कोच से चैंपियन तक, बजट में खेल प्रतिभा के लिए दशक भर की योजना
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कोच से चैंपियन तक, बजट में खेल प्रतिभा के लिए दशक भर की योजना

बजट 2026 में सरकार ने ‘खेलो इंडिया मिशन’ का ऐलान किया। अगले 10 वर्षों में कोचिंग, प्रशिक्षण केंद्र, खेल विज्ञान और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा।


Budget 2026 Khelo India Mission: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘खेलो इंडिया मिशन’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस मिशन का उद्देश्य अगले एक दशक में प्रशिक्षण केंद्रों और कोचों के व्यवस्थित विकास पर फोकस करना है। यह प्रस्ताव सरकार के प्रमुख ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम को और मजबूत करेगा, जिसका लक्ष्य देश में जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह मिशन आपस में जुड़े मार्गों (इंटर-लिंक्ड पाथवे) के जरिए एक एकीकृत प्रतिभा विकास कार्यक्रम को बढ़ावा देगा। गौरतलब है कि 2017 में शुरू किया गया खेलो इंडिया कार्यक्रम देश में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने और खेलों के माध्यम से बच्चों व युवाओं के समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की एक अहम पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न आयु वर्गों में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभाओं की पहचान करना रहा है। साथ ही यह पहल खेल अवसंरचना के उपयोग और उन्नयन पर भी केंद्रित है।

खेल क्षेत्र का विकास

अपने बजट भाषण में निर्मला सीतारमण ने कहा कि खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरी के कई अवसर प्रदान करता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के जरिए शुरू किए गए खेल प्रतिभाओं के व्यवस्थित पोषण को आगे बढ़ाते हुए, मैं अगले दशक में खेल क्षेत्र को रूपांतरित करने के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन’ शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।

उन्होंने बताया कि यह मिशन निम्नलिखित पहलुओं को सुगम बनाएगा। प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से एकीकृत प्रतिभा विकास मार्ग, जिसमें बुनियादी, मध्यवर्ती और एलीट स्तर शामिल होंगे, कोचों और सहयोगी स्टाफ का व्यवस्थित विकास, खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण, खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को मंच देने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग, प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए खेल अवसंरचना का विकास।

खेल उपकरण उद्योग को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में उच्च गुणवत्ता और किफायती खेल उपकरणों का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा मैं खेल उपकरणों के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव करती हूं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, उपकरण डिज़ाइन में अनुसंधान और नवाचार तथा मटीरियल साइंस को बढ़ावा मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने जा रहा है। इसके अलावा भारत 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भी बोली लगा रहा है। हाल ही में खेल मंत्रालय द्वारा गठित एक टास्क फोर्स जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद कर रहे हैं—ने उच्च गुणवत्ता वाले कोचों का मजबूत समूह तैयार करने पर अधिक जोर देने की सिफारिश की थी।

टास्क फोर्स ने कोचों के लिए ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ जैसी योजना का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि उन्हें भी उसी तरह वित्तीय सहायता मिल सके जैसी एलीट खिलाड़ियों को दी जाती है। इससे भविष्य में भारत की पदक संभावनाओं को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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