
देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतिशोध का बोझ सिर्फ हमारे क्रिकेटर्स और बॉलीवुड पर ही क्यों पड़ता है?
कई बार क्रिकेट और बॉलीवुड को सरकार की नीतियों के आगे झुकना भी पड़ता है। इस बार भी एक ऐसा ही मामला तब सामने आया, जब आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज करने को कहा गया। KKR ने मुस्ताफिजुर को IPL 2026 की नीलामी में 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था और यह नाम खुद BCCI की रजिस्टर्ड खिलाड़ियों की लिस्ट में था। यह फैसला तब आया, जब सोशल मीडिया पर कुछ दक्षिणपंथी अकाउंट्स ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों को बाहर करने की मांग शुरू कर दी। इस तरह एक फ्रेंचाइजी टीम से ऐसा राजनीतिक कदम उठाने की उम्मीद की गई, जो आमतौर पर सरकारों का काम होता है। यह फैसला ऐसे समय पर आया जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर कुछ ही दिन पहले बांग्लादेश जाकर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे और दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे थे।
बांग्लादेश की प्रतिक्रिया
इस फैसले के जवाब में बांग्लादेश ने फरवरी में कोलकाता और मुंबई में होने वाले अपने T20 वर्ल्ड कप मैच भारत से बाहर कराने की मांग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश इस कदम को अपमान मान रहा है और टूर्नामेंट के बहिष्कार पर भी विचार कर सकता है। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाला T20 वर्ल्ड कप अब खतरे में दिख रहा है। आलोचकों का कहना है कि BCCI ने विदेशी नीति के मामले में दखल देकर कट्टर तत्वों को खुश करने की कोशिश की है। पहले ही पाकिस्तानी खिलाड़ी अनौपचारिक रूप से IPL से बाहर हैं, जिससे टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा और विविधता कम होती जा रही है।
BCCI में जिम्मेदारी का अभाव
इस पूरे मामले में BCCI के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने न तो लिखित आदेश जारी किया और न ही सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी ली। आलोचकों का कहना है कि BCCI पर लंबे समय से जय शाह का प्रभाव है, जो पहले सचिव और अब ICC चेयरमैन हैं। पूर्व अध्यक्ष रोजर बिन्नी और मौजूदा अध्यक्ष मिथुन मन्हास की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। क्रिकेट नीति, भविष्य की योजनाओं या ऐसे विवादों पर BCCI की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आता।
पाकिस्तान से हैंडशेक तक पर रोक
इसी तरह एशिया कप के दौरान भारत-पाकिस्तान मैच में भारतीय खिलाड़ियों को पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने के निर्देश दिए गए। यहां तक कि कप्तान सूर्यकुमार यादव को टॉस के दौरान भी पाक कप्तान से हाथ न मिलाने को कहा गया। खेल भावना का प्रतीक माने जाने वाले इस परंपरागत व्यवहार पर रोक को लेकर भी काफी आलोचना हुई। सवाल यह है कि अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत आने से इनकार कर दें तो बड़े टूर्नामेंट कैसे होंगे और क्रिकेट से होने वाली कमाई कहां से आएगी?
बॉलीवुड में भी बढ़ता राष्ट्रवादी दबाव
क्रिकेट की तरह ही बॉलीवुड से भी बार-बार अपेक्षा की जाती है कि वह “दुश्मन देशों” के खिलाफ राष्ट्रवादी संदेश दे। पहले यह भूमिका पाकिस्तान तक सीमित थी, अब बांग्लादेश को भी इसमें जोड़ दिया गया है। फिल्मों में नए-नए दुश्मन, नए मोर्चे और नए शहर दिखाए जाने लगे हैं, जिससे असली कूटनीति और मनोरंजन के बीच की रेखा और धुंधली हो गई है।
भारतीय क्रिकेट को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी?
आलोचकों का कहना है कि जिन भूमिकाओं के लिए सरकार जिम्मेदार है, उन्हें क्रिकेट बोर्ड और फिल्म उद्योग पर डाला जा रहा है। अगर किसी देश को कूटनीतिक संदेश देना है तो यह BCCI या क्रिकेट टीम का काम नहीं है। अगर बांग्लादेश फरवरी-मार्च में होने वाले T20 वर्ल्ड कप के लिए भारत आने से इनकार करता है तो उपमहाद्वीप में क्रिकेट व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब वक्त आ गया है कि BCCI नेतृत्व अपनी नीति स्पष्ट करे और जिम्मेदारी ले, वरना भारतीय क्रिकेट को आने वाले समय में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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