ईशान किशन के विराट अवतार के आगे झुका पाकिस्तान; यह सिर्फ पारी नहीं, पुनर्जन्म है
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ईशान किशन के 'विराट' अवतार के आगे झुका पाकिस्तान; यह सिर्फ पारी नहीं, पुनर्जन्म है

कोलंबो में ईशान किशन की तूफानी पारी ने भारत को पाकिस्तान पर दिलाई जीत। अनुबंध खोने और संघर्ष के बाद किशन का यह ऐतिहासिक कमबैक भारतीय क्रिकेट का नया अध्याय है।


India Pakistan Cricket : भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मुकाबला जब भी होता है, वह केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं रहता। यह भावनाओं का वह चरम रंगमंच है जहाँ खिलाड़ियों के स्वभाव की असली परीक्षा होती है। यहाँ या तो नायक पैदा होते हैं या फिर बड़ी प्रतिष्ठाएं ताश के पत्तों की तरह ढह जाती हैं। आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में कुछ ऐसा ही हुआ। इस मैच में ईशान किशन की पारी सिर्फ एक अर्धशतक नहीं थी। यह उनके व्यक्तिगत पुनरुद्धार और साहस का एक ऐसा बयान था जिसने क्रिकेट जगत को हिला कर रख दिया। किशन की इस पारी ने साबित किया कि व्यक्तिगत लचीलापन कभी-कभी टीम की रणनीति से भी अधिक निर्णायक हो सकता है। ईशान किशन का यह प्रदर्शन उन सभी आलोचकों के लिए एक जवाब है जिन्होंने उनके करियर के अंत की भविष्यवाणी कर दी थी।


अभिषेक शर्मा का विकेट और किशन का काउंटर अटैक
मैच की शुरुआत से पहले ही माहौल में गजब की तल्खी और मनोवैज्ञानिक तनाव व्याप्त था। सीमा पार के तनाव, राजनीति और बहिष्कार की धमकियों ने इस मुकाबले पर दबाव की एक अतिरिक्त परत चढ़ा दी थी। जैसे ही मैच शुरू हुआ, भारतीय टीम को बहुत बड़ा झटका लगा। सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा पहले ही ओवर में पवेलियन लौट गए। उस समय स्टेडियम में मौजूद हजारों भारतीय प्रशंसकों के बीच सन्नाटा पसर गया और पाकिस्तान के गेंदबाज हावी होते दिखे। लेकिन तभी मैदान पर ईशान किशन की एंट्री हुई। किशन का दृष्टिकोण न तो लापरवाह था और न ही रक्षात्मक। उन्होंने 'कंट्रोल्ड एग्रेशन' यानी नियंत्रित आक्रामकता का ऐसा नमूना पेश किया जिसने पाकिस्तानी गेंदबाजी की धज्जियां उड़ा दीं। उनके बल्ले से निकले बाउंड्री केवल रन नहीं थे, बल्कि वे पाकिस्तान की मनोवैज्ञानिक बढ़त पर सीधा प्रहार थे। उन्होंने शाहीन शाह अफरीदी और नसीम शाह जैसे घातक गेंदबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया।

प्रेमदासा की कठिन पिच और किशन की कलात्मकता
आर प्रेमदासा स्टेडियम की पिच को काफी 'टैकी' माना जा रहा था, जहाँ गेंद रुककर आ रही थी और बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन ईशान किशन ने अपनी शारीरिक शक्ति और कलात्मक कौशल के अद्भुत मिश्रण से पाकिस्तान के विश्व स्तरीय गेंदबाजी आक्रमण को बौना साबित कर दिया। उन्होंने शाहीन शाह अफरीदी की गेंद पर मिड-विकेट के ऊपर से जो चिन-हाई पुल शॉट जड़ा, उसने भारतीय प्रशंसकों में नई ऊर्जा भर दी। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तानी स्पिनरों के खिलाफ जो रणनीति अपनाई, वह वास्तव में सनसनीखेज थी। उन्होंने स्पिनरों की लेंथ को जल्दी पढ़ा और कदमों का इस्तेमाल कर उन्हें बाउंड्री के बाहर भेजा। ईशान किशन ने 40 गेंदों में 77 रनों की विस्फोटक पारी खेली। इस पारी की बदौलत भारत 175/7 के चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुँच सका। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यही पारी भारत की जीत का सबसे निर्णायक कारक बनी, जिसने विपक्षी टीम के हौसले पस्त कर दिए।

