सारी गलती आपकी नहीं है, 40 की उम्र में इन 5 मेन कारणों से बढ़ता है वजन
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इसलिए 40 के बाद खुद ही बढ़ने लगता है वजन

सारी गलती आपकी नहीं है, 40 की उम्र में इन 5 मेन कारणों से बढ़ता है वजन

यह बदलाव शरीर में फैट स्टोरेज और इंसुलिन सेंसिटिविटी को प्रभावित करता है, जिससे शरीर में फैट डिस्ट्रीब्यूशन बदल जाता है और पेट के आसपास फैट जमा होता है...


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40 की उम्र के बाद महिलाओं और पुरुषों में तेजी से वजन बढ़ने की शिकायत देखने को मिलती है। अधिकांश लोग इस बात से चिंतित होते हैं कि पेट निकलने लगा है और शरीर पर अनचाहा फैट बढ़ने लगा है। आमतौर पर मोटापा बढ़ने का कारण हमारा खराब लाइफस्टाइल ही होता है। लेकिन 40 की उम्र के दौरान केवल जीवनशैली से जुड़ी कमियां ही मोटापे का अकेला कारण नहीं होतीं। बल्कि शरीर में हो रहे जैविक बदलाव भी इसमें बराबर के भागीदार होते हैं...

क्या हैं 40 की उम्र में शरीर में होने वाले बदलाव?

वैज्ञानिकों का कहना है कि मिड-लाइफ वेट गेन अक्सर शरीर के जैविक बदलाव की वजह से होता है, जिनमें मेटाबोलिज़्म स्लो होना, मसल मास में गिरावट अर्थात सार्कोपेनिया और हार्मोनल बदलाव जैसे कारण शामिल हैं।


1. मेटाबोलिक रेट धीरे-धीरे कम होना

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और Nature Metabolism में प्रकाशित एक दीर्घकालिक अध्ययन बताता है कि 40 की उम्र के बाद शरीर की बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) धीरे-धीरे घटने लगती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अचानक कम खाने लगता है। बल्कि यह है कि शरीर अब पहले जितनी ऊर्जा नहीं जलाता। यही कारण है कि पहले सामान्य लगने वाला भोजन अब वजन बढ़ाने लगता है।

2. मांसपेशियों का स्तर घटता है

उम्र बढ़ने के साथ मसल प्रोटीन सिंथेसिस धीमा हो जाता है,जिससे मांसपेशियां घटती हैं। और इस मसल मास का गिरना, वजन नियंत्रण को कठिन बनाता है। क्योंकि मांसपेशियां ना केवल शारीरिक और मानसिक गतिविधि के दौरान बल्कि आराम के समय में भी कैलोरी बर्न करती हैं। इस विषय में Journal of Gerontology और The Lancet Healthy Longevity में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, 40 के बाद हर दशक में व्यक्ति अपनी मांसपेशियों का लगभग 3–8% हिस्सा खो सकता है अगर उन्हें सक्रिय रूप से बचाया न जाए।


3. हॉर्मोन्स के कारण वजन बढ़ना

Endocrine Reviews और Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन धीरे-धीरे गिरता है। साथ ही महिलाओं में प्रीमेनोपॉज़ के दौरान और मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन लेवल में बदलाव आता है। यह बदलाव शरीर में फैट स्टोरेज और इंसुलिन सेंसिटिविटी को प्रभावित करते हैं। ये दोनों ही स्थितियां शरीर में फैट डिस्ट्रीब्यूशन बदल देती हैं। खासकर पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है। यह स्पष्ट करती है कि हार्मोनल बदलाव शरीर को “फैट स्टोरेज मोड” में डाल सकते हैं, भले ही भोजन समान रहे।


