
सातनकुलम कांड: पिता-पुत्र की बर्बर हत्या के 9 पुलिसकर्मी दोषी करार
मदुरै अदालत ने 2020 के जयराज-बेनिक्स हत्याकांड में 9 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया। 30 मार्च को होगा सजा का एलान। जानें थूथुकुडी के उस खौफनाक रात की पूरी कहानी।
Thoothukudi Police Custodial Death Case : तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में करीब छह साल पहले हुई पुलिस बर्बरता, जिसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था, उसमें सोमवार (23 मार्च) को न्याय की पहली बड़ी जीत हुई है। मदुरै जिला अदालत के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने सातनकुलम पुलिस स्टेशन के तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर सहित 9 पुलिसकर्मियों को कस्टोडियल टॉर्चर और हत्या का दोषी घोषित किया है। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान मोबाइल की दुकान चलाने वाले पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को पुलिस ने मामूली विवाद के बाद हिरासत में लिया था। थाने के भीतर उनके साथ जो अमानवीय व्यवहार हुआ, उसने मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ा दी थीं। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या के आरोपों को वैज्ञानिक और चश्मदीद सबूतों के आधार पर पूरी तरह साबित कर दिया है।
वो काली रात: सिर्फ 15 मिनट की देरी और मौत का तांडव
यह पूरी घटना 19 जून 2020 की है। जयराज और बेनिक्स पर आरोप था कि उन्होंने लॉकडाउन प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए अपनी मोबाइल शॉप तय समय से महज कुछ मिनट ज्यादा खुली रखी थी। प्रत्यक्षदर्शियों और जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस उन्हें थाने ले गई जहाँ उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया गया। उन्हें निर्वस्त्र कर घंटों पीटा गया और निजी अंगों पर गंभीर चोटें पहुँचाई गईं। अत्यधिक खून बहने और आंतरिक चोटों के कारण, पिता-पुत्र की कुछ ही दिनों के भीतर कोविलपट्टी उप-जेल में मौत हो गई। इस घटना ने तमिलनाडु सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जन-आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी।
इन 9 पुलिसकर्मियों को भुगतनी होगी सजा
अदालत ने जिन पुलिसकर्मियों को दोषी पाया है, वे सभी मदुरै सेंट्रल जेल में बंद हैं:
मुख्य आरोपी: तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर।
सब-इंस्पेक्टर: पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन।
हेड कांस्टेबल: एस. मुरुगन और ए. सामीदुरई।
कांस्टेबल: एम. मुथुराज, एस. वेल मुथु, एस. चेल्लादुरई और एक्स. थॉमस फ्रांसिस।
(विशेष सब-इंस्पेक्टर ए. पॉलदुरई की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।)
CBI की 2500 पन्नों की चार्जशीट और गवाहों की भूमिका
जुलाई 2020 में मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा गया था। सीबीआई ने अपनी 2500 पन्नों की चार्जशीट में उन भयानक यातनाओं का विवरण दिया था जो जयराज और बेनिक्स को दी गई थीं। मामले में कुल 105 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सबसे महत्वपूर्ण गवाही उसी थाने की महिला हेड कांस्टेबल आर. रेवती की रही, जिन्होंने अपनी ही सहकर्मियों के खिलाफ गवाही देकर पुलिस की बर्बरता का पर्दाफाश किया। जांच में यह भी पाया गया कि पुलिसकर्मियों ने सबूत मिटाने के लिए खून से सनी दीवारें साफ की थीं और सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए थे।
अदालत का कड़ा रुख और 30 मार्च का इंतजार
दोषी इंस्पेक्टर श्रीधर ने केस के दौरान 'सरकारी गवाह' बनने की कोशिश भी की थी, लेकिन अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने इस ट्रायल की बारीकी से निगरानी की और पिछले साल नवंबर में इसे 3 महीने के भीतर खत्म करने का अल्टीमेटम दिया था। जयराज की पत्नी सेलवरानी की लंबी कानूनी लड़ाई रंग लाई है। अब 30 मार्च को न्यायाधीश इन दोषियों के लिए सजा मुकर्रर करेंगे। जानकारों का मानना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को उम्रकैद या उससे भी सख्त सजा मिल सकती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ )

