नया साल, नया पंचांग, पुराना दांव, PDA से फिर जातीय समीकरण साधने की कोशिश?
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नया साल, नया पंचांग, पुराना दांव, PDA से फिर जातीय समीकरण साधने की कोशिश?

UP चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने PDA पंचांग जारी कर साफ संकेत दिया है कि 2027 में सपा सामाजिक पहचान और इतिहास के सहारे सियासी मोर्चेबंदी करेगी।


Samajwadi Party PDA Panchang: आबादी के लिहाज़ से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी तैयारी तेज़ कर दी है। नए साल के मौके को भी चुनावी गणित के हिसाब से भुनाने की कोशिशें साफ दिखाई देने लगी हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (अखिलेश Yadav) ने नए साल की शुरुआत एक नए अंदाज़ में करते हुए पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को और धार दी है। साल 2026 की शुरुआत में अखिलेश यादव ने पार्टी का विशेष ‘पीडीए पंचांग 2026’ जारी किया है, जिसे सपा सामाजिक एकता और चेतना का प्रतीक बता रही है।

इस पीडीए पंचांग को समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय चौरसिया ने प्रकाशित कराया है। पंचांग में पीडीए समाज से जुड़े महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथियों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। अन्य धार्मिक पंचांगों की तरह इसमें अमावस्या, पूर्णिमा, व्रत और त्योहारों की तिथियां भी दी गई हैं, लेकिन इसकी खासियत यह है कि इसमें राष्ट्रीय पर्वों, ऐतिहासिक दिवसों और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण दिन भी दर्ज किए गए हैं।

समाजवादी पार्टी का मानना है कि यह पंचांग समाज को अपने नायकों को याद करने और उनके विचारों से प्रेरणा लेने का अवसर देता है। पार्टी के अनुसार, धार्मिक और सामाजिक-राजनीतिक तिथियों के समावेश से यह पंचांग हर वर्ग के लिए उपयोगी और लाभकारी बनता है।

पंचांग के विमोचन के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए समाज की एकता, चेतना और अधिकारों की लड़ाई समाजवादी आंदोलन की आत्मा रही है। यह पंचांग समाज को उसके महापुरुषों, उनके विचारों और संघर्षों से जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवित रहता है जब उसे नई पीढ़ी तक सरल और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाया जाए, और पीडीए पंचांग 2026 इसी उद्देश्य को पूरा करता है।

इस पंचांग में समाजवादी और बहुजन आंदोलन से जुड़े महापुरुषों के जीवन, योगदान और संघर्षों को भी स्थान दिया गया है। सपा इसे केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और वैचारिक जुड़ाव का माध्यम मान रही है। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले पीडीए का नारा दिया था, जो चुनावी तौर पर सफल साबित हुआ। यूपी में सपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। अब विधानसभा चुनाव से पहले भी पार्टी की रणनीति पीडीए दांव को और मज़बूत करने की दिखाई दे रही है।

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