
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पर अमेरिकी हस्तक्षेप का परिणाम बहुत गंभीर हो सकता है। 50 वर्षों से ईरानी जनता में अमेरिका-विरोधी भावना है। इतिहास दर्शाता है कि आंतरिक विद्रोह से शासन परिवर्तन और बाहरी हस्तक्षेप से परिवर्तन में बड़ा अंतर होता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान में जारी राजनीतिक और सामाजिक अशांति में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की इस धमकी की सबसे चौंकाने वाली बात है, इसका खुला, निडर अंदाज और इसे बाकी दुनिया में सामान्य मान लिया जाना। ट्रंप ने हस्तक्षेप का कारण ईरानी प्रदर्शनकारियों की मौतें बताया है, लेकिन कई आलोचक इसे तर्कहीन और ढुलमुल मान रहे हैं। पिछले समय में ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को ड्रग तस्करी के आरोप में निशाना बनाने की धमकी दी थी, लेकिन उसके बाद उस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बार ट्रंप का फोकस ईरानी तेल और उसकी उत्पादन एवं व्यापार नियंत्रण पर है, जो राष्ट्रीय संप्रभुता की अनदेखी को दर्शाता है।
ईरानी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और अमेरिकी प्रतिक्रिया
हाल के दिनों में ईरान में पुलिस कार्रवाई के दौरान 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत और सैकड़ों की गिरफ्तारी की खबरें आई हैं। ट्रंप अगर वास्तव में मानव जीवन की चिंता करते तो वह म्यांमार, सूडान और यमन पर ध्यान दे सकते थे, जहां हजारों लोग लगातार संघर्षों में मारे जा रहे हैं। इजराइल के हमास हमलों के बाद गाजा में किए गए नरसंहार के समय भी ट्रंप ने कहा था कि इजराइल सरकार “काम पूरा करे”। जबकि बाद में उन्होंने संघर्ष रोकने का प्रयास किया, यह सब तब हुआ जब पहले ही लगभग 70,000 फिलिस्तीनियों की reported मौत हो चुकी थी और गाजा में भारी तबाही हो चुकी थी। अब ट्रंप का अगला निशाना ईरान है और मीडिया इसे मानो अमेरिकी कार्रवाई का स्वाभाविक हिस्सा मान रही है।
इतिहास के सबक: इराक और ईरान का अंतर
2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के पहले जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन ने लंबे समय तक बहस और प्रचार किया था, ताकि आक्रमण को वैध बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन के पास “विस्फोटक हथियार” हैं और अल-कायदा से उनका संबंध है। इस बार ट्रंप ने कोई लंबी बहस नहीं की और सीधे ईरान पर सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पर हमला पिछली जून 2025 की अमेरिकी मिसाइल स्ट्राइक की तरह लक्षित हो सकता है, जो देश के परमाणु कार्यक्रम को पहले ही प्रभावित कर चुकी है।
मोसाद और ट्रंप का सहयोग
इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने खुलकर ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन का ऐलान किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट में मोसाद ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि सड़कों पर निकलें, समय आ गया है। हम आपके साथ हैं – न केवल शब्दों में, बल्कि जमीन पर भी। पिछले दो महीनों में लगभग 10 संदिग्ध मोसाद एजेंटों को मार दिया गया। 12-दिन के अभियान में लगभग 100 एजेंटों ने ईरान के हवाई रक्षा और मिसाइल प्रणाली को नष्ट करने का काम किया।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
यूरोपीय देशों ने इस समय ट्रंप की धमकी के खिलाफ कोई कड़ा विरोध नहीं किया। रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है, जबकि चीन अपने सौदे और व्यापार हितों की वजह से कुछ सीमित बयान ही दे रहा है। परिणामस्वरूप ईरान पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग है।
ईरान के आंतरिक हालात
आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य असफलताओं के कारण ईरान कमजोर हुआ है। आंतरिक तौर पर छोटे व्यवसाय और बाजार सरकार के खिलाफ हो चुके हैं। ट्रंप की रणनीति यानी शासन परिवर्तन, सरल दिखती है लेकिन व्यवहार में बेहद जटिल और खतरनाक है। ईरान के राजनीतिक ढांचे में धार्मिक परिषद, इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और गहन नेटवर्किंग शामिल है। लक्षित हमले से कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर या नेताओं को नुकसान हो सकता है, लेकिन शासन संरचना को आसानी से बदला नहीं जा सकता। साल 2020 में क़ासिम सोलैमानी की हत्या के बाद भी उनके स्थान पर उनका उपाध्यक्ष एस्माइल क़ान ने कार्यभार संभाला और प्रणाली चलती रही।