2024 की गुमनामी और मानसिक स्वास्थ्य का साहस
किशन की इस ऐतिहासिक सफलता को समझने के लिए उनके 2024 के कठिन दौर को देखना अनिवार्य है। 2023 के मध्य तक वे भारतीय टीम के हर फॉर्मेट का मुख्य हिस्सा थे। उनकी निडर बल्लेबाजी और ऊर्जा उन्हें एक उभरता हुआ सितारा बनाती थी। लेकिन फिर अचानक वे परिदृश्य से गायब हो गए। उन्होंने मानसिक थकान का हवाला देते हुए ब्रेक मांगा था। भारतीय क्रिकेट जैसे प्रतिस्पर्धी माहौल में, जहाँ 'खेलते रहो' का अलिखित नियम है और खिलाड़ियों की शारीरिक चोट को तो वीरता माना जाता है लेकिन मानसिक थकान को नजरअंदाज किया जाता है, वहां एक युवा खिलाड़ी का रुकना बहुत बड़ी बहादुरी थी। हालांकि, इसका परिणाम उनके लिए कड़ा रहा। बीसीसीआई ने उन्हें केंद्रीय अनुबंध से बाहर कर दिया और उनके खेल के प्रति समर्पण पर तीखे सवाल उठाए गए। उन पर आरोप लगे कि वे घरेलू क्रिकेट के बजाय आईपीएल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जब सिस्टम ने फेर ली थी नजर
2024 की शुरुआत में बीसीसीआई का फैसला ईशान किशन के लिए एक बड़ा झटका था। उन्हें सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट से बाहर करना एक अनुशासनात्मक संदेश के रूप में देखा गया। सार्वजनिक चर्चाओं में उनकी 'भूख' पर सवाल उठाए गए। मीडिया और सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि क्या ईशान किशन केवल ग्लैमर और टी20 लीग के खिलाड़ी बनकर रह गए हैं? लगभग दो साल तक किशन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के रडार से बाहर रहे। इस दौरान ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल और संजू सैमसन जैसे विकेटकीपर-बल्लेबाज उनसे काफी आगे निकल गए। भारतीय क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि यहाँ सोशल मीडिया और फैंस बहुत जल्दी आगे बढ़ जाते हैं। ईशान किशन के लिए यह पेशेवर गुमनामी में जाने जैसा था, जहाँ से वापसी की उम्मीदें बहुत कम नजर आ रही थीं। लेकिन किशन ने हार नहीं मानी और खामोशी से अपनी मेहनत जारी रखी।

घरेलू क्रिकेट की तपिश और झारखंड का गौरव
जब दुनिया को लगा कि किशन का करियर ढलान पर है, तब उन्होंने अपनी जड़ों की ओर रुख किया। 2024-25 का घरेलू सीजन उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। झारखंड की कप्तानी करते हुए उन्होंने केवल मैच नहीं खेले, बल्कि मैदान पर अपना पूरा प्रभुत्व जमाया। उन्होंने शब्दों की जंग में पड़ने के बजाय अपने बल्ले से जवाब देना बेहतर समझा। 2025 के अंत में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (SMAT) अभियान उनके पुनरुत्थान का मुख्य बिंदु रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 517 रन बनाए और टूर्नामेंट के सर्वोच्च रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने झारखंड को उसका पहला ऐतिहासिक खिताब दिलाया। फाइनल में उनके द्वारा लगाया गया शतक इस बात का प्रमाण था कि उनकी खेलने की भूख अब पहले से कहीं अधिक प्रबल और विनाशकारी है।

तकनीकी सुधार और आईपीएल 2025 का सफर
ईशान किशन की वापसी में आईपीएल 2025 की भी बड़ी भूमिका रही। सनराइजर्स हैदराबाद के साथ उनका सफर उतार-चढ़ाव वाला रहा, जहाँ उन्होंने एक शतक भी जड़ा। लेकिन विशेषज्ञों की नजर उनकी तकनीकी मैच्योरिटी पर थी। उन्होंने 'सिमुलेशन ट्रेनिंग' के जरिए स्पिनरों के खिलाफ अपनी बल्लेबाजी को निखारा। यह उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि वे अब स्पिन को बेहतर तरीके से खेल रहे थे। उनकी तकनीक में आया यह बदलाव कोलंबो के मैच में भी साफ नजर आया, जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक और सुरक्षित बल्लेबाजी का बेहतरीन मिश्रण पेश किया। उनकी बॉडी लैंग्वेज अब एक ऐसे खिलाड़ी की थी जिसने अपने सबसे बुरे डर का सामना कर लिया है और अब वह मैदान पर पूरी तरह आजाद होकर खेल रहा है।

एक बदला हुआ इंसान और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड
2026 की शुरुआत में भारतीय टीम में उनकी वापसी किसी फिल्मी कहानी जैसी रही है। वापसी के बाद से किशन का टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में स्ट्राइक रेट 220 के पार रहा है। पिछले छह पारियों में उन्होंने 49.33 की औसत से 296 रन बनाए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ इस मैच-विनिंग पारी के साथ वे टी20 विश्व कप इतिहास में अर्धशतक बनाने वाले पहले भारतीय विकेटकीपर बन गए हैं। किशन ने खुद को 'बदला हुआ इंसान' बताते हुए कहा कि पहले वे हर समय मजाक-मस्ती में रहते थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा खेल और कीपिंग पर केंद्रित कर दी है। 2024 में अनुबंध खोने वाले खिलाड़ी से लेकर 2026 में विश्व कप के चमकते सितारे तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। उनकी सफलता साबित करती है कि कभी-कभी एक कदम पीछे हटना, लंबी छलांग लगाने के लिए बहुत जरूरी होता है।

ईशान किशन का उदय
आज जब ईशान किशन मैदान पर उतरते हैं, तो उनकी बल्लेबाजी में एक अलग ही निखार नजर आता है। यह केवल आक्रामकता नहीं है, बल्कि एक तरह की मुक्ति (Liberation) है। उन्होंने साबित कर दिया है कि मानसिक दृढ़ता शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है। उनकी इस 77 रनों की पारी ने न केवल भारत को जीत दिलाई, बल्कि भारतीय क्रिकेट के चयन तंत्र और खिलाड़ियों के प्रति नजरिए पर भी एक गहरी छाप छोड़ी है। ईशान किशन अब केवल एक विस्फोटक बल्लेबाज नहीं, बल्कि एक ऐसे फाइटर के रूप में उभरे हैं जिसने क्रिकेट की दुनिया में अपने पुनर्जन्म की कहानी खुद अपने बल्ले से लिखी है।


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