
चार्जशीट दाखिल होने तक नहीं होगी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी
अदालत ने जमानत के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दोनों पक्ष शंकराचार्य और आशुतोष महाराज, बयानबाजी या इंटरव्यू नहीं देंगे...
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली, जब अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। यह फैसला जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने दोपहर 3:45 बजे सुनाया।
अदालत ने जमानत के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दोनों पक्ष शंकराचार्य और आशुतोष महाराज मीडिया में बयानबाजी या इंटरव्यू नहीं देंगे। साथ ही, शंकराचार्य के विदेश जाने पर भी रोक लगाई गई है और इसके लिए उन्हें हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो दूसरा पक्ष जमानत रद्द कराने की अर्जी दे सकता है।
सुनवाई के दौरान शंकराचार्य के वकीलों ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि यात्रा या अन्य माध्यमों से हो रही बयानबाजी पर भी रोक लगाई जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आदेश का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। जमानत मिलने के बाद वाराणसी स्थित उनके मठ में समर्थकों ने खुशी जताई और काजू-कतली बांटकर जश्न मनाया।
फैसले पर शंकराचार्य की प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कई बार कानून एक जाल जैसा लगता है, जिसे कुछ लोग अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसे फैसले लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और हिम्मत बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि कानून का दुरुपयोग करने वाले हमेशा सफल नहीं होते।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष महाराज की प्रवक्ता रीना एन. सिंह ने कहा कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई जारी रहेगी और शंकराचार्य की गिरफ्तारी के लिए वे आगे कानूनी कदम उठाएंगे।
चार्जशीट क्या होती है?
कानूनी प्रक्रिया के तहत यदि आरोपी हिरासत में है, तो पुलिस को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। हालांकि, यदि आरोपी गिरफ्तार नहीं है तो जांच के लिए कुछ अतिरिक्त समय लिया जा सकता है। लेकिन इसके कारण बताने होते हैं।
चार्जशीट वह आधिकारिक रिपोर्ट होती है, जिसमें पुलिस जांच पूरी होने के बाद यह बताती है कि आरोपी पर क्या आरोप हैं, कौन-कौन से सबूत हैं और किन धाराओं के तहत मामला बनता है। इसके आधार पर अदालत तय करती है कि मुकदमा चलेगा या नहीं।
पूरा मामला क्या है?
यह पूरा मामला यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। फरवरी की 27 तारीख को हाईकोर्ट ने पहले ही शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और कहा था कि वे जांच में सहयोग करेंगे। इससे पहले 24 फरवरी को उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी।
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को जिला अदालत में याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर 21 फरवरी को झूंसी थाने में शंकराचार्य और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
ऐसे चली जांच और घटनाक्रम
मामले में पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, CCTV फुटेज जुटाए, पीड़ितों के बयान दर्ज किए और मेडिकल जांच कराई। पुलिस सूत्रों के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?
बताया गया कि 18 जनवरी को प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद 24 जनवरी को शिकायत दी गई, जिसमें बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए गए। इसके बाद 8 फरवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और 21 फरवरी को FIR दर्ज हुई।
इस मामले में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। वहीं, शंकराचार्य ने इन आरोपों को साजिश बताया है और कहा है कि सच सामने आएगा, जिसके लिए वे किसी भी जांच, यहां तक कि नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हैं।

