिनट तक रुक सकती है। यह प्रक्रिया पूरी रात में कई बार दोहराई जा सकती है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और नींद बाधित होती है।

स्लीप एपनिया के प्रकार

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA)- यह सबसे आम प्रकार है, जिसमें गले की मांसपेशियां अत्यधिक रिलैक्स हो जाती हैं और इससे वायुमार्ग अवरुद्ध हो जाता है यानी सांस की नली में रुकावट आ जाती है। मोटापा, बढ़ती उम्र और गर्दन की संरचना इसके खतरे को अधिक बढ़ा सकते हैं।

सेंट्रल स्लीप एपनिया (CSA)- यह तब होता है, जब मस्तिष्क सांस नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को सही संकेत नहीं भेज पाता। यह तंत्रिका तंत्र की समस्याओं या हृदय रोग के कारण हो सकता है।

मिश्रित स्लीप एपनिया (Complex Sleep Apnea Syndrome)- यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी व्यक्ति को OSA और CSA दोनों का सामना करना पड़ता है।

स्लीप एपनिया के लक्षण

तेज खर्राटे आना, अचानक सांस रुकना या घुटन महसूस होना, रात में बार-बार नींद खुलना, सुबह सिरदर्द और गले में सूखापन महसूस होना, दिनभर सुस्ती और थकान रहना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

स्लीप एपनिया के कारण

अधिक वजन या मोटापा, गले की संरचना में असामान्यता, उम्र बढ़ना, शराब और धूम्रपान, अनुवांशिकता से जुड़े कारण इस समस्या की मुख्य वजह हो सकते हैं।

स्लीप एपनिया से बचाव

स्वस्थ वजन बनाए रखना आवश्यक होता है। इसके लिए सामान्य से नियम का पालन कर सकते हैं। जैसे, जितने फीट आपकी लंबाई है उसके दहाई के आकड़ें में आपका वजन रहे तो ठीक मानाज जाता है। यानी अगर आपकी लंबाई पांच फीट दो इंच है तो आपके लिए सामान्य वजन ५२ किलो तक हो सकता है।

सोने की सही मुद्रा अपनाना अपनाना जरूरी होता है। यदि आप पेट के बल सोते हैं या टेढ़े-मेढ़े होकर सोते हैं, लंबे समय तक एक ही पोजिशन में सोते हैं तो आपको इसमें सुधार करना चाहिए।

शराब और धूम्रपान से बचना बहुत जरूरी है, ये स्थिति को अधिक गंभीर बना सकते हैं।

नियमित व्यायाम करना और सोने से पहले भारी भोजन न करना इसके बचाव के प्रभावी उपाय हो सकते हैं।

स्लीप एपनिया का उपचार

सीपीएपी (Continuous Positive Airway Pressure) थेरेपी में एक मशीन मास्क के जरिए हवा का दबाव बनाए रखती है, जिससे सांस मार्ग खुला रहता है। डेंटल डिवाइसेस कुछ विशेष उपकरण होते हैं, जो जबड़े और जीभ को सही स्थिति में रखते हैं। गंभीर मामलों में टॉन्सिल या अन्य बाधक ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है। सही खानपान, व्यायाम और अच्छी नींद की आदतें अपनाने से स्थिति में सुधार हो सकता है।

स्लीप एपनिया एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य समस्या है। अगर समय रहते इसे पहचाना जाए और सही उपचार लिया जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकता है। अगर आपको बार-बार सांस रुकने, खर्राटे लेने या दिनभर थकान महसूस होने की समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। आपकी अच्छी नींद ही आपकी सेहत की कुंजी है! इसका ध्यान रखें।

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