
अखिलेश का ऑफर या ऑपरेशन सेंधमारी? चार साल बाद वही 100 विधायक वाला राग
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 100 विधायक लाओ और सीएम बन जाए वाले पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसे हताशा और निराशा बताया।
100 विधायक लाओ और एक हफ्ते के लिए मुख्यमंत्री बन जाओ, समर्थन हम देंगे। करीब चार साल बाद एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी के नेताओं को ऑफर दिया है। इससे पहले इसी तरह के ऑफर को वो योगी आदित्यनाथ 1.0 की सरकार के दौरान भी किया करते थे। उस वक्त नंबर दो के हैसियत से मौजूदा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सरकार का हिस्सा थे। लेकिन इस दफा तस्वीर थोड़ी सी अलग है। मौजूदा योगी सरकार में दो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक हैं। सवाल यह है कि अखिलेश यादव ने 100 विधायकों वाला राग क्यों अलापा है। उससे पहले यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी।
यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि यह बयान विपक्ष की हताशा और निराशा को प्रदर्शित करता है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस बयान से एक बात तो पूरी तरह साफ है कि सपा खुद के दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। जहां तक बीजेपी की बात है सरकार और संगठन में किसी तरह का मतभेज नहीं है। सरकार अपने फर्ज को निभा रही है, जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर रही है और हमारा संगठन जमीन पर मजबूती से अपने काम कर रहा है।
सवाल यह है कि अखिलेश यादव 100 विधायकों वाली बात क्यों करते हैं। दरअसल साल 2017 में सपा विधायकों की संख्या महज 47 थी। अब इस संख्या बल पर वो सरकार बना नहीं सकते थे। वहीं बीजेपी के पास प्रचंड बहुमत था। लेकिन जिन परिस्थितियों में बीजेपी ने सीएम के नाम का ऐलान किया और मौका योगी आदित्यनाथ को मिला उसके बाद से अंदरुनी स्तर पर कड़वाहट बढ़ी। खासतौर से केशव प्रसाद मौर्य को लेकर अखिलेश यादव बार बार कहा करते थे कि मेहनत किसी और की और मलाई किसी और को। दरअसल बीजेपी का यही चरित्र है कि बीजेपी सिर्फ पिछड़ों को वोटबैंक की तरह इस्तेमाल करती है। अब यदि साल 2022 में 100 विधायकों के ऑफर की बात करें तो सपा इस स्थिति में नहीं थी कि वो किसी को अपने समर्थन से बीजेपी के ही किसी और शख्स को सीएम बना सके।
अगर साल 2022 की बात करें तो इस समय सपा के पास विधायकों की संख्या 100 के पार है। यदि बीजेपी के 100 विधायक उनके साथ आएं तो योगी आदित्यनाथ की जगह कोई और सीएम बन सकता है। लेकिन 100 विधायकों की संख्या अपने आप में इतनी ज्यादा है कि किसी भी शख्स के लिए बीजेपी को तोड़ पाना आसान नहीं होगा। इसके साथ ही साथ साल 2022 में विधानसभा का चुनाव ड्यू था और महज 10 महीने बाद 2027 में यूपी में चुनाव होना है। ऐसे में यह शिगुफा हो सकता है।
इस विषय पर यूपी की सियासत पर नजर रखने वाले कहते हैं कि अब जब चुनावी माहौल है अगले साल चुनाव होना है वैसी सूरत में इस तरह के बयान सामने आएंगे। मौजूदा समय में जिस तरह से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, यूजीसी, ब्राह्मण का मुद्दा छाया है उस हालात में समाजवादी पार्टी के नेताओं को लगता है कि बीजेपी को घेरने का यह सही मौका है। आपने देखा भी होगा कि प्रयागराज माघ मेले में किस तरह से शंकराचार्य और बटुकों के साथ पुलिस ने व्यवहार किया। सरकार के ही तीनों बड़े चेहरे यानी सीएम और दोनों डिप्टी सीएम अलग अलग सुर अलाप रहे हैं। अब विपक्ष इसे तीनों में मतभेद के तौर पर पेश कर रही है।

