
T20 WC Final: 'जूते मेरे, कदम रोहित के', सूर्या के बयान ने जीता दिल
Ind vs Nz Final: अहमदाबाद में आज खिताबी जंग। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने रोहित की विरासत और ड्रेसिंग रूम के गुप्त माहौल पर किया बड़ा खुलासा। जानिए सूर्या का नया प्लान।
ICC T 20 Men's World Cup : आज 8 मार्च की सुबह करोड़ों हिंदुस्तानियों के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक जज्बात है। शनिवार की पूरी रात क्रिकेट प्रेमियों ने इंतजार में काटी है। सबके जहन में बस एक ही सवाल था,क्या आज अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम टीम इंडिया के वर्ल्ड चैंपियन बनने का गवाह बनेगा? मैच से ठीक पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान सूर्यकुमार यादव बिल्कुल अलग अवतार में नजर आए। उन्होंने साफ कर दिया कि कप्तानी के छह महीनों ने उनका नजरिया बदल दिया है। सूर्या अब टीम के युवाओं के लिए 'बड़े भाई या पिता' जैसा अनुशासन नहीं थोपना चाहते। उनका मानना है कि युवाओं को जब 'खुली छूट' मिलती है, तो उनका असली व्यक्तित्व मैदान पर कहर बनकर टूटता है।
"वे मुझे बोलने ही नहीं देते" - ड्रेसिंग रूम का मजेदार सच
सूर्या ने हंसी-मजाक के मूड में एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टीम के युवा खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में उन्हें बोलने का ज्यादा मौका ही नहीं देते। वे अपनी शर्तों पर जीते हैं और अपनी मर्जी का क्रिकेट खेलते हैं। सूर्या ने इसे टीम की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने महसूस किया कि टोकने-रोकने से खिलाड़ियों की क्रिएटिविटी मर जाती है। सूर्या की कप्तानी का नया मंत्र है, "खिलाड़ियों को स्वतंत्र छोड़ दो।" उन्होंने टीम की तुलना एक ऐसे गुलदस्ते से की है, जहां हर फूल (खिलाड़ी) अपनी अलग महक बिखेर रहा है। कप्तान का काम अब दखल देना नहीं, बल्कि बस उन फूलों को सहेज कर रखना है।
रोहित की विरासत और सूर्या का अपना अंदाज़
जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित शर्मा की जगह भरने का सवाल उठा, तो सूर्या ने महफिल लूट ली। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "सर, जूते मेरे ही हैं, बस मैं रोहित भाई के नक्शेकदम पर चल रहा हूं।" सूर्या ने माना कि उन्होंने रोहित की कप्तानी से 'सक्सेस का ब्लूप्रिंट' तो लिया है, लेकिन उसमें अपना तड़का भी लगाया है। सूर्या और कोच गौतम गंभीर की जोड़ी ने टीम को यह सिखाया है कि टी-20 में 100 रन से ज्यादा अहम वो 21 रन हो सकते हैं जो सिर्फ 7 गेंदों में आए हों। यही 'इम्पैक्ट' वाला खेल आज न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का सबसे बड़ा हथियार होने वाला है।
अहमदाबाद में आज इतिहास रचेगा 'स्काई'
8 मार्च का दिन सूर्या के करियर का सबसे सुनहरा पन्ना हो सकता है। विश्व कप का फाइनल, वो भी भारत में और सवा लाख दर्शकों के शोर के बीच। यह किसी भी खिलाड़ी को नर्वस कर सकता है। लेकिन सूर्या डरे हुए नहीं, बल्कि एक्साइटेड हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि दबाव तो है, पर यही दबाव उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करता है। पूरा भारत आज सिर्फ इसलिए नहीं जाग रहा कि उसे मैच देखना है, बल्कि इसलिए जाग रहा है ताकि वह अपनी टीम को विश्व विजेता बनते देख सके। कीवी टीम के लिए सूर्या की यह 'फ्रीडम वाली फौज' आज सबसे बड़ी चुनौती पेश करने वाली है।
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