जम्मू-कश्मीर में शिक्षा पर सियासत, मेडिकल कॉलेज के बाद NLU पर भी घमासान
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जम्मू-कश्मीर में शिक्षा पर सियासत, मेडिकल कॉलेज के बाद NLU पर भी घमासान

फिलहाल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा की मांग खारिज कर दी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि फैसला होने से पहले ही भेदभाव की बातें हो रही हैं।


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भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जम्मू-कश्मीर के हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र और मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी के बीच सांप्रदायिक और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने की कोशिशों में अब शिक्षा क्षेत्र भी प्रभावित होता नजर आ रहा है। कटरा जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद अब भाजपा समर्थक संगठनों ने अपना ध्यान प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) पर केंद्रित कर दिया है। यह विश्वविद्यालय अप्रैल से कश्मीर घाटी के बडगाम जिले में अस्थायी परिसर से काम शुरू करने वाला है। लेकिन भाजपा अब इसे जम्मू स्थानांतरित करने की मांग कर रही है। पार्टी का तर्क है कि आतंकवाद खत्म होने के गृह मंत्रालय के दावों के बावजूद अभिभावकों के मन में डर बना रहेगा और वे अपने बच्चों को कश्मीर भेजने से हिचकिचाएंगे।

भाजपा ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

भाजपा समर्थित जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) ने इस सप्ताह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखकर एनएलयू को जम्मू स्थानांतरित करने की मांग की। पत्र में कहा गया है कि यह मांग पुनर्गठन के बाद समावेशी विकास और क्षेत्रीय न्याय की भावना के अनुरूप है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि एनएलयू बडगाम में स्थापित किया गया तो इससे क्षेत्रीय असंतुलनबढ़ेगा और जम्मू तथा देश के अन्य हिस्सों से आने वाले छात्रों को लॉजिस्टिक, जलवायु और पहुंच से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

मेडिकल कॉलेज विवाद

कश्मीर के राजनीतिक नेताओं का मानना है कि एनएलयू को लेकर भाजपा की नई मांग को वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज का पंजीकरण रद्द होने से बल मिला है। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने कटरा स्थित SMVDIME को 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति वापस ले ली। आयोग ने इसके पीछे बुनियादी ढांचे में गंभीर कमियों का हवाला दिया। हालांकि, सितंबर 2024 में एनएमसी ने निरीक्षण के बाद कॉलेज को 50 छात्रों के दाखिले की अनुमति दी थी। इनमें से 42 छात्र मुस्लिम थे, जिनका चयन नीट रैंकिंग के आधार पर हुआ था। इसे लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध किया और बाद में कॉलेज की मान्यता रद्द होने का जश्न भी मनाया।

भाजपा का तर्क

एनएलयू को लेकर विवाद जम्मू और कश्मीर के बीच पुराने राजनीतिक विभाजन को फिर उजागर करता है। जम्मू हाल के वर्षों में भाजपा का मजबूत गढ़ बना है, जबकि घाटी में विपक्षी दल भाजपा पर मुस्लिम बहुल समुदाय को हाशिये पर डालने का आरोप लगाते हैं। भाजपा नेता और हीरानगर से विधायक विजय कुमार शर्मा ने कहा कि पूरे जम्मू क्षेत्र की राय है कि विश्वविद्यालय यहीं स्थापित होना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू की जलवायु और भौगोलिक स्थिति एनएलयू के लिए अधिक अनुकूल है। शर्मा ने कश्मीर की सुरक्षा स्थिति को भी एक बड़ा कारण बताया। उनका कहना था कि हालांकि आतंकवाद पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है, लेकिन आम लोगों, खासकर छात्रों और उनके अभिभावकों के मन में कश्मीर को लेकर डर बना हुआ है।

कश्मीर को हमेशा प्राथमिकता

भाजपा नेता शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि कश्मीर को हमेशा जम्मू की तुलना में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) जैसे बड़े संस्थान घाटी में हैं और वहां की सुविधाएं एम्स दिल्ली जैसी हैं। 14 से ज्यादा सरकारी निगमों के मुख्यालय भी कश्मीर में हैं। जम्मू के लोगों की भावनाओं को भी समझा जाना चाहिए।

कश्मीर को एनएलयू क्यों मिला?

पिछले साल जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने कश्मीर में एनएलयू स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव कांग्रेस विधायक निज़ामुद्दीन भट द्वारा पेश किया गया था। भट ने कहा कि विश्वविद्यालय को कश्मीर देने के पीछे स्पष्ट मापदंड अपनाए गए। उन्होंने कहा कि कश्मीर की आबादी जम्मू से ज्यादा है। इसके अलावा जम्मू देश के अन्य हिस्सों से ज्यादा जुड़ा हुआ है और वहां पहले से बेहतर पहुंच है।

माहौल खराब करने की कोशिश

निज़ामुद्दीन भट ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक माहौल खराब करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने की कोशिश है। हमारा देश लोकतांत्रिक और कल्याणकारी राज्य है। शिक्षा संस्थानों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।

अधूरे वादे और असंतोष

सीपीआई(एम) नेता एमवाई तारिगामी ने भाजपा की इस मांग को 5 अगस्त 2019 के बाद किए गए वादों की नाकामी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जम्मू में भी एक बड़ा वर्ग असंतुष्ट है। रोजगार और समृद्धि के वादे पूरे नहीं हुए। अब भाजपा अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत ऐसे मुद्दे उठा रही है। तारिगामी ने याद दिलाया कि IIT और IIM जम्मू में बने, तब कश्मीर में किसी ने विरोध नहीं किया। अगर जम्मू को फायदा होता है तो कश्मीरियों को आपत्ति नहीं होती। यही समझ जम्मू में भी होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री का रुख और आगे की तस्वीर

फिलहाल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा की मांग खारिज कर दी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि फैसला होने से पहले ही भेदभाव की बातें हो रही हैं। पहले निर्णय तो होने दें। भाजपा महासचिव अशोक कौल ने भी कहा कि विश्वविद्यालय के स्थान को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, जिससे घाटी में अटकलें तेज हो गई हैं कि कहीं सरकार दबाव में न आ जाए। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने स्पष्ट किया कि जब IIT और IIM जम्मू को मिले, तब कश्मीर ने विरोध नहीं किया। यह एनएलयू कश्मीर के लिए तय है और वहीं रहेगा।

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