
ट्रक ड्राइवर के बेटे की चमकी किस्मत, RCB ने 5.2 करोड़ देकर चौंकाया, अब दिखाएगा IPL में जलवा
IPL 2026 की डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने इस दमदार खिलाड़ी को 5.2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में अपनी टीम में शामिल किया है। अब ये खिलाड़ी 28 मार्च से शुरू हो रहे IPL-19 में अपना जलवा दिखाता हुआ नज़र आ सकता है।
Mangesh Yadav Story: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और साथ में परिवार का अटूट विश्वास हो, तो गरीबी की बेड़ियाँ भी रास्ता नहीं रोक पातीं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव बोरगांव के रहने वाले मंगेश यादव ने इसे सच कर दिखाया है। आज मंगेश का नाम हर क्रिकेट प्रेमी की जुबान पर है, क्योंकि उन्हें IPL 2026 की डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने 5.2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में अपनी टीम में शामिल किया है। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे छिपी है एक पिता की रातों की नींद और एक बेटे का कड़ा संघर्ष।
ट्रक ड्राइवर पिता के संघर्ष की कहानी
मंगेश के पिता रामावध यादव एक ट्रक ड्राइवर हैं। उनकी ज़िंदगी सड़क पर बीतती थी, ना खाने का समय, ना सोने का ठिकाना। रामावध बताते हैं, "ट्रक ड्राइवर की ज़िंदगी कोई ज़िंदगी नहीं होती। जब ट्रक भरा हो तो खाली करने की चिंता, और खाली हो तो भरने की फिक्र। कई रातें मैं सो नहीं पाया यह सोचकर कि बेटे की ट्रेनिंग के लिए पैसे कहाँ से आएंगे।" मंगेश ने क्रिकेट की शुरुआत घर के छोटे से आंगन में अपनी माँ के साथ खेलकर की थी। जब उनके चाचा ने टेनिस बॉल टूर्नामेंट में उनकी प्रतिभा देखी, तो उन्हें दिल्ली जाकर कोच फूलचंद शर्मा से ट्रेनिंग लेने की सलाह दी।
जब खत्म हो गए थे सारे पैसे
दिल्ली का सफर आसान नहीं था। मंगेश याद करते हैं, "पापा ने बड़ी मुश्किल से 24,000 रुपये जोड़कर दिए थे। मुझे पता ही नहीं चला कि वह पैसा पहले ही महीने में कैसे खत्म हो गया।" उस समय उनके पास न रहने का सही ठिकाना था और न ही खाने के पैसे। उनके कोच फूलचंद शर्मा ने उनकी मदद की। कोच ने बताया, "मैंने देखा कि लड़का अच्छा गेंदबाज है लेकिन उसके पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। मैंने उसे हॉस्टल में रखा। मेरे लिए खिलाड़ी का टैलेंट मायने रखता है, पैसा नहीं।"
जब हारने लगे थे हिम्मत
एक वक्त ऐसा भी आया जब मंगेश का ध्यान भटकने लगा और वे आलसी होने लगे। तब कोच ने उन्हें डांटकर घर भेजने की धमकी दी। मंगेश कहते हैं, "उस दिन मुझे अहसास हुआ कि मेरे पिता मेरे लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं। मैंने खुद से कहा कि मुझे यह मौका गंवाना नहीं है।"
संघर्ष तब भी खत्म नहीं हुआ जब चयन शिविरों में उन्हें गलत नाम पुकारे जाने के कारण वापस भेज दिया जाता था। उनके पिता कहते हैं, "उन दिनों मैं खुद को लाचार महसूस करता था। मुझे लगता था कि बेटे को यह सपना दिखाकर मैंने गलती कर दी।"
वो टर्निंग पॉइंट जिसने बदल दी किस्मत
मंगेश की किस्मत तब पलटी जब उन्होंने मध्य प्रदेश टी20 लीग में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 6 मैचों में 12 की औसत से 14 विकेट चटकाए। इसके बाद उन्हें RCB ने उन्हें ट्रायल्स के लिए बुलाया। वहां अनुभवी दिनेश कार्तिक (DK) ने उनकी परीक्षा ली।
मंगेश बताते हैं, "कार्तिक सर ने मुझे अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाजी करने को कहा। नई गेंद से, 5वें ओवर में, फिर 14वें और 20वें ओवर में। यह देखना अद्भुत था कि उस स्तर का खिलाड़ी कैसे सोचता है।" मंगेश की विविधता और सटीक गेंदबाजी ने उन्हें RCB का हिस्सा बना दिया।
अब गर्व से चलते हैं पिता
आज जब मंगेश करोड़पति बन चुके हैं, तो उन्हें अपने पिता के त्याग की सबसे ज्यादा खुशी है। वह कहते हैं, "जब पापा मुझे सपोर्ट करते थे, तो रिश्तेदार उन्हें मूर्ख समझते थे। आज मुझे खुशी है कि मेरे पिता समाज में गर्व से सिर उठाकर चल सकते हैं।" उनके पिता भावुक होकर कहते हैं, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक ट्रक ड्राइवर को इतना सम्मान मिलेगा।"
मंगेश यादव अब 28 मार्च को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ होने वाले ओपनिंग मैच में अपनी रफ़्तार का जादू दिखाने को तैयार हैं।

