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दिल से लेकर दिमाग तक, गजब का काम करता है विटामिन-डी

दिल की सेहत से लेकर दिमाग को ऐक्टिव रखने तक, विटामिन-डी का रोल

6 Feb 2026 1:03 PM IST  ( Updated:2026-02-06 11:46:15  )

दिल, दिमाग, मासपेशियां और ब्लड प्रेशर तक, शरीर में सब कुछ ठीक बना रहे और हर काम सुही तरीके से हो, इसमें विटामिन-डी का रोल अहम क्या होता है यहां जानें...

विटामिन-डी: अगर आपको अक्सर ऐसा लगता है कि शरीर हर समय थका थका सा रहता है, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द बना रहता है, छोटी छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन आ जाता है या फिर मन बिना किसी ठोस वजह के ही उदास रहता है तो इसकी जड़ कहीं गहराई में हो सकती है। इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉक्टर स्मिता जैन, SIMS हॉस्पिटल (चेन्नई) के अनुसार, इन तमाम लक्षणों के पीछे एक आम लेकिन अनदेखी वजह है विटामिन डी की कमी...

हैरानी की बात यह है कि भारत जैसे धूप वाले देश में रहने के बावजूद बड़ी आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही है। सर्दियों में यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि धूप में निकलने का समय कम हो जाता है और त्वचा तक पहुंचने वाली सूर्य किरणों की तीव्रता भी घट जाती है।

सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं है विटामिन डी की भूमिका

अक्सर विटामिन डी को केवल हड्डियों का विटामिन मान लिया जाता है, जबकि सच्चाई इससे कहीं आगे है। डॉक्टर स्मिता जैन बताती हैं कि विटामिन डी शरीर के लगभग हर प्रमुख सिस्टम पर असर डालता है। यह इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित रखता है, जिससे बार बार होने वाले संक्रमण का खतरा कम होता है। मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने में भी इसकी अहम भूमिका होती है, यही वजह है कि इसकी कमी में व्यक्ति जल्दी थकने लगता है।

मेंटल हेल्थ के स्तर पर भी विटामिन डी बेहद जरूरी है। यह दिमाग की कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स की सुरक्षा करता है और सेरोटोनिन जैसे ब्रेन केमिकल्स के संतुलन में मदद करता है। सेरोटोनिन वही केमिकल है जो मूड, फोकस और मानसिक स्थिरता से जुड़ा होता है। जब विटामिन डी पर्याप्त होता है तो मूड बेहतर रहता है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी बढ़ती है।


डायबिटीज से लेकर दिल की बीमारी तक सीधा संबंध

विटामिन डी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर करता है, यानी शरीर इंसुलिन को कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर पा रहा है। इसी वजह से इसकी कमी डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है।

दिल की सेहत पर भी इसका असर सीधा पड़ता है। हार्ट मसल्स की कोशिकाओं में मौजूद विशेष रिसेप्टर्स को विटामिन डी सक्रिय करता है, जिससे दिल की पंपिंग क्षमता संतुलित रहती है और हार्ट मसल्स में अनावश्यक सूजन नहीं बढ़ती।

इसके अलावा विटामिन डी शरीर के रेनिन एंजियोटेंसिन सिस्टम को संतुलित करता है। यही सिस्टम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। जब विटामिन डी की कमी होती है तो यह सिस्टम जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और दिल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।


शरीर में सूजन को शांत करता है विटामिन डी

लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन यानी क्रॉनिक इंफ्लेमेशन को आज दिल की बीमारियों, डायबिटीज और कई अन्य गंभीर रोगों की जड़ माना जाता है। विटामिन डी इम्यून सिस्टम को संतुलित रखकर इस सूजन को कम करता है और हार्ट टिश्यू को नुकसान से बचाने में मदद करता है।


विटामिन डी की कमी के संकेत क्या कहते हैं

जब शरीर में विटामिन डी कम होने लगता है तो इसके संकेत धीरे धीरे सामने आने लगते हैं। लगातार कमर या जोड़ों में दर्द रहना, मांसपेशियों में कमजोरी, थोड़ा सा काम करने पर ही थक जाना, बालों का झड़ना इसके आम लक्षण हैं। बच्चों में हड्डियों का ठीक से विकसित न होना भी विटामिन डी की कमी का एक अहम संकेत माना जाता है। अगर यह कमी लंबे समय तक बनी रहे तो ऑस्टियोपोरोसिस, डायबिटीज, दिल की बीमारियों और डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ सकता है।



विटामिन डी की कमी पूरी कैसे करें

विटामिन डी का सबसे प्राकृतिक स्रोत सूरज की रोशनी है। सुबह आठ से ग्यारह बजे के बीच लगभग तीस मिनट धूप में रहना अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त माना जाता है। लेकिन बदलती जीवनशैली, सनस्क्रीन का अधिक उपयोग और ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर बिताने की आदत शरीर को पर्याप्त विटामिन डी से वंचित कर देती है। इसलिए रोजाना कुछ समय धूप में बिताना जरूरी होता है।

खान पान से मिलने वाला विटामिन डी सीमित जरूर होता है, लेकिन पूरी तरह बेअसर नहीं है। फोर्टिफाइड दूध और दही, अंडा, फैटी फिश जैसे सैल्मन और टूना, मशरूम और कॉड लिवर ऑयल इसकी कमी पूरी करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं, क्योंकि बिना जांच के ज्यादा मात्रा लेना नुकसानदायक हो सकता है।


कैल्शियम और विटामिन डी दोनों का संतुलन जरूरी

एक बेहद जरूरी बात यह भी है कि विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। यानी अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है तो केवल कैल्शियम लेने से भी हड्डियां मजबूत नहीं होंगी। हड्डियों की सही सेहत के लिए दोनों का संतुलन बेहद जरूरी है।


कुल मिलाकर विटामिन डी सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं है। यह दिल, दिमाग, इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म को आपस में जोड़ने वाला अहम तत्व है। थोड़ी सी धूप, संतुलित आहार और समय समय पर जांच इन तीन बातों पर ध्यान देकर विटामिन डी की कमी से आसानी से बचा जा सकता है और पूरे शरीर की सेहत को लंबे समय तक बेहतर रखा जा सकता है।


डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।