हर पांचवां वोटर गायब! संजय सिंह ने आंकड़ों से खोली यूपी SIR की पोल
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हर पांचवां वोटर गायब! संजय सिंह ने आंकड़ों से खोली यूपी SIR की पोल

यूपी में SIR के बाद 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटने पर विवाद गहरा गया है। संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर पक्षपात और लोकतंत्र कमजोर करने के आरोप लगाए हैं।


Uttar Pradesh SIR Draft List: देश के सबसे बड़े सूबे में से एक उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट सत्यापन की सूची जारी कर दी गई है। एसआईआर के बाद जारी सूची में 2.89 करोड़ (18 फीसदी) नाम कट गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट में 46.23 लाख मृत, 2.17 करोड़ लोग शिफ्टेड और 25.47 लाख डुप्लीकेट वोटर शामिल हैं। पहले प्रदेश में 15.44 करोड़ वोटर थे, अब 12.55 करोड़ मतदाता बचे हैं।लखनऊ में सबसे ज्यादा 12 लाख, जबकि ललितपुर में सबसे कम 95 हजार लोगों के नाम कटे हैं। इस सूची पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गहरी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रदेश में मतलब- हर पांचवां वोटर लिस्ट से बाहर हो गया है।

यूपी एसआईआर पर तीखा हमला करते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है, अचंभित करने वाली बात है और बहुत हैरान करने वाली बात है कि इतने बड़े पैमाने पर उत्तर प्रदेश में वोट काटे गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग यानी कि जो ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव कराता है बीडीसी के जिला पंचायत सदस्य के और ग्राम प्रधानों के चुनाव जो कराता है उसने एक सूची तैयार की जिसमें कहा कि उत्तर प्रदेश में 12 करोड़ 70 लाख वोट है। ध्यान से समझिए कि वह लिस्ट इसी साल में तैयार हुई है। दिसंबर के महीने में जारी हुई है और उस लिस्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने यानी कि जो ग्रामीण चुनाव कराए जाते हैं जिला पंचायत प्रधान और बीडीसी के उसमें राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं की संख्या है 12 करोड़ 70 लाख।

संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अब एसआईआर कराया गया । चुनाव आयोग के जो मुखिया हैं ज्ञानेश कुमार जिनको मैं ज्ञानेश कुमार कहता हूं उनके नेतृत्व में उनकी अगुवाई में और वो जो एसआईआर कराया गया पूरे उत्तर प्रदेश में उसमें शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाताओं का गहन पुनरीक्षण यानी कि एसआईआर कराया गया और उसके बाद आज जो सूची जारी की गई है उसमें कहा गया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में 12 करोड़ 55 लाख वोट समझ सकते हैं कितना बड़ा मजाक हो रहा है उत्तर प्रदेश के साथ। दिसंबर में ही राज्य निर्वाचन आयोग ने ग्रामीण मतदाताओं की सूची जारी की। उसमें कहा 12 करोड़ 70 लाख वोट हैं। और 6 जनवरी को ग्रामीण और शहरी दोनों मतदाताओं की सूची एसआईआर के बाद जारी कराई।

