
'सरकारी पद से बड़ा धर्म का पद', शंकराचार्य का अलंकार अग्निहोत्री को खुला प्रस्ताव
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद शंकराचार्य से बातचीत वायरल हुई है। UGC 2026, माघ मेला घटना और ब्राह्मण अपमान के आरोपों ने विवाद को और गहरा दिया है।
Alankar Agnihotri resignation: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर चर्चा में हैं। इस्तीफे के बाद उनकी ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Avimukteshwaranand) से फोन पर हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वायरल वीडियो में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर से अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं।
सरकार से बड़ा पद धर्म के क्षेत्र में—शंकराचार्य
बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने अलंकार अग्निहोत्री से कहा कि उनके इस्तीफे की खबर सुनकर समाज में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।उन्होंने कहा कि एक ओर दुख है कि कड़ी मेहनत और पढ़ाई के बाद प्राप्त किया गया सरकारी पद एक झटके में छूट गया, वहीं दूसरी ओर सनातन धर्म के प्रति उनकी निष्ठा से पूरा समाज प्रसन्न और गौरवान्वित है।
शंकराचार्य ने कहा, “जो पद सरकार ने आपको दिया था, उससे बड़ा पद धर्म के क्षेत्र में हम आपको देने का प्रस्ताव करते हैं। हम चाहते हैं कि आप जैसे निष्ठावान लोग सनातन धर्म की सेवा में आगे आएं।”इस पर अलंकार अग्निहोत्री ने जवाब दिया, ठीक है महाराज जी, जल्द ही आपका आशीर्वाद लेते हैं और आपसे मिलते हैं।
सरकारी नीतियों से असहमति बताकर दिया इस्तीफा
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे सरकारी नीतियों, खासकर UGC 2026 के नए नियमों से गहरे मतभेद को कारण बताया।उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। उनका कहना था कि प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा दुर्व्यवहार किया गया।
इस्तीफे में लगाए गंभीर आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में खुद को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताया और अपनी शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से होने का उल्लेख किया। उन्होंने राज्यपाल को संबोधित पत्र में लिखा कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान प्रयागराज में शंकराचार्य और उनके शिष्यों, बटुक ब्राह्मणों के साथ मारपीट की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जो ब्राह्मणों और साधु-संतों का धार्मिक व सांस्कृतिक प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को झकझोर दिया है।
‘ब्राह्मण विरोधी सोच’ का आरोप
पत्र में आगे अलंकार अग्निहोत्री ने लिखा कि प्रयागराज की घटना से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का अपमान किया गया है।उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रकरण दर्शाता है कि वर्तमान राज्य सरकार और प्रशासन ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रहे हैं और साधु-संतों की अस्मिता से खिलवाड़ हो रहा है।
पोस्टर के साथ तस्वीर भी वायरल
इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वे हाथ में पोस्टर लिए खड़े नजर आए। पोस्टर पर लिखा था #UGC Rollback, काला कानून वापस लो, शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।
सोमवार शाम अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी आवास पहुंचे थे जहां वे करीब एक घंटे तक रुके। बाहर निकलने के बाद उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे यह मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

