घरेलू क्रिकेट में जम्मू कश्मीर ने रच दिया इतिहास, पहली बार रणजी ट्रॉफी चैम्पियन बनी
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यह जीत केवल खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिए आशा और संभावनाओं का संदेश भी है।

घरेलू क्रिकेट में जम्मू कश्मीर ने रच दिया इतिहास, पहली बार रणजी ट्रॉफी चैम्पियन बनी

जम्मू कश्मीर की टीम ने 10 मैचों के अभियान में धैर्य, रणनीतिक समझ और सामंजस्य का अद्भुत मिश्रण दिखाया। उन्होंने साबित किया कि क्रिकेट में केवल बड़े नाम ही नहीं, बल्कि समझदारी और सही क्रियान्वयन भी सफलता दिलाता है।


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जम्मू-कश्मीर ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करते हुए पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत लिया। शनिवार को हुबली के KSCA स्टेडियम में खेले गए फाइनल में उन्होंने आठ बार की चैंपियन कर्नाटक को पराजित किया। जुझारूपन और दृढ़ संकल्प से भरे इस ऐतिहासिक सत्र में जम्मू-कश्मीर ने पसंदीदा टीमों और अन्य मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए साबित किया कि निरंतरता और रणनीति विरासत पर भारी पड़ सकती है।

फाइनल मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में जम्मू-कश्मीर की 291 रनों की मजबूत बढ़त ने उन्हें चैंपियन बना दिया। दूसरी पारी में 342/4 पर समाप्त करते हुए उन्होंने कुल बढ़त 633 रनों तक पहुंचा दी। सलामी बल्लेबाज कमरान इकबाल ने नाबाद 160 रन बनाए, जबकि साहिल लोटरा ने अपना पहला शतक (नाबाद 101 रन) जड़ा।

शानदार प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर की सफलता सामूहिक प्रयास का परिणाम रही। कप्तान पारस डोगरा ने रणजी ट्रॉफी में 10,000 रन पूरे किए, जबकि यावर हसन, अब्दुल समद और कन्हैया वाधवन ने महत्वपूर्ण अर्धशतक लगाए। तेज गेंदबाज औकिब नबी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए इस सत्र में सातवीं बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया और सेमीफाइनल तथा फाइनल दोनों में अहम भूमिका निभाई।

10 मैचों के अभियान में टीम ने धैर्य, रणनीतिक समझ और सामंजस्य का अद्भुत मिश्रण दिखाया। उन्होंने साबित किया कि क्रिकेट में केवल बड़े नाम ही नहीं, बल्कि समझदारी और सही क्रियान्वयन भी सफलता दिलाता है।

संघर्ष से शिखर तक

जम्मू-कश्मीर ने 67 वर्ष पहले भारत की इस प्रतिष्ठित घरेलू प्रतियोगिता में पदार्पण किया था। इससे पहले वे 2013-14, 2019-20 और 2024-25 में क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन दबाव में चूक गए।

इस बार टीम ने शांत और आत्मविश्वास से भरे अंदाज में फाइनल खेला और अपनी तैयारी पर कोई संदेह नहीं छोड़ा।

कर्नाटक, अपनी विरासत और अनुभव के बावजूद, मुकाबले में पकड़ नहीं बना सका। अंतिम दिन जब जम्मू-कश्मीर 186/4 से आगे खेलने उतरा, तब कर्नाटक एक भी विकेट नहीं ले सका, जो जम्मू-कश्मीर के दबदबे को दर्शाता है।

सेमीफाइनल की कसौटी

सेमीफाइनल में कल्याणी में बंगाल के खिलाफ पहली पारी में पिछड़ने के बाद टीम पर दबाव था। लेकिन औकिब नबी की घातक गेंदबाजी ने दूसरी पारी में बंगाल को मात्र 88 रनों पर समेट दिया। शुभम पुंडीर ने शानदार शतक लगाकर 584 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने में योगदान दिया और फाइनल के लिए लय बनाए रखी।

दिग्गजों को चौंकाया

नौ बार की चैंपियन कर्नाटक फाइनल में दबदबा बनाने की उम्मीद से उतरी थी, लेकिन अपेक्षाकृत अनजान खिलाड़ियों वाली टीम ने उन्हें रणनीतिक रूप से मात दी। मयंक अग्रवाल के 160 रन भी संतुलन नहीं बदल सके। जम्मू-कश्मीर ने लगातार दबाव, खेल की समझ और बेहतरीन प्रदर्शन से मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा।

खेल से परे प्रेरणा

यह जीत केवल खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिए आशा और संभावनाओं का संदेश भी है। यह दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और टीमवर्क से हर बाधा पार की जा सकती है। तेज गेंदबाज औकिब नबी लंबे समय से क्षेत्र में क्रिकेट ढांचे के विकास का सपना देख रहे थे, और यह जीत नई पीढ़ी को प्रेरित कर सकती है।

दोपहर 2:10 बजे जब दोनों कप्तानों ने हाथ मिलाया, तो ड्रेसिंग रूम और समर्थकों में जश्न का माहौल छा गया। दशकों से इस गौरव का इंतजार कर रही टीम और क्षेत्र के लिए यह सपना सच होने जैसा था- एक ऐतिहासिक जीत, जो हमेशा याद रखी जाएगी।

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