Yogi 2.0 : कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज़, जातीय समीकरण साधने पर ज़ोर
x
कैबिनेट विस्तार में चुनावी दृष्टि से समीकरण साधने पर रहेगा ज़ोर

Yogi 2.0 : कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज़, जातीय समीकरण साधने पर ज़ोर

उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार और यूपी में सरकार और संगठन के बीच लगातार हो रही बैठकों ने योगी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज़ कर दी है।विस्तार में ब्राह्मणों की नाराज़गी, जातीय गणित,ओबीसी पॉलिटिक्स पर फोकस के बीच संतुलन साधने की चुनौती होगी।


Yogi cabinet expansion news: उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक बार फिर योगी कैबिनेट के विस्तार को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है।माना जा रहा है कि अब जल्द ही कैबिनेट विस्तार के लिए तारीख की घोषणा हो सकती है।इस बीच मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को हुई बड़ी बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई।जिसके बाद निगमों और बोर्डों में कार्यकर्ताओं के समायोजन से लेकर कैबिनेट विस्तार तक के बारे में चर्चा तेज़ हो गई।पिछले दिनों में हुई सरकार और संगठन के समन्वय बैठकों में हुई चर्चा से निकले फीडबैक पर भी मंथन हुआ।

जल्द हो सकता है योगी कैबिनेट का विस्तार-

यूपी में पिछले कुछ समय से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा होती रही है।कई बार मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें लगायी जाती रहीं पर विस्तार को लेकर कोई फाइनल फ़ैसला नहीं हुआ।ज़ाहिरा तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की प्राथमिकताओं की वजह से यह टलता रहा।बिहार चुनाव, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में शीर्ष नेतृत्व की व्यस्तता रही।लेकिन जानकार बताते हैं कि पर्दे के पीछे कई मुद्दों ने विस्तार की राह को रोके रखा।चुनाव से पहले जातीय गणित के फॉर्म्युले को साधने के लिए भी मंथन होता रहा।शुक्रवार को जब उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ तो एक बार फिर यह चर्चा तेज़ हो गई।इधर यूपी में पिछले कुछ समय से हो रही बैठकों के दौर से भी इसे जोड़ा गया।शुक्रवार को ही लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की बैठक हुई।बताया जा रहा है कि इसमें सरकार और संगठन के समन्वय पर पहले हुई बैठकों से मिले फीड बैक के अलावा चुनाव से पहले होने वाले बड़े फैसलों पर चर्चा हुई जिसमें योगी कैबिनेट विस्तार भी शामिल है।योगी कैबिनेट का विस्तार अप्रैल के पहले सप्ताह तक हो सकता है।

कैबिनेट विस्तार में क्या है 'ब्रेक’ की वजह?

दरअसल योगी कैबिनेट के विस्तार पर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं।लेकिन अलग-अलग वजहों से अब तक यह फैसला नहीं हो पाया।2027 से पहले होने वाले आख़िरी मंत्रिमंडल विस्तार को काफ़ी अहम माना जा रहा है।यह तय है कि इसके ज़रिए बीजेपी चुनावी रणनीति को धार देगी।शुक्रवार को उत्तराखंड में धामी कैबिनेट का विस्तार होने के बाद यूपी में विस्तार को लेकर दबाव बढ़ गया है।वजह यह है कि चुनावी रणनीति के तहत जातीय समीकरण साधकर वोटरों को संदेश देने की दृष्टि से इस विस्तार को अहम माना का रहा है और इसके लिए सबसे सही वक्त अभी है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव समेत संगठनात्मक गतिविधियां चल रही थीं।अब नए प्रदेश अध्यक्ष को टीम गठन करना है अब इसलिए ज़्यादा स्पष्ट तस्वीर होगी क्योंकि कई लोगों को सरकार से संगठन में भी भेजा जा सकता है।

