
ओट्स के पानी से वजन घटाने का बढ़ रहा है ट्रेंड, क्या ये सुरक्षित है?
ड्रिंक से जुड़े दावों में कहा जा रहा है कि इसे रोज सुबह खाली पेट पीने से भूख अपने आप कम होने लगती है, वजन गिरने लगता है, शरीर फैट स्टोरेज मोड से बाहर आ जाता है
वजन घटाने और डायबिटीज टाइप-2 से बचने के साथ ही ओट्स का पानी, उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है, जो बिना मेहनत फिटनेस बनाए रखने की चाह रखते हैं। ओट्स के इस पानी को 'ओट्सजैंपिक' नाम से जाना जा रहा है। इस बात में कोई शक नहीं कि ओट्स सेहत के लिए गुणकारी होते हैं। लेकिन क्या ओट्स के पानी का उपयोग सभी के लिए लाभकारी है, क्या इसे लेने के कुछ नियम हैं ताकि सेहत से जुड़ी कोई समस्या ना आए, यहां इसी बारे में विस्तार से बताया गया है...
कैसे बनता है ओट्सजैंपिक?
ओट्सजैंपिक नाम के इस ड्रिंक को ओट्स-पानी-नींबू का रस डालकर तैयार किया जाता है। इस ड्रिंक से जुड़े दावों में कहा जा रहा है कि अगर इसे रोज सुबह खाली पेट पी लिया जाए तो भूख अपने आप कम होने लगती है, वजन गिरने लगता है और शरीर फैट स्टोरेज मोड से बाहर आ जाता है। लेकिन जब इन दावों को गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी और मेटाबॉलिक साइंस के नजरिए से देखा जाता है तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है।
ओजेम्पिक से प्रेरित है ओट्सजैंपिक
Ozempic एक सेमाग्लूटाइड नामक दवा का ब्रांड नेम है। यह दवा GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट के रूप में काम करती है। GLP-1 एक ऐसा हार्मोन है, जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है और दिमाग को यह संकेत देता है कि पेट भर चुका है। यह पेट से भोजन के खाली होने की गति को धीमा करता है, इंसुलिन के स्राव को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। यही वजह है कि Ozempic का असर केवल भूख कम करने तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे हार्मोनल और न्यूरो-मेटाबॉलिक सिस्टम पर पड़ता है। इस दवा के प्रभाव को लेकर कई बड़े क्लिनिकल ट्रायल्स मौजूद हैं, जिनमें इसके सेवन के बाद वजन कम होने के और डायबिटीज नियंत्रण के उल्लेखनीय प्रमाण मिले हैं। एक लाइन में कहें तो ओजेम्पिक वजन कम करने वाली ऐसी दवाई है, जो डॉक्टर्स की निगरानी में ही ली जाती है।
ओट्स के पानी का शरीर पर प्रभाव
अब अगर Oatzempic यानी ओट्स के पानी की बात करें तो यह इस स्तर पर शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित नहीं करता। इसमें मौजूद ओट्स का मुख्य सक्रिय घटक बीटा-ग्लूकन नामक घुलनशील फाइबर है। यह फाइबर आंतों में जाकर पानी के साथ मिलकर एक जेल जैसी संरचना बनाता है। इस प्रक्रिया से पेट भरा हुआ महसूस करता है और व्यक्ति को कुछ समय तक भूख कम लगती है। यही वह बिंदु है, जहां लोग इसे Ozempic जैसा असर मानने लगते हैं।
लेकिन यहां एक बुनियादी अंतर है। ओट्सजैंपिक भूख को हार्मोनल स्तर पर नियंत्रित नहीं करता बल्कि पेट में भराव की अनुभूति पैदा करता है। यह प्रभाव अस्थायी होता है और व्यक्ति के पूरे दिन के खान-पान पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति इस ड्रिंक के बाद संतुलित भोजन करता है तो इसका लाभ सीमित रह सकता है। लेकिन अगर कोई इसे भारी नाश्ते के स्थान पर लेता है तो कुल कैलोरी इनटेक कम हो जाता है और वजन धीरे-धीरे घटने लगता है।
यही कारण है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि Oatzempic से जो वजन घटता दिखता है, वह किसी चमत्कारी जैविक प्रक्रिया का परिणाम नहीं है। बल्कि कैलोरी डिफिसिट का नतीजा होता है। यही असर किसी भी फाइबर-समृद्ध, कम कैलोरी वाले नाश्ते से पाया जा सकता है। अंतर बस इतना है कि ओट्स के पानी को ओट्सजैंपिक बनाकर एक अलग पहचान देने का प्रयास किया गया है, जिसमें सोशल मीडिया की भूमिका अहम है।
सब पी सकते हैं ओट्स का पानी?
