FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप से पीछे हटा ईरान, अमेरिका को ठहराया ज़िम्मेदार
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FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप से पीछे हटा ईरान, अमेरिका को ठहराया ज़िम्मेदार

ईरान ने अमेरिका के साथ जारी युद्ध और अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद बड़ा फैसला लिया है। ईरान ने जून 2026 में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में भाग लेने से इनकार करने के संकेत दिए हैं।


Iran Won't Play FIFA World Cup : खेल की दुनिया से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान के खेल और युवा मामलों के मंत्री अहमद दुनियामाली ने घोषणा की है कि मौजूदा युद्ध की स्थिति और राजनीतिक तनाव के बीच ईरान के लिए जून में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup 2026) में हिस्सा लेना संभव नहीं है। यह बयान तब आया है जब अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई है।

सुरक्षा और युद्ध का हवाला

ईरानी सरकारी टेलीविजन पर पोस्ट किए गए एक इंटरव्यू में खेल मंत्री दुनियामाली ने साफ तौर पर कहा कि उनके देश के फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए अमेरिका में खेलना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर कड़े आरोप लगाते हुए कहा, "अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो दुष्टतापूर्ण कार्य किए हैं। पिछले आठ-नौ महीनों में हम पर दो युद्ध थोपे गए हैं और हमारे हजारों निर्दोष लोगों को शहीद किया गया है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए वर्ल्ड कप में भाग लेना निश्चित रूप से संभव नहीं है।"

यह बयान खेल जगत में खलबली मचाने वाला है क्योंकि वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होना है। ईरान को अपने ग्रुप मैच कैलिफोर्निया और सिएटल जैसे अमेरिकी शहरों में खेलने थे।

ईरान का प्रस्तावित शेड्यूल

वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में ईरान का मुकाबला काफी रोमांचक होने वाला था। तय कार्यक्रम के अनुसार

15 जून: ईरान बनाम न्यूजीलैंड (इंग्लवुड, कैलिफोर्निया)

21 जून: ईरान बनाम बेल्जियम (कैलिफोर्निया)

26 जून: ईरान बनाम मिस्र (सिएटल)

लेकिन अब इन मैचों के आयोजन पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। अगर ईरान पीछे हटता है, तो फीफा को अंतिम समय में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प और फीफा का रुख

इस पूरे विवाद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रुख काफी कड़ा रहा है। पिछले हफ्ते जब उनसे ईरान की भागीदारी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "मुझे वास्तव में परवाह नहीं है (I really don't care) कि ईरान इस 48 देशों के टूर्नामेंट में हिस्सा लेता है या नहीं।"

दूसरी ओर, फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा (FIFA) स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है। फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य टूर्नामेंट की तैयारियों और ईरान जैसे देशों की भागीदारी पर चर्चा करना था। फीफा ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि ईरानी टीम को अमेरिका आने की अनुमति दी जाएगी और ट्रम्प प्रशासन ने इस संबंध में आश्वासन भी दिया है।

क्या खेल और राजनीति का होगा मिलन?

इतिहास गवाह है कि खेल अक्सर दो देशों के बीच की दूरियों को कम करने का काम करते हैं, लेकिन यहाँ स्थिति काफी गंभीर है। एक तरफ युद्ध में हजारों लोगों की जान जा रही है और दूसरी तरफ खेल का सबसे बड़ा महाकुंभ दरवाजे पर खड़ा है। ईरान का यह फैसला न केवल फुटबॉल प्रशंसकों को निराश करेगा, बल्कि फीफा के लिए भी एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती पेश करेगा।

ईरान के इस कदम से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या 11 जून से 19 जुलाई तक चलने वाला यह टूर्नामेंट बिना किसी राजनीतिक बाधा के संपन्न हो पाएगा?

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