सीने के दर्द को मामूली समझना दिग्गज शूटर जसपाल राणा के लिए हुआ जानलेवा
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सीने के दर्द को मामूली समझना दिग्गज शूटर जसपाल राणा के लिए हुआ जानलेवा

कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 मेडल जीतने वाले भारत के महान निशानेबाज ने दिल्ली के अस्पताल में ली आखिरी सांस. साइलेंट हार्ट अटैक के बाद हुआ कार्डियक रप्चर.


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Shooter Jaspal Rana Demise: अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब भी किसी के सीने में अचानक दर्द उठता है, तो लोग असमंजस की स्थिति में आ जाते हैं कि यह गैस और एसिडिटी की वजह से है या फिर हार्ट अटैक का कोई शुरुआती लक्षण. लोग इसी उलझन और घरेलू नुस्खों के फेर में घंटों और दिन बिता देते हैं, जिससे डॉक्टर के पास पहुंचने में भारी देरी हो जाती है. यही जानलेवा लापरवाही भारत के महान निशानेबाज और कोच जसपाल राणा के साथ भी हुई, जहां सीने के दर्द को मामूली समझने की इसी बड़ी भूल और असमंजस ने आखिरकार उनकी जान ले ली.


मैक्स अस्पताल के कार्डियक साइंसेज के ग्रुप चेयरमैन डॉ. बलबीर सिंह ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया. डॉक्टर के मुताबिक, जसपाल राणा को करीब तीन दिन पहले ही 'साइलेंट' हार्ट अटैक आया था, लेकिन लगातार यात्रा करने और सीने में दर्द को नजरअंदाज करने के चलते वे बेहद गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे थे. डॉक्टरों ने उनकी ब्लॉक आर्टरी को खोलकर शुरुआती तौर पर उन्हें बचा लिया था, लेकिन देर से इलाज शुरू होने के कारण उनके दिल की दीवारें बेहद कमजोर हो चुकी थीं और नींद के दौरान ही अचानक 'कार्डियक रप्चर' (दिल की दीवार का फटना) होने से उनका निधन हो गया.


3 दशकों का शानदार सफर: कॉमनवेल्थ के 'किंग' थे जसपाल राणा

जसपाल राणा केवल एक एथलीट नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारतीय शूटिंग के जनक और प्रतीक थे. पिछले तीन दशकों से भारतीय खेलों में उनका योगदान अतुलनीय रहा है:

कॉमनवेल्थ का महा-रिकॉर्ड: जसपाल राणा कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के सबसे सफल एथलीट हैं. उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों को मिलाकर कुल 15 मेडल (9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज) अपने नाम किए थे.

एशियाड में गोल्ड की झड़ी: उन्होंने एशियन गेम्स में भी देश का मान बढ़ाया. साल 1994 के हिरोशिमा एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद, 2006 के दोहा एशियन गेम्स में उन्होंने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए अकेले ही 3 गोल्ड मेडल जीते थे.

बनाया था वर्ल्ड रिकॉर्ड: 2006 के उसी एशियन गेम्स में उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में 590 अंकों के स्कोर के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी.

चैंपियन मेकर: मनु भाकर समेत कई दिग्गजों के गुरु थे राणा

एक बेमिसाल खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने देश को चैंपियन बनाने का जिम्मा उठाया. वे भारतीय राष्ट्रीय टीम के 'हाई-परफॉर्मेंस कोच' के रूप में काम कर रहे थे. देश की स्टार शूटर मनु भाकर समेत भारत के कई मौजूदा ओलिंपिक और वर्ल्ड कप मेडलिस्ट्स को तराशने के पीछे जसपाल राणा की ही कड़े अनुशासन वाली ट्रेनिंग थी. एक महान चैंपियन और एक बेहतरीन मेंटर के रूप में उनका इस तरह चले जाना भारतीय खेल इतिहास और देश के लिए एक कभी न पूरा होने वाला नुकसान है.

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