किसी भी भोजन के अनुभव हर शरीर के लिए समान नहीं होते। कुछ लोगों में ओट्स का फाइबर पेट फूलने, गैस या असहजता भी पैदा कर सकता है। वहीं, कुछ लोग इसे पीकर इतना संतुष्ट महसूस करते हैं कि दिनभर कुछ और खाने की इच्छा नहीं होती। इससे शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और पोषक तत्वों नहीं मिल पाते। लंबे समय तक ऐसा करने से मांसपेशियों की कमजोरी,थकान और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी का खतरा बढ़ सकता है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि वजन घटाने को अक्सर स्वास्थ्य का एकमात्र पैमाना मान लिया जाता है, जबकि विज्ञान ऐसा नहीं कहता। अगर वजन कम हो रहा है लेकिन उसके साथ नींद खराब हो रही है, चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है या ऊर्जा स्तर गिर रहा है तो इसका अर्थ यह है कि वजन घटाने की वह प्रक्रिया शरीर को रास नहीं आ रही है।
बेकार नहीं है ओट्स का पानी
यह सच है कि ओट्स के पानी का सेवन हर दिन करने और इसके साथ अन्य पोषक तत्वों पर ध्यान ना देने से समस्या हो सकती है। लेकिन यदि पोषण का संतुलन बनाकर इसका सेवन किया जाए तो निश्चित रूप से यह वजन कम करने में बहुत सहायक है।
इसमें मौजूद फाइबर सेवन आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने को रोकता है और धीरे-धीरे मेटाबॉलिक संतुलन में मदद कर सकता है। असल समस्या तब पैदा होती है जब किसी सरल पोषण उपाय को दवा के बराबर खड़ा कर दिया जाता है। Ozempic और Oatzempic के बीच समानता केवल नाम और भूख पर पड़ने वाले सतही प्रभाव तक सीमित है। जैविक स्तर पर दोनों का काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है। एक हार्मोनल हस्तक्षेप है, दूसरा पोषण आधारित भराव।
वजन कम करने का उपाय
कोई इंजेक्शन हो या ओट्स का पानी, इन्हें लेकर तब तक स्थायी लाभ नहीं मिल सकता, जब तक इनके साथ जीवनशैली में व्यापक बदलाव न किए जाएं। संतुलित भोजन, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित शारीरिक गतिविधि और नींद का सही पैटर्न, ये सभी मिलकर ही शरीर को उस स्थिति में लाते हैं, जहां वजन अपने आप संतुलित होने लगता है।
Oatzempic को इसी दृष्टि से देखना जरूरी है। यह न तो कोई जादुई समाधान है, न ही पूरी तरह खारिज करने योग्य। यह एक संकेत है कि लोग दवाओं के बजाय सरल, सुलभ और प्राकृतिक उपायों की ओर झुक रहे हैं। लेकिन उस झुकाव को विज्ञान की कसौटी पर कसना बहुत जरूरी है ताकि भ्रम की स्थिति ना बने।
शायद यही इस पूरे ट्रेंड का सबसे बड़ा सबक है। शरीर को सुधारने की उसकी अपनी क्षमता होती है। लेकिन वह क्षमता तभी सही दिशा में काम करती है, जब उसे सही और संतुलित आहार और प्रयासों के साथ मिले। इस तरह के ट्रेंड्स तेजी से आते हैं और चले जाते हैं लेकिन शरीर विज्ञान के नियम स्थायी होते हैं। उन्हें समझना ही असली स्वास्थ्य जागरूकता है।
डिसक्लेमर- यह आर्टिकल जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

