
त्रिपाठी-मिश्रा की एंट्री से ‘ठाकुर’ बयान पर नया बवाल, पति बोला- ब्राह्मण होना गुनाह
कानपुर के एचडीएफसी बैंक में कथित जातीय टिप्पणी से विवाद गहरा गया। आस्था सिंह और ऋतु त्रिपाठी मिश्रा के आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामला सामाजिक और राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।
जाति का रोग समाज और देश के लिए घातक है। यह लाइलाज बीमारी बन चुका है। इस तरह की तकरीर पढ़े लिखे हों अनपढ़ हर कोई शख्स कहता है। एक दूसरे को लोग जातिवादी करार देते हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई छिपी नहीं है। आमतौर पर राजनीतिक भाषणों में, चौक-चौराहों पर इस विषय में गरमागरम बहस हम सब सुनते हैं। लेकिन यह बीमारी पर दफ्तरों तक पहुंच चुकी है। कानपुर में एचडीएफसी बैंक में मैं ठाकुर हूं वाला बयान आपने सुना होगा। मामला गरमाया तो मैं ठाकुर कहने वाली बैंक कर्मचारी ने माफी भी मांग ली। यह बात अलग है कि खुद को पीड़ित बताने वाली महिला कह रही है कि मायके से वो त्रिपाठी और ससुराल से मिश्रा है। एक तरफ ठाकुर समाज से जुड़े संगठन भी ताल ठोंक रहे हैं तो ब्राह्मण समाज भी पीछे नहीं है।
कानपुर के एचडीएफसी बैंक वाली घटना में कुल तीन किरदार हैं। आस्था सिंह, ऋतु त्रिपाठी और उनके पति। दोनों तरफ से आरोप और सफाई का दौर भी जारी है। यह मामला जब आगे बढ़ा तो आस्था सिंह की तरफ से सफाई भी आ गई। आस्था सिंह ने कहा कि उनको लगातार निशाने पर लिया जा रहा था जो भी कुछ उन्होंने कहा था कि वो गुस्से में उनकी अभिव्यक्ति थी। वो यह भी कहती हैं कि ठाकुर हैं तो खुद को और क्या कहेंगी। सवाल यह नहीं है कि वो ठाकुर नहीं है। सवाल यह है कि जिस अंदाज में उन्होंने बैंक के दफ्तर में जातीय श्रेष्ठता की बात की उसका संदेश समाज को क्या गया। इन सबके बीच ऋतु त्रिपाठी ने क्या कुछ कहा उसे भी जानने की जरूरत है।
ऋतु त्रिपाठी मिश्रा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नमस्कार, राधे-राधे। मैं ऋतु त्रिपाठी मिश्रा हूं। मायके से त्रिपाठी और ससुराल से मिश्रा। तथाकथित ‘ठाकुर गर्ल’ द्वारा जिन त्रिपाठियों का जिक्र कर अपमान की बात कही गई, वह मैं ही हूं। जिस परिवार की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए गए, वह मेरा परिवार है। जिनके बारे में गालियां देने और लैपटॉप मारने की धमकी का दावा किया गया, वह भी मैं ही हूं।
ऋतु त्रिपाठी कहती हैं कि उनके पति को मारने की बात कही जा रही है। ऑनलाइन धमकियों की वजह से वो और उनका परिवार डरा हुआ है। उनके पति ने क्या किया। उन्होंने तो अपनी पत्नी के पक्ष की बात कही। समय से छोड़ने के लिए कहा तो गलत क्या कहा था। आस्था जो भी कुछ कह रही हैं वो बैंक के सीसीटीवी में कैद है। अगर उनके पति को कुछ हुआ तो कोई और नहीं बल्कि मैं ठाकुर हूं... ऐसी तैसी करने की बात कहने वाली आस्था सिंह ही जिम्मेदार होंगी।
ऋतु त्रिपाठी बताती हैं कि 6 नवंबर 2025 को उन्होंने एचडीएफसी बैंक के पनकी ब्रांच में ज्वाइन किया था। 31 दिसबंर 2025 की रात उन्हें रात 11 बजे बैंक से छोड़ा गया। उन्होंने बताया था कि उनकी आठ महीने की बेटी है, पति उसे अकेले नहीं संभाल पाते। लेकिन उनकी बातों को अनसूनी कर दिया जाता था। वो मानसिक तौर पर प्रताणित हो रही थीं। लेट होने पर ताने मारे जाते थे। बैंक के मैनेजर कहा करते थे वो उनके साथ ज्वांइट कॉल पर क्यों नहीं जातीं।
उन्होंने कहा कि इन आरोपों के बावजूद उन्होंने कोई वीडियो वायरल नहीं किया, क्योंकि वे झूठे या भ्रामक कंटेंट के जरिए चर्चा में आना नहीं चाहतीं। अपनी पहचान पर गर्व जताते हुए उन्होंने कहा कि वो ब्राह्मण है और इस पर गर्व है। अगर मैं गलत नहीं हूं तो मेरा साथ दें। कानपुर की बेटी होने के नाते मुझे न्याय और सम्मान की उम्मीद है।
वहीं ऋतु के पति ऋषि मिश्रा का कहना है कि ब्राह्नण होना ही उनका गुनाह है। आस्था सिंह द्वारा मानहानि के केस पर कहा कि किस बात की मानहानि। अपमान, प्रताणना के शिकार वो हैं, सीधे सीधे आप यह कह सकते हैं कि ब्राह्नण होना ही पाप है।
आस्था सिंह के आरोप
दूसरी ओर, आस्था सिंह का कहना है कि बैंक परिसर में उनसे ऊंची आवाज में सवाल किए गए और बातचीत के दौरान उनकी जाति पूछी गई तथा कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ। उनका दावा है कि जब उनसे जाति पूछी गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से बता दिया। आस्था के अनुसार, विवाद केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं था। उनका कहना है कि उसी दिन सुबह ऋतु त्रिपाठी की बहन बैंक आई थीं, जहां किसी मुद्दे पर कहासुनी हुई। इसके बाद दोपहर में ऋतु अपने पति के साथ बैंक पहुंचीं और मामला बढ़कर विवाद में बदल गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नौकरी से निकलवाने की धमकी दी गई।
आस्था का कहना है कि इस पूरे प्रकरण को कुछ लोग जातीय और राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनके मुताबिक यह मामला कार्यस्थल पर एक महिला कर्मचारी की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है।
दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर नजर आता है। जहां आस्था सिंह कार्यस्थल पर दबाव, धमकी और अपमान की बात कर रही हैं, वहीं ऋतु त्रिपाठी मिश्रा परिवार की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को खारिज कर रही हैं। आस्था ने यह भी कहा कि इस विवाद को राजनीतिक रूप देना या जाति के आधार पर राज्य सरकार को जोड़ना उचित नहीं है।