मोदी जी के भक्त ज्ञानेश कुमार जी ने और योगी जी ने जो मिलके एसआईआर चलवाया था। उसमें अब वो कह रहे हैं कि 12 करोड़ 55 लाख वोट है। करीब करीब 4 करोड़ शहरी मतदाता कहां चले गए? कैसे उनके नाम जोड़े जाएंगे? जो कैटेगरी बनाई गई है उसमें कहा गया है कि 25 लाख वोट ऐसे हैं जिनके दो जगह पर नाम है। फिर एक संख्या बताई गई कि करीब करीब दो करोड़ कुछ लाख मतदाता हैं जिसमें कि वो शिफ्ट हो चुके हैं या अनट्रेसेबल है। फिर कुछ लाख संख्या बताई गई। लगभग 45- 46 लाख संख्या बताई गई कि वह उनकी मृत्यु हो चुकी है। अब आपने जो कहा कि शिफ्टेड की कैटेगरी में और अनट्रेसेबल की कैटेगरी में यानी कि वो लोग जो लोग उत्तर प्रदेश से बाहर चले गए हैं उनकी संख्या या फिर जो वो लोग जो आपके बीएलओस गए और मिले नहीं। जो आपके बीएलओस गए और मिले नहीं। जो आपके अधिकारी गए और मिले नहीं। ऐसी संख्या आपने बता दी करीब करीब 2 करोड़ 17 लाख के आसपास दो करोड़ से ऊपर की संख्या आपने बता दी तो मुझे बड़ी हैरानी है कि आप इस चीज को कैसे तय कर रहे हैं करीब 84 लाख मतदाता आपने बता दिया कि आपको मिले ही नहीं उत्तर प्रदेश में आपके लोग घर-घर गए और वो अनट्रेसेबल है।

संजय सिंह सवाल पूछते हुए कहते हैं कि जानते हैं ये क्या हुआ है? बीएलओ और अधिकारियों पर दबाव बनाया गया और कहा गया भारी संख्या में कि इन इन लोगों के वोट काट दो। अब आप जानते हैं किसको टारगेट किया गया होगा यादव को, मुसलमान को, पिछड़ा को, दलित को कि भाई इनके वोट काट दो। घर पे बैठे उन्होंने वोट काट दिया और लिख के दे दिया अनट्रेसेबल। यानी कि हम गए और यह मिले ही नहीं। दूसरा क्या किया? बोला शिफ्टेड की कैटेगरी में दिखा दो। उसमें भी उनहीं वर्ग के मतदाताओं को और क्या किया कि भाई इनका लड़का वहां चला गया। इनके पिताजी वहां चले गए। ऐसेसे करके एक करोड़ 25 लाख के आसपास वो मतदाता आपने दिखा दिया। तो मुझे समझ में ये नहीं आ रहा है कि जो लड़का उत्तर प्रदेश का या जो बुजुर्ग या जो नौजवान या जो माताएं बहने उत्तर प्रदेश छोड़ के काम के सिलसिले में या जो हमारी बेटियां काम करने के सिलसिले में बेंगलुरु या चेन्नई या मुंबई या सूरत या अहमदाबाद या कोलकाता या दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में या देश के बड़े-बड़े शहरों में चली गई तो क्या आपने ये जानने की कोशिश की कि जो हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्सों में गए लोग वो वहां के मतदाता है या नहीं है?

अगर मान लीजिए कोई उत्तर प्रदेश का आदमी मुंबई चला गया और मुंबई में भी वह मतदाता नहीं बना और उत्तर प्रदेश में आपने नाम काट दिया तो उसके मताधिकार का क्या होगा? लोकतंत्र में उसके सबसे बड़ी ताकत का क्या होगा? वो मतदाता कैसे रह पाएगा? अगर वह मतदाता मुंबई का भी नहीं है, सूरत का भी नहीं है, अहमदाबाद का भी नहीं है, चेन्नई का भी नहीं है या जहां वह शिफ्ट किया है आपके हिसाब से वहां का वो मतदाता नहीं है तो क्या उसको उत्तर प्रदेश में वोट देने का अधिकार नहीं है? आपने यह जानने की कोशिश की और अभी आपने एक तुगलकी फरमान जारी कर दिया कि एक महीने में सारे लोग अपना वोट बनवा लीजिए। तीन चार करोड़ लोग और जितने कागजात आपने शर्तों में लगाए हैं 12 कागजात 13 कागजात वह कागजात एक महीने में कहां से बनवा लेंगे? हाई स्कूल का सर्टिफिकेट आप मांग रहे हो। आप पासपोर्ट मांग रहे हैं। आप जमीन के कागज मांग रहे हैं। आप जन्म के प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। आप मुझे बताइए एक अनपढ़ व्यक्ति वो हाई स्कूल कासर्टिफिकेट कहां से लाके देगा? एक मजदूर व्यक्ति जिसके पास जमीन नहीं है वह जमीन के कागजात कहां से लाकर देगा? वह पासपोर्ट कहां से लाकर देगा?

