नीतीश नहीं तो चुनाव नहीं! अनंत सिंह का राजनीति से संकेत
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नीतीश नहीं तो चुनाव नहीं! अनंत सिंह का राजनीति से संकेत

मोकामा विधायक अनंत सिंह ने ऐलान किया कि मौजूदा कार्यकाल उनका आखिरी होगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति में नहीं रहेंगे तो वह भी चुनाव नहीं लड़ेंगे।


बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि मौजूदा कार्यकाल उनका अंतिम कार्यकाल होगा