संडे गुड न्यूज: दिल्ली में बोरवेल के लिए मिलेगी कानूनी मंजूरी, जानें नियम
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संडे गुड न्यूज: दिल्ली में बोरवेल के लिए मिलेगी कानूनी मंजूरी, जानें नियम

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बोरवेल नीति की घोषणा की। घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगी अनुमति, सीवर नेटवर्क से जुड़ेंगी 1799 अनधिकृत कॉलोनियां।


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New Borewell Policy For Delhi : दिल्ली सरकार राजधानी में जल संकट को दूर करने और भूजल के दोहन को नियंत्रित करने के लिए एक नई 'बोरवेल नीति' (Borewell Policy) तैयार कर रही है। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में घोषणा की कि इस नीति के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को आवेदन करने पर बोरवेल लगाने की कानूनी अनुमति मिल सकेगी। हालांकि, इसके साथ ही अवैध बोरवेल का उपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य जल प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के घटते राजस्व को बहाल करना है।


घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आवेदन और शुल्क
नई नीति के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं को बोरवेल की अनुमति के लिए एक निश्चित शुल्क देना होगा। जल मंत्री ने स्पष्ट किया कि बोरवेल से निकलने वाले पानी के उपयोग के बाद जो सीवेज उत्पन्न होगा, उसके उपचार (Treatment) की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की होगी। इसी सीवेज प्रबंधन के खर्च को वहन करने के लिए उपभोक्ताओं से शुल्क लिया जाएगा। इसके साथ ही, मंत्री ने प्रत्येक दिल्लीवासी से जल संरक्षण की दिशा में प्रतिदिन कम से कम एक लीटर पानी बचाने की भावुक अपील भी की।

कैग (CAG) रिपोर्ट और पुराने प्रबंधन पर सवाल
विधानसभा में वर्ष 2017 से 2022 तक की कैग रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान जल मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के जल और सीवर प्रबंधन पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार यमुना की सफाई और बुनियादी ढांचे के निर्माण में विफल रही है। रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली में 'गैर-राजस्व जल' (Non-Revenue Water) की मात्रा 53 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जिसे अब घटाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 60 लाख बिजली कनेक्शन हैं, जबकि पानी के कनेक्शन केवल 30 लाख हैं, जिसका अर्थ है कि 30 लाख घरों में पानी का अवैध उपयोग हो रहा है।

जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स
दिल्ली में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार 36 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) अतिरिक्त पानी की व्यवस्था कर रही है। चंद्रावल और वजीराबाद जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम फिर से शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार के सहयोग से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ बांध परियोजनाओं के काम में तेजी आई है। एसटीपी (STP) से उपचारित होने वाले पानी का उपयोग अब दिल्ली के 75 पार्कों और निर्माण कार्यों में करने के लिए नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे पीने योग्य पानी की बचत होगी।

यमुना सफाई और सीवेज उपचार का मास्टरप्लान
यमुना को प्रदूषण मुक्त करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए दिल्ली में 35 नए सीवेज उपचार संयंत्र (STP) स्थापित किए जा रहे हैं और पुराने संयंत्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया जा रहा है। सरकार की योजना सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने की है। नजफगढ़ नाले सहित अन्य प्रमुख नालों का 'इन-सीटू' (In-situ) उपचार किया जाएगा ताकि गंदगी सीधे यमुना में न गिरे।

अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन का लक्ष्य
दिल्ली की सभी 1799 अनधिकृत कॉलोनियों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में लगभग 20 लाख घरों में सीवर कनेक्शन नहीं है, जिससे गंदगी नालों के जरिए यमुना में पहुँचती है। मंत्री ने बताया कि 400 कॉलोनियों में काम तेजी से चल रहा है और पिछले एक साल में ही 180 किलोमीटर से अधिक लंबी नई सीवर लाइन बिछाई गई है।


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