यह सारी जो आपकी शर्तें हैं वो कहां से पूरी करेगा? इसका मतलब तो आपने तय कर लिया है किन-किन लोगों के नाम उड़ाना है। आपने उड़ा दिया नाम। करोड़ों की संख्या में उत्तर प्रदेश के लोगों का नाम आपने उड़ा दिया और आपका तुगलकी फरमान अब आ गया कि एक महीने में सारे कागज दिखाओ नहीं तो फिर आपके नाम नहीं जुड़ पाएंगे। यह आपने तमाशा बना रखा है लोकतंत्र का। मजाक बना रखा है। एक एसआईआर जिसको करने का संवैधानिक अधिकार ही चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार जी को नहीं है। वो एसआईआर एक तो आप जबरदस्ती पूरे देश में करा रहे हैं और दूसरी तरफ आप लोगों के नाम उड़ाए जा रहे हैं। काटे जा रहे हैं। डीएलओस पे दबाव बनाए जा रहे हैं। उनकी मौत हो रही है। कुछ भी हो रहा है। और उसी उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारी जो योगी आदित्यनाथ जी के अंडर में आते हैं। उनके अधीन आते हैं। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग की ग्रामीण मतदाताओं की सूची तैयार की और उन्हीं उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने एसआईआर की सूची तैयार की। तो दोनों में इतना बड़ा अंतर कैसे हो गया?

कौन इसके लिए जवाबदेह है?

कोई बोलेगा कोई कुछ कहेगा? संसद में जाओ वहां सुनवाई नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट में जाओ वहां तारीख पर तारीख पड़ती है। चुनाव आयोग है वह एक तरफा मनमानी कारवाई कर रहा है। तो मैं उत्तर प्रदेश में करीब करीब अभी तक हम लोगों के 6000 के आसपास बीएएलए बने हैं और और संख्या में हम बीएएलए उत्तर प्रदेश में बनाने जा रहे हैं। मैं अपने सभी साथियों से कहना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में उन लोगों के नाम खोजिए और पता कीजिए जिनके नाम जबरदस्ती काटे गए हैं। और उनको हम मीडिया के सामने लेके आएंगे। उनको हम सोशल मीडिया के सामने लाएंगे। उनको हम जनता के सामने उत्तर प्रदेश के लोगों के सामने लाएंगे कि कितने भारी पैमाने पर बड़े पैमाने पर लोगों के नाम काटे गए हैं। तो इसको एक अभियान बना दीजिए। इसको एक एक क्रांति बना दीजिए और अपना नाम किसी भी रूप में कटने मत दीजिए और जो लोग बाहर हैं यानी कि जिनको शिफ्टेड की कैटेगरी में दिखा दिया गया है उनसे भी मेरा निवेदन है कि उत्तर प्रदेश के हमारे वो भाई जो दिल्ली में मुंबई में अहमदाबाद में गुजरात में सूरत में जहांजहां भी वह काम करते हैं कृपा करके अपनी लिस्ट में नाम अपना चेक कर लीजिए कि आपका नाम जोड़ा गया है या काट दिया गया है और अगर काट दिया गया है तो अपना नाम जुड़वाइए वरना आप मत के अधिकार से वंचित रह जाएंगे।

लोकतंत्र में सबसे बड़े अधिकार से वंचित रह जाएंगे। ये याद रखिएगा बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने ये लोकतंत्र में सबसे बड़ा अधिकार आपको दिया है वोट का अधिकार जिसमें राष्ट्रपति के वोट की भी गिनती एक होती है और गांव के गरीब आदमी की मजदूर के वोट की भी गिनती एक होती है। इसलिए बाबा साहब के द्वारा दिए गए इस अधिकार को कभी भी कोई छीनने ना पाए। इसके लिए एकजुट हो जाइए। एक साथ आगे बढ़िए और अपने वोट बनवाइए।

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