अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा नहीं हुआ मंजूर, DM पर बंधक बनाने का आरोप! डर में छोड़ा आवास
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अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा नहीं हुआ मंजूर, DM पर बंधक बनाने का आरोप! डर में छोड़ा आवास

Alankar Agnihotri: अलंकार ने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास पर बंधक बनाने की बात कही गई और फोन पर अपशब्द बोले गए।


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Alankar Agnihotri resignation not accepted: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं है। यह डर और असुरक्षा के बीच की कहानी है। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि बरेली वासियों का प्यार हमेशा उनके साथ रहेगा, लेकिन आवास छोड़ना मजबूरी बन गया। क्योंकि वहां भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था। अलंकार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास पर बंधक बनाने की बात कही गई और फोन पर अपशब्द बोले गए। उन्होंने कहा कि डीएम से यह सवाल पूछा जाना चाहिए। वहीं, इस्तीफे के मंजूर न होने पर उन्होंने कहा कि वह हाई कोर्ट तक जाएंगे, यह उनका अधिकार है।

जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी

अलंकार अग्निहोत्री का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। मात्र 10 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। घर के सबसे बड़े बेटे होने के नाते परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। उनकी मां गीता अग्निहोत्री ने कठिन परिस्थितियों में भी उनकी परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। अलंकार ने कानपुर में 12वीं तक की पढ़ाई की और यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया। सिविल सेवा में जाने का सपना उनके मन में था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने आईटी कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी की।

यूपीपीसीएस की सफलता

2014 में, जब उनके छोटे भाई-बहन अपने पैरों पर खड़े हो गए और बहन की शादी हो गई, तब उन्होंने प्राइवेट नौकरी छोड़कर यूपीपीसीएस की तैयारी शुरू की। पहले ही प्रयास में उन्हें सफलता मिली और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया। अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि उनकी सफलता का श्रेय उनकी मां और पत्नी आस्था मिश्रा को जाता है। उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़कर तैयारी करना जोखिम भरा था, इसलिए उन्होंने एक साल की पगार बचाकर अगले 2-3 साल तक परिवार की आर्थिक जरूरतें सुनिश्चित की थीं।

महत्वपूर्ण उपलब्धियां

* यूपी पीसीएस परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की।

* यूपीपीसीएस की तैयारी से पहले 10 साल आईटी सेक्टर में कंसल्टेंसी की नौकरी की।

* 12वीं परीक्षा में प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया।

* बी-टेक आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में।

* परिवार की जिम्मेदारियों के बाद सिविल सेवा की तैयारी की और पहले प्रयास में सफलता पाई।

अलंकार अग्निहोत्री की कहानी इस बात का उदाहरण है कि संघर्ष, परिश्रम और परिवार के समर्थन से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है, चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों।

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