दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब, सांस की बीमारियों से बढ़ी मौतों की संख्या, रिपोर्ट में खुलासा
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दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब, सांस की बीमारियों से बढ़ी मौतों की संख्या, रिपोर्ट में खुलासा

Delhi air quality: दिल्ली में वायु प्रदूषण और उससे जुड़ी बीमारियां अब सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं हैं। ये जीवन और मृत्यु का गंभीर सवाल भी बन गई है।


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Delhi air pollution: दिल्ली में हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि यह सिर्फ सांसों को नहीं, बल्कि लोगों की जान को भी खतरे में डाल रही है। पिछले दो दशकों में राजधानी में सांस की बीमारियों से होने वाली मौतें तीन गुना बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ आकस्मिक समस्या नहीं है, बल्कि दिल्ली में लंबे समय से बढ़ते वायु प्रदूषण का परिणाम है। यह गंभीर तस्वीर दिल्ली सरकार के अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय (DES) द्वारा जारी MCCD (Medical Certification of Cause of Death) रिपोर्ट 2005-2024 से सामने आई है ।

मौतों में तेजी से बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, 2005 में सांस की बीमारियों से 2,769 मौतें दर्ज की गई थीं। यह संख्या 2023 में बढ़कर 8,801 और 2024 में 9,211 हो गई। इसका मतलब है कि दो दशकों में मौतों की संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण फेफड़ों पर लंबे समय तक पड़ने वाला वायु प्रदूषण का असर और इससे होने वाली टीबी जैसी बीमारियां हैं। प्रदूषण फेफड़ों की इम्यूनिटी कमजोर करता है और बीमारियों को और गंभीर बनाता है।

हवा की गुणवत्ता लगातार खराब

दिल्ली में PM-2.5 और PM-10 जैसे महीन कण सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा पाए गए हैं। पिछले महीनों में हवा की गुणवत्ता लगातार ‘बहुत खराब’, ‘खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणियों में रही। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए GRAP-4 (Graded Response Action Plan) को दो से अधिक बार लागू करना पड़ा। पिछले सालों के डेटा से भी पता चलता है कि जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ा, वैसे-वैसे सांस की बीमारियों से मौतें भी बढ़ीं।

25-44 आयु वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

MCCD रिपोर्ट के अनुसार, 25-44 आयु वर्ग टीबी और वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित है। पिछले दो दशकों में दिल्ली में कुल 65,985 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 2024 में सबसे ज्यादा 5,093 मौतें शामिल हैं। डेटा से यह भी पता चलता है कि पुरुषों की मौतें महिलाओं की तुलना में ज्यादा हुई हैं।

जीवन और मृत्यु का गंभीर सवाल

DES के लंबे समय के डेटा से साफ पता चलता है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण और उससे जुड़ी बीमारियां अब सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं हैं। ये राजधानी में जीवन और मृत्यु का गंभीर सवाल बन गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रदूषण को रोकने के प्रभावी उपाय तुरंत लागू नहीं किए गए तो आने वाले सालों में ये आंकड़े और भी चिंताजनक हो सकते हैं।

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