
महाराष्ट्र निकाय चुनावों में AIMIM की बड़ी जीत, क्या बदले हैं सियासी समीकरण?
Maharashtra municipal elections: इन चुनावों में AIMIM ने समाजवादी पार्टी, NCP और MNS जैसी पुरानी और स्थापित पार्टियों से कई जगह ज़्यादा सीटें जीतीं। पार्टी ने 29 में से 24 नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारे थे।
Maharashtra municipal election results: महाराष्ट्र की सियासत में इस बार नतीजों ने कई पुरानी धारणाएं तोड़ दीं। जिन पार्टियों को सिर्फ “हाशिए की राजनीति” समझा जाता था, वही अब सत्ता के गणित को बदलती दिख रही हैं। हैदराबाद से उठी एक राजनीतिक आवाज ने महाराष्ट्र के नगर निगमों में ऐसा असर दिखाया कि बड़ी-बड़ी पार्टियां पीछे छूट गईं। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM ने न सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाई, बल्कि यह साफ़ कर दिया कि अब उसे नज़रअंदाज करना आसान नहीं है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राज्य के 13 नगर निगमों में कुल 125 वार्डों में जीत हासिल की है। पिछले नगर निगम चुनावों में AIMIM को सिर्फ 56 वार्ड मिले थे। इस तरह इस बार पार्टी ने अपनी सीटें दोगुनी से भी ज़्यादा कर ली हैं। यह महाराष्ट्र में AIMIM का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।
कई बड़ी पार्टियों को छोड़ा पीछे
इन चुनावों में AIMIM ने समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) जैसी पुरानी और स्थापित पार्टियों से कई जगह ज़्यादा सीटें जीतीं। 15 जनवरी को हुए चुनावों में पार्टी ने 29 में से 24 नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारे थे।
कहां रहा सबसे अच्छा प्रदर्शन?
AIMIM का सबसे शानदार प्रदर्शन छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में रहा। यहां पार्टी ने 33 सीटें जीतकर नगर निगम में खुद को बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित किया। इसके अलावा मालेगांव में 21, नांदेड़ में 14, अमरावती में 12, धुले में 10 और सोलापुर में 8 सीटें हासिल की। मुंबई महानगर क्षेत्र में भी पार्टी को छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से अहम फायदे मिले।
मुंबई – 5 सीटें
मुंब्रा – 5 सीटें
नागपुर – 7 सीटें
अहमदनगर और जालना – 2-2 सीटें
परभणी और चंद्रपुर – 1-1 सीट
महाराष्ट्र में AIMIM की शुरुआत
महाराष्ट्र में AIMIM को पहली बड़ी सफलता 2012 के नांदेड़ नगर निगम चुनाव में मिली थी। तब पार्टी ने 81 सदस्यीय निगम में 11 सीटें जीती थीं। यह तेलंगाना के बाहर AIMIM की पहली चुनावी जीत थी। तब से पार्टी लगातार राज्य में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
अंदरूनी कलह के बावजूद जीत
यह बेहतर प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी की महाराष्ट्र इकाई में अंदरूनी मतभेद चल रहे थे। चुनाव से कुछ दिन पहले मुंबई इकाई के अध्यक्ष फारूक शबदी ने इस्तीफ़ा दे दिया। राज्य अध्यक्ष इम्तियाज जलील को सीट बंटवारे को लेकर धमकियां मिलीं। इसके बावजूद पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया।
AIMIM का उभार
AIMIM की बढ़त को समाजवादी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन से भी जोड़ा जा रहा है। कई शहरों में दोनों पार्टियां एक ही मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन AIMIM आगे निकल गई। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि नगर निगम चुनाव बुनियादी मुद्दों पर होते हैं। जनता को लगा कि जिन पार्टियों को वे सालों से वोट दे रहे थे, उन्होंने उनके लिए काम नहीं किया। इसलिए लोगों ने ओवैसी साहब पर भरोसा जताया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरे महाराष्ट्र में उसका सफाया हो गया है।
पार्टी का दावा
AIMIM के नेताओं का कहना है कि पार्टी का वोट बैंक अब सिर्फ मुसलमानों तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज जलील के मुताबिक, हिंदू मतदाता, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) भी अब AIMIM को वोट दे रहे हैं। कई जगह गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत इस बात का सबूत मानी जा रही है। उन्होंने गुलमंडी वार्ड (संभाजीनगर) का उदाहरण दिया, जो पहले शिवसेना-बीजेपी का गढ़ माना जाता था। वहां AIMIM के 4 में से 2 उम्मीदवार जीते।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIMIM ने मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में अपना वोट आधार मजबूत किया है। मुंबई और ठाणे में भी पार्टी ने शुरुआती पकड़ बना ली है। अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में AIMIM ने कांग्रेस और NCP (शरद पवार गुट) को पीछे छोड़ दिया। 125 वार्डों में जीत या बढ़त के साथ AIMIM अब कई नगर निगमों में “किंगमेकर” की भूमिका में आ गई है, जहां किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। आने वाले समय में पार्टी तय करेगी कि वह समर्थन देगी या विपक्ष में बैठेगी।

