कोलकाता: RG कर अस्पताल में मौत की लिफ्ट! 41 वर्षीय पिता ने तोड़ा दम
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कोलकाता: RG कर अस्पताल में मौत की लिफ्ट! 41 वर्षीय पिता ने तोड़ा दम

2024 के कांड के बाद RG Kar में फिर बड़ी लापरवाही; लिफ्ट गिरने से अरूप बनर्जी की मौत, TMC विधायक ने माना प्रशासनिक फेलियर, बंगाल चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज।


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RG Kar In Controversy Again : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का आरजी कर (RG Kar) मेडिकल कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 की सुबह यहाँ एक ऐसी घटना घटी जिसने अस्पताल के सुरक्षा दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। अपने मासूम बेटे का इलाज कराने आए 41 वर्षीय अरूप बनर्जी की अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर की लिफ्ट में फंसकर मौत हो गई। यह वही अस्पताल है जिसने 2024 में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्य अपराध के बाद पूरे देश को झकझोर दिया था। तब सरकार ने सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार के बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन अरूप की मौत ने यह साबित कर दिया कि यहाँ आज भी आम आदमी की जान दांव पर लगी है। करीब एक घंटे तक अरूप मौत और जिंदगी के बीच लिफ्ट के अंदर जूझते रहे, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने उन्हें बचा पाने का मौका नहीं दिया।


कैसे हुआ हादसा: लिफ्ट बनी मौत का जाल
मृतक अरूप बनर्जी के परिजनों के अनुसार, अस्पताल की लिफ्ट अचानक अनियंत्रित होकर बेसमेंट में जा गिरी। हादसे के समय अरूप लिफ्ट के अंदर ही थे। तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुला और वह लगभग एक घंटे तक अंदर ही फंसे रहे। जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, उनकी मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया और सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया।

TMC विधायक ने स्वीकारी बड़ी लापरवाही
हैरान करने वाली बात यह है कि सत्ताधारी दल के भीतर से ही इस पर नाराजगी जाहिर की गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और कोलकाता के डिप्टी मेयर अतीन घोष ने इसे "स्थानीय प्रशासनिक विफलता" करार दिया है। घोष, जो अस्पताल की रोगी कल्याण समिति के सदस्य भी हैं, ने स्वीकार किया कि यह घटना निगरानी की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा, "इसमें कोई दो राय नहीं कि यह स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक चूक है।" उन्होंने इस मामले में आपातकालीन बैठक बुलाने और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मांगने की बात कही है।

2024 के जख्म फिर हुए हरे
यह हादसा 2024 के उस भयावह कांड के दो साल से भी कम समय में हुआ है, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। तब एक महिला डॉक्टर के साथ अस्पताल परिसर में दुष्कर्म और हत्या की गई थी। उस समय सरकार ने सीसीटीवी निगरानी, बुनियादी ढांचे के ऑडिट और जवाबदेही तय करने के बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन अरूप बनर्जी की मौत ने यह साबित कर दिया है कि जमीनी स्तर पर सुधार अब भी कोसों दूर हैं।

चुनावी मौसम में गरमाई राजनीति
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में इस हादसे ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है। विपक्षी दल भाजपा इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में है। खबरों के मुताबिक, भाजपा 2024 की पीड़िता की मां को उत्तर 24 परगना के पनिहाटी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। भाजपा का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और प्रशासनिक विफलताओं को चुनाव का मुख्य एजेंडा बनाना है।

पुलिस जांच और जवाबदेही का सवाल
कोलकाता पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज किया है। जांच के दायरे में लिफ्ट ऑपरेटर, मेंटेनेंस टीम और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। अतीन घोष ने स्पष्ट किया कि हालांकि लिफ्ट का रखरखाव पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग के अंतर्गत आता है, लेकिन मौके पर मौजूद अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


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