Punjab Politics : पंजाब की सियासत में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई पंजाब राज्य वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा की मौत के बाद हुई है। रंधावा ने शनिवार को कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। पुलिस ने भुल्लर के साथ उनके पिता सुखदेव सिंह और निजी सहायक दिलबाग सिंह को भी नामजद किया है। अमृतसर के रणजीत एवेन्यू पुलिस स्टेशन में शनिवार रात यह प्राथमिकी दर्ज की गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर भुल्लर पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस पूरे मामले में आग में घी डालने का काम किया है। इस घटनाक्रम से आम आदमी पार्टी की सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर हमलावर हो गया है।
सुसाइड से पहले बनाया वीडियो, मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
गगनदीप सिंह रंधावा ने मौत से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्हें 'सल्फॉस' खाने की बात कहते सुना गया। रंधावा ने सीधे तौर पर मंत्री लालजीत भुल्लर का नाम लिया। उन्होंने कहा कि वह मंत्री के डर और प्रताड़ना के कारण यह कदम उठा रहे हैं। वीडियो में रंधावा काफी डरे हुए और भावुक नजर आ रहे थे। इस वीडियो के वायरल होते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर की शिकायत पर अब कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
भ्रष्टाचार और मारपीट के आरोपों से घिरे लालजीत भुल्लर
विपक्षी दलों ने भुल्लर पर रंधावा को धमकाने का आरोप लगाया है। कहा जा रहा है कि मंत्री अपने पिता के पक्ष में टेंडर अलॉट करने का दबाव बना रहे थे। आरोपों के अनुसार, 13 मार्च को रंधावा को मंत्री के आवास पर बुलाया गया था। वहां उनके साथ मारपीट और अपमानजनक व्यवहार किया गया। रंधावा पर 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने का झूठा आरोप भी लगाया गया। इतना ही नहीं, जबरन उनका एक वीडियो भी बनवाया गया था। इन सभी घटनाओं ने अफसर को मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का सख्त रुख और निष्पक्ष जांच का वादा
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम भगवंत मान ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने मुख्य सचिव को इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। मान ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए मंत्री का इस्तीफा जरूरी था। सरकार ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। भुल्लर के परिवहन और जेल विभागों को अब दूसरे मंत्रियों को सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है। सरकार इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष का हमला और पंजाब की राजनीति पर असर
शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। विपक्षी नेताओं ने भुल्लर के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अफसरों पर राजनीतिक दबाव की यह पराकाष्ठा है। इस घटना से पंजाब के प्रशासनिक हलकों में भी रोष देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला पंजाब की राजनीति को और प्रभावित कर सकता है। पुलिस अब सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है। भुल्लर ने हालांकि अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
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