जातीय समीकरण साधने की चुनौती-

राजनीतक विश्लेषक योगी कैबिनेट विस्तार में देरी को जातीय समीकरण साधने की चुनौती से भी जोड़ कर देख रहे हैं।दरअसल बीजेपी उत्तर प्रदेश में कुछ समय से ओबीसी पॉलिटिक्स पर फोकस कर रही है।ग़ैर यादव ओबीसी को साधने के लिए पार्टी लगातार कोशिश कर रही है।पिछड़ा वर्ग में यादव के बाद दूसरी सबसे बड़ी जाति कुर्मी को साधने और कुर्मी मतदाताओं को संदेश देने के लिए ही पार्टी ने काफ़ी मंथन के बाद केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संगठन की कमान सौंपी है।जबकि इससे एक ही क्षेत्र (गोरक्ष क्षेत्र) से मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों हो हो गए हैं।वहीं हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी नेतृत्व ने यूपी के ओबीसी मतदाताओं को एक और संदेश दिया है।इसके बावजूद माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में ओबीसी चेहरे को मौक़ा दिया जा सकता है।लेकिन पार्टी के सामने यह संकट है कि पार्टी से सवर्ण और ख़ास तौर पर ब्राह्मण मतदाताओं की नाराज़गी के चलते अब ब्राह्मण प्रतिनिधित्व का ध्यान रखना भी ज़रूरी हो गया है।

चुनाव से पहले ब्राह्मण नाराज़गी का मुद्दा अहम-

पिछले कुछ समय से लगातार ब्राह्मणों की सरकार से नाराज़गी की बात सामने आ रही है।इसी बीच माघ मेला स्नान विवाद में शंकराचार्य के बटुक शिष्यों की शिखा खींचकर मारने और UGC के नए नियमों को वजह से भी सवर्ण और ख़ास तौर पर ब्राह्मण वर्ग को नाराज़गी की बात कही जा रही है।इसलिए कैबिनेट विस्तार में इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है जिससे ब्राह्मण नेता को प्रतिनिधित्व देकर ब्राह्मण मतदाताओं को संदेश दिया जा सके।इसके साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बीच मानों को लेकर सहमति भी बनानी होगी।ऐसे में जबकि सरकार और संगठन में लंबे समय से खींचतान की चर्चा भी होती रही है।

कई नामों की चर्चा, सपा के बागियों को मिल सकता है इनाम-

योगी कैबिनेट विस्तार में ऐसे कुछ चेहरों को लेकर चर्चा है जो मौजूदा वक्त के हिसाब से जातीय और अन्य सियासी समीकरणों में फिट होते हैं।इन्हीं चुनौतियों और समीकरणों का ध्यान रखकर योगी कैबिनेट विस्तार को 'टार्गेटेड’ रखने का फ़ैसला किया है गया है।नामों पर मंथन हो चुका है और अंतिम सूची पर मुहर केंद्रीय नेतृत्व लगाएगा।फ़िलहाल माना जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।सिर्फ़ एक-दो मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है जबकि कुछ के विभागों में फेरबदल हो सकता है।पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह चौधरी का मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है।उनके शामिल होने से पश्चिम यूपी को प्रतिनिधित्व मिलेगा।इसके साथ ही अवध क्षेत्र से एक दलित चेहरे को भी शामिल किया जा सकता है।हालांकि एक क्षत्रिय विधायक के नाम भी चर्चा है। ब्राह्मणों की नाराज़गी को देखते हुए पार्टी दो ब्राह्मण मंत्री बना सकती है।कहा जा रहा है कि इसमें पार्टी के एक ब्राह्मण एमएलसी शामिल हैं जबकि सपा के बागी और पूर्व मंत्री मनोज पांडे के नाम की भी चर्चा है।कैबिनेट विस्तार में एक महिला मंत्री बनना भी लगभग तय है।कहा जा रहा है कि सपा से बगावत करने वाली पूजा पाल को मंत्री बनाया जा सकता है।पूर्व बीएसपी विधायक स्व. राजू पाल पाल की पत्नी पूजा पाल ने राज्यसभा चुनाव के समय बीजेपी का साथ दिया था।फिर योगी के ‘एंटी माफिया’ स्टैंड और अपने पति की हत्या में शामिल अतीक अहमद पर कार्रवाई के लिए विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया था जिसके बाद उनको समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

Read More
Next Story