हरियाणा से सुलगी आग, नोएडा में बवाल; क्या है मजदूर की मजबूरी?
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हरियाणा से सुलगी आग, नोएडा में बवाल; क्या है मजदूर की मजबूरी?

हरियाणा में बढ़ी पगार तो नोएडा की सड़कों पर उतरे हजारों मजदूर, 10 हजार में घर चलाने की मजबूरी और शोषण के खिलाफ खोला मोर्चा; जानें क्या हैं श्रमिकों की मांगें।


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Violent Protest In Noida By Labourers : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में सोमवार की सुबह किसी सामान्य दिन की तरह शुरू नहीं हुई। सूरज चढ़ने के साथ ही शहर की सड़कों पर मजदूरों का हुजूम उमड़ने लगा और देखते ही देखते हजारों श्रमिक विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। यह उबाल अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे पड़ोसी राज्य हरियाणा का एक बड़ा फैसला है। हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद अब नोएडा के मजदूरों ने भी आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। पगार बढ़ाने की यह मांग अब केवल कारखानों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। जगह-जगह हुए हिंसक प्रदर्शनों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और औद्योगिक इकाइयों में काम पूरी तरह ठप नजर आ रहा है।



पड़ोसी राज्य के फैसले से नोएडा में उबाल
नोएडा में औद्योगिक अशांति की मुख्य वजह हरियाणा सरकार का वह फैसला है, जिसमें श्रमिकों के वेतन में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। हरियाणा सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की जिसके तहत 1 अप्रैल 2026 से मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में करीब 35 फीसदी का बड़ा इजाफा कर दिया गया। जैसे ही यह खबर सीमा पार कर नोएडा के लेबर चौक और फैक्ट्रियों तक पहुंची, यहाँ के मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया। मजदूरों का तर्क बहुत सीधा और तार्किक है कि जब नोएडा और गुरुग्राम दोनों ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा हैं, तो वेतन में इतना बड़ा अंतर क्यों? दोनों शहरों में महंगाई का स्तर एक जैसा है और जीवन यापन का खर्च भी बराबर है, फिर नोएडा के मजदूरों को कम पगार पर क्यों काम करना पड़ रहा है?

मजदूरों का कहना है कि वे सालों से इसी उम्मीद में काम कर रहे थे कि कभी तो उनके अच्छे दिन आएंगे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनके पड़ोस में काम करने वाले साथियों की किस्मत एक कलम की ताकत से बदल गई, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारी समूहों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी अब बिना देरी किए हरियाणा की तर्ज पर अधिसूचना जारी करनी चाहिए।

वेतन की विसंगति और ग्राउंड रियलिटी
नोएडा की फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों ने अपनी बदहाली का जो मंजर बयां किया है, वह काफी चिंताजनक है। एनडीटीवी से बातचीत के दौरान मजदूरों ने बताया कि उन्हें महीने के मात्र 10 से 11 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। आज के समय में जब महंगाई आसमान छू रही है, इतने कम पैसों में परिवार का पेट पालना किसी चुनौती से कम नहीं है। एक मजदूर ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि गांव के देहाती इलाकों में भी अब 500 से 600 रुपये की दिहाड़ी मिल रही है, जबकि नोएडा जैसे बड़े शहर में उन्हें मात्र 300 रुपये प्रतिदिन पर खटाया जा रहा है।

श्रमिकों ने केवल वेतन ही नहीं, बल्कि काम के माहौल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि कंपनियों के मैनेजर उनसे अभद्र भाषा में बात करते हैं और उन्हें इंसान की जगह मशीन समझा जाता है। महिला श्रमिकों की स्थिति और भी खराब है, जिन्हें कई-कई घंटों तक अपनी जगह से हिलने तक की इजाजत नहीं मिलती। मजदूरों की मांग है कि उनका मासिक वेतन कम से कम 20 हजार रुपये सुनिश्चित किया जाए ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।

हरियाणा और गुरुग्राम का उदाहरण क्यों?
नोएडा के मजदूरों के लिए हरियाणा का उदाहरण एक नजीर बन गया है। हरियाणा में अब अनस्किल्ड कामगारों का वेतन 11,274 रुपये से बढ़कर सीधा 15,220 रुपये हो गया है। इसी तरह स्किल्ड यानी कुशल कामगारों का वेतन भी बढ़कर 18,500 रुपये के पार पहुंच गया है। इस वृद्धि ने नोएडा के मजदूरों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे अब तक चुप क्यों थे? प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि अब वे केवल मौखिक आश्वासन से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्हें कंपनियों और प्रशासन की तरफ से वेतन वृद्धि का लिखित आश्वासन चाहिए।

क्या कहता है न्यूनतम मजदूरी का सरकारी गणित?
भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए कुछ ठोस आधार बनाए हैं। इसमें काम करने वाले का अनुभव, उसका हुनर और वह किस इलाके में काम कर रहा है, यह बहुत मायने रखता है। केंद्र सरकार की ताजा दरों के अनुसार, एक अकुशल मजदूर को कम से कम 783 रुपये प्रतिदिन और एक कुशल मजदूर को 954 रुपये प्रतिदिन मिलने चाहिए। अगर इन आंकड़ों की तुलना नोएडा में मिल रहे मौजूदा वेतन से की जाए, तो यह स्पष्ट है कि नियमों की अनदेखी हो रही है।

श्रमिकों का आरोप है कि प्राइवेट कंपनियां सरकारी आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं और अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए मजदूरों का शोषण करती हैं। फिलहाल नोएडा के कई सेक्टरों में भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन कोशिश कर रहा है कि मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकल सके। लेकिन मजदूरों के तेवरों को देखकर लग रहा है कि जब तक उनकी जेब में ज्यादा पैसे आने का रास्ता साफ नहीं होता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।


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