
राघव चड्ढा: केजरीवाल के 'आँख के तारा' से 'किरकिरी' बनने तक का सफ़र
कभी पंजाब सरकार के रिमोट कंट्रोल कहे जाने वाले राघव चड्ढा अब पार्टी में दरकिनार। जेल संकट के समय लंदन दौरे और बीजेपी से कथित नजदीकी ने बिगाड़े समीकरण।
Raghav Chadha's Demotion In AAP : आम आदमी पार्टी के भीतर इन दिनों जो खामोश हलचल मची है, उसने दिल्ली से लेकर पंजाब तक के सियासी गलियारों को गर्म कर दिया है। कभी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद और 'पोस्टर बॉय' रहे राघव चड्ढा अब हाशिए पर नजर आ रहे हैं। राज्यसभा में उपनेता पद से उन्हें हटाने की सिफारिश ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि 'आप' के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। एक समय था जब राघव चड्ढा को केजरीवाल का दाहिना हाथ माना जाता था। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव ने बहुत कम समय में पार्टी के भीतर वह ऊंचाइयां छुईं, जो सालों पुराने नेताओं को नसीब नहीं हुईं। लेकिन आज वही राघव चड्ढा अपनी ही पार्टी में एक पहेली बन गए हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट से 'सुपर सीएम' तक का सफर
राघव चड्ढा की राजनीति में एंट्री किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। अन्ना आंदोलन के बाद जब आम आदमी पार्टी बनी, तो राघव ने अपनी सीए (CA) की प्रैक्टिस छोड़कर केजरीवाल का साथ दिया। पार्टी ने उनकी काबिलियत को पहचाना और उन्हें राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया। विधायक बनने के बाद राघव का कद लगातार बढ़ता गया। केजरीवाल ने उन्हें पार्टी की वित्तीय कमान सौंपी। जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत हुई, तो राघव को राज्यसभा भेजा गया। पंजाब के कोटे से राज्यसभा जाने के बाद चर्चा उठी कि वह भगवंत मान सरकार को पीछे से नियंत्रित कर रहे हैं। विपक्ष उन्हें 'सुपर सीएम' कहने लगा था।
जब दोस्ती के बीच आई 'दूरी' की दीवार
सवाल उठता है कि इतना गहरा विश्वास अचानक दरक कैसे गया? इसकी जड़ें उस दौर में हैं जब दिल्ली शराब घोटाले की आंच केजरीवाल तक पहुंची थी। जब केजरीवाल जेल में थे, तब पार्टी को अपने सबसे तेज-तर्रार प्रवक्ताओं की जरूरत थी। लेकिन राघव चड्ढा ने उस कठिन समय में पार्टी से दूरी बना ली। उन्होंने अपनी आंखों की बीमारी 'विट्रियल डिटैचमेंट' का हवाला दिया और पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन चले गए। पार्टी के भीतर यह बात तेजी से फैली कि जब सेनापति संकट में था, तब उसका सबसे खास सिपाही मैदान छोड़कर विदेश में छुट्टियां मना रहा था।
शराब घोटाला और जांच एजेंसियों का दबाव
पार्टी सूत्रों का दावा है कि राघव चड्ढा केवल बीमारी की वजह से विदेश नहीं गए थे। दरअसल, कथित शराब घोटाले की जांच के दौरान राघव का नाम भी सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद राघव पर दबाव बढ़ गया था। माना जाता है कि वह अपनी गिरफ्तारी की आशंका से डरे हुए थे। इसी डर ने उन्हें पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों से दूर कर दिया। केजरीवाल जब तिहाड़ जेल में संघर्ष कर रहे थे, तब राघव की अनुपस्थिति ने उनके रिश्तों में कड़वाहट के बीज बो दिए।
परिणीति चोपड़ा और निजी जीवन का प्रभाव
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से शादी के बाद राघव की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। पार्टी के पुराने नेताओं का कहना है कि अब राघव के राजनीतिक फैसलों में उनकी पत्नी का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। उनकी जीवनशैली अब एक जुझारू राजनेता की जगह एक 'सेलिब्रिटी' जैसी हो गई है। शादी के बाद उनके पहनावे से लेकर बातचीत के लहजे तक में बदलाव आया। इस दौरान ऐसी अफवाहें भी उड़ीं कि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि उन्होंने कभी इस पर खुलकर बात नहीं की, लेकिन उनकी चुप्पी ने आग में घी का काम किया।
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 2, 2026
राज्यसभा में 'पार्टी लाइन' से बगावत?
पार्टी नेतृत्व की नाराजगी की एक बड़ी वजह राज्यसभा में राघव का व्यवहार भी रहा है। आम आदमी पार्टी चाहती थी कि राघव केंद्र सरकार को गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और विदेश नीति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर घेरें। लेकिन राघव चड्ढा ने इन मुद्दों के बजाय उन विषयों पर बोलना पसंद किया, जो सोशल मीडिया पर उनकी 'पर्सनल ब्रांडिंग' में मददगार हों। कई बार उन्होंने ऐसे बयान दिए जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाते थे। नेतृत्व को लगा कि राघव अब पार्टी के सिपाही नहीं, बल्कि अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं।
केजरीवाल की 'बॉडी लैंग्वेज' ने दिया संकेत
जब अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आए, तो उन्होंने राघव चड्ढा के प्रति अपना रुख साफ कर दिया। सार्वजनिक मंचों पर केजरीवाल ने राघव को वह तवज्जो नहीं दी, जो पहले मिला करती थी। केजरीवाल ने खुद पंजाब की कमान अपने हाथों में ले ली और भगवंत मान के साथ सीधे संवाद शुरू कर दिया। राघव को पंजाब की कोर कमिटी से भी किनारे कर दिया गया। अब जब उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटाने की बात हुई है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि केजरीवाल अब नए चेहरों पर दांव लगाने के मूड में हैं।
पंजाब विधानसभा चुनाव और राघव का भविष्य
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो चुकी है। आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव साख का सवाल है। ऐसे में राघव चड्ढा जैसे कद्दावर नेता का बागी होना या हाशिए पर जाना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है। क्या राघव वाकई बीजेपी में शामिल होंगे? या वह कांग्रेस की ओर रुख करेंगे? फिलहाल वह 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं। लेकिन एक बात साफ है कि 'आप' में उनकी पुरानी चमक अब फीकी पड़ चुकी है। राजनीति में 'ग्रेस' बहुत मायने रखती है, और राघव ने मुश्किल घड़ी में साथ छोड़कर वह ग्रेस खो दी है।

