सोशल मीडिया पर चुनावी युद्ध, तमिलनाडु में AI से बदली राजनीति
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सोशल मीडिया पर चुनावी युद्ध, तमिलनाडु में AI से बदली राजनीति

तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले AI आधारित वीडियो, डीपफेक और मीम्स से राजनीतिक प्रचार तेज हो गया है। पार्टियां सोशल मीडिया को डिजिटल युद्धभूमि बना रही हैं।


तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब चुनावी रणनीतियों का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। AI से तैयार भाषण, डीपफेक वीडियो और वायरल मीम्स के जरिए राजनीतिक दल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डिजिटल युद्धभूमि में बदल रहे हैं, ताकि जनता की राय को प्रभावित किया जा सके।

राज्य की लगभग सभी प्रमुख पार्टियों ने अपने आईटी विंग और सोशल मीडिया टीमों को मजबूत किया है और आक्रामक ऑनलाइन अभियान चला रही हैं। X, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म अब ऐसे डिजिटल मंच बन गए हैं जहां राजनीतिक नैरेटिव तैयार किए जाते हैं, फैलाए जाते हैं और चुनौती दी जाती है। सत्तारूढ़ DMK, विपक्षी AIADMK और अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) युवा और डिजिटल रूप से सक्रिय मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए AI आधारित कंटेंट का इस्तेमाल कर रही हैं।

डिजिटल युद्ध का नया दौर

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से नाटकीय रही है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है। DMK ने राज्य के कई मतदान केंद्रों पर Booth Level Digital Agents (BLDA) नियुक्त किए हैं, जो सरकार की योजनाओं और प्रमुख परियोजनाओं को ऑनलाइन प्रचारित करते हैं।

हालांकि सोशल मीडिया पर सबसे तीखी प्रतिस्पर्धा सत्तारूढ़ DMK और विजय की TVK के बीच देखी जा रही है। TVK पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है। विजय ने आगामी चुनाव को सीधे तौर पर अपनी पार्टी और DMK के बीच मुकाबला बताया है। उन्होंने इस चुनाव को “मूल्यों की लड़ाई” बताते हुए इसे “पवित्र शक्ति और बुरी शक्ति के बीच संघर्ष” कहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुकाबला सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। DMK और TVK की आईटी टीमें लगभग रोज़ AI से बने छोटे वीडियो और मीम्स तैयार कर रही हैं। इन वीडियो में भाषणों को रीमिक्स किया जाता है, आवाज़ों की नकल की जाती है और सिनेमाई अंदाज़ में कहानी पेश की जाती है, ताकि लोग इन्हें ज्यादा से ज्यादा साझा करें।

डीपफेक पर विवाद

हाल ही में एक AI-जनरेटेड वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस वीडियो में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई को दिखाया गया था। वीडियो में AI की मदद से उनकी आवाज़ बनाई गई और उन्हें विजय को भविष्य का मुख्यमंत्री बताते हुए दिखाया गया।

DMK के संस्थापक की छवि और आवाज़ का इस्तेमाल कर मौजूदा पार्टी नेतृत्व की आलोचना करने पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई।इसके दो दिन बाद DMK के आईटी विंग ने भी जवाबी AI अभियान शुरू किया। एक वीडियो में एम.के. स्टालिन की आवाज़ का उपयोग करते हुए समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी के विचारों को उजागर किया गया। इस वीडियो को मुख्यमंत्री ने खुद सोशल मीडिया पर साझा किया। दिलचस्प बात यह है कि विजय ने भी कहा है कि उनकी पार्टी पेरियार के सामाजिक सुधार के सिद्धांतों का पालन करेगी।

वर्चुअल नेताओं की वापसी

AI तकनीक का इस्तेमाल तमिलनाडु के पुराने राजनीतिक नेताओं को डिजिटल रूप में “फिर से जीवित” करने के लिए भी किया जा रहा है। DMK की 75वीं वर्षगांठ के समारोह में AI की मदद से पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का डिजिटल रूप तैयार किया गया। कार्यक्रम में स्टालिन की सीट के पास एक खाली कुर्सी रखी गई और प्रोजेक्शन के जरिए करुणानिधि को भाषण देते हुए दिखाया गया, जिससे ऐसा लगा मानो वे मंच पर मौजूद हों।

DMK ने AI-जनरेटेड वीडियो का इस्तेमाल AIADMK-BJP गठबंधन की आलोचना के लिए भी किया। एक वायरल वीडियो में AIADMK के महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी को BJP का “गुलाम” बनने की इच्छा जताते हुए दिखाया गया।

इसके जवाब में AIADMK ने भी अपने AI अभियान शुरू किए। पार्टी ने ऐसे वीडियो जारी किए जिनमें तमिलनाडु में महिलाओं और युवाओं से जुड़े कथित हिंसक घटनाओं को दिखाया गया और इन्हें स्टालिन सरकार के खराब प्रशासन का उदाहरण बताया गया।

AI कैरेक्टर के जरिए प्रचार

राष्ट्रीय पार्टियां भी इस डिजिटल प्रयोग में पीछे नहीं हैं। कांग्रेस ने ऑनलाइन राजनीतिक संदेश देने के लिए AI कैरेक्टर पेश किए हैं। इनमें से एक “रक्कम्मा” नाम का किरदार है, जो एक युवा महिला के रूप में राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा करती है। “Rakkamma Talks” नाम से आने वाले रोज़ाना रील्स में यह किरदार केंद्र की BJP-नीत NDA सरकार की नीतियों की आलोचना करता है।

इसी तरह एक और AI किरदार “पुधुवई थाथा” पुडुचेरी से जुड़े मुद्दों पर बात करता है। एक वीडियो में इस किरदार ने वहां एंबुलेंस सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछली चुनावी घोषणाओं के बावजूद स्वास्थ्य ढांचे में सुधार नहीं हुआ।इन AI किरदारों का इस्तेमाल पार्टियां गठबंधनों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपने रुख को समझाने के लिए भी कर रही हैं।

बीजेपी का डिजिटल आउटरीच

BJP ने अपने आईटी विंग को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक टीम डेटाबेस और बूथ स्तर की जानकारी पर काम करती है, जबकि दूसरी टीम सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संदेशों को संभालती है। पार्टी ने एक कॉल सेंटर भी शुरू किया है, जहां टेलीकॉलर केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क करते हैं। बीजेपी आईटी विंग के सूत्रों के अनुसार यह कॉल सेंटर रोज़ करीब 700 लोगों से बात करता है। इसके अलावा तमिलनाडु के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास और विशेष ट्रेनों पर वीडियो भी जारी किए जा रहे हैं।

बड़ा सवाल

डीपफेक वीडियो, AI से बने भाषण और मीम्स की इस डिजिटल जंग के बीच 2026 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव भारत का अब तक का सबसे AI-आधारित चुनावी अभियान बन सकता है।ये डिजिटल उपकरण खासकर उन युवा मतदाताओं पर असर डाल रहे हैं जो अपनी अधिकतर खबरें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त करते हैं। लेकिन राजनीति में AI के बढ़ते इस्तेमाल से कई अहम सवाल भी उठ रहे हैं। क्या व्यंग्य और गलत सूचना के बीच की रेखा धुंधली हो रही है?क्या मतदाता असली और AI से बने कंटेंट के बीच फर्क कर पाएंगे?

एल्गोरिद्म, मीम्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज राजनीतिक बातचीत को पहले से कहीं ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है—क्या ये डिजिटल अभियान सच में लोगों के वोट देने के तरीके को बदल पाएंगे?

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