4. खराब जीवनशैली और वजन बढ़ना

अब आप समझ गए होंगे कि 40 के बाद बढ़ते मोटापे में खराब जीवनशैली का नंबर बाद में आता है। पूरी नींद ना लेना और बॉडी फैट से जुड़े Harvard Medical School और Sleep जर्नल में प्रकाशित शोध बताते हैं कि लगातार कम नींद लेने और असमय भोजन करने की आदत हो तो ये सभी आदतें पेट भरने का संकेत देने वाले हॉर्मोन (लेप्टिन) को घटाती हैं। साथ ही भूख को नियंत्रित करने वाले हॉर्मोन (घ्रेलिन) का स्तर गड़बड़ा देती हैं और इस तरह मोटापे को बढ़ाने का काम करती हैं।

तनाव में रहना भी मोटापा बढ़ने का कारण बन जाता है। क्रोनिक तनाव पर Psychoneuroendocrinology में प्रकाशित रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक तनाव में रहने से कोर्टिसोल नामक हॉर्मोन बढ़ता है, जो पेट की चर्बी से सीधा जुड़ा है। यानी नींद और तनाव केवल मानसिक नहीं बल्कि मेटाबॉलिक समस्या भी हैं।


5. उम्र और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर रिसर्च

Diabetes Care और The American Journal of Physiology में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, उम्र के साथ कोशिकाओं की इंसुलिन को पहचानने की क्षमता घट सकती है फिर भले ही व्यक्ति डायबिटिक न हो। इस स्थिति में कोशिकाएं ऊर्जा का सही तरह उपयोग नहीं हो पाती और फैट के रूप में संग्रह बढ़ता है। यही कारण है कि 40 के बाद वजन कम करना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।


40 के बाद कैसे करें वजन कंट्रोल?

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि 40 के बाद वजन बढ़ने की स्थिति को टाला नहीं जा सकता। क्योंकि इस बारे में विज्ञान कहता है कि वजन बढ़ना अनिवार्य नहीं है। लेकिन इसे रोकने के लिए सोच बदलनी होगी।

यह केवल कैलोरी गिनने या खुद को दोष देने का मामला नहीं है बल्कि शरीर के बदलते विज्ञान को समझने का समय है। जैसे, मसल को बचाना, हार्मोनल संतुलन पर ध्यान देना, नींद और तनाव को गंभीरता से लेना और इन्हें नियंत्रित करने के प्रयास करना। ये सभी उतने ही जरूरी हैं, जितना सही भोजन।


40 की उम्र में मसल्स बनाने के लिए क्या करें?

40 के बाद वजन बढ़ना शरीर की कमजोरी नहीं, शरीर का बदला हुआ गणित है। जब हम इस गणित को समझकर कदम बढ़ाते हैं तो वजन भी कंट्रोल में आता है और सेहत भी। यह जान लें कि 40 के बाद शरीर प्रोटीन को पहले जितनी कुशलता से इस्तेमाल नहीं करता। इसलिए जितना प्रोटीन शरीर के लिए पहले काफी होता था,अब उतना पर्याप्त नहीं रहता।

- इस उम्र में प्रोटीन डायट पर पूरा ध्यान देना चाहि। शरीर को मिलने वाला पर्याप्त प्रोटीन मसल टूटने से बचाता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। इससे

- ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद मिलती है। इसलिए 40 के बाद शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। ऐसे में देर रात खाना, अनियमित समय पर भोजन करना, ये सभी चीजें फैट स्टोरेज को तेज कर देती हैं।


कुल मिलाकर 40 की उम्र में बढ़ता वजन किसी असफलता का प्रमाण नहीं है। बल्कि यह संकेत है कि शरीर अब पहले से अलग तरीके से काम कर रहा है। जब हम इसे आलस्य या लापरवाही समझने के बजाय जैविक बदलाव के रूप में देखते हैं, तभी हम सही समाधान की ओर बढ़ पाते हैं।इसलिए शरीर को पुराने तौर-तरीकों और गड़बड़ जीवनशैली के साथ दंड देने और ढोने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि सही समझ की जरूरत होती है। जब आप समझ लेते हैं कि अब आपको अपने शरीर की आवश्यकताओं के साथ कैसे अपनी फिटनेस को बनाए रखना है, तब यही समझ न केवल वजन को बल्कि पूरी सेहत को संतुलन में लाती है।



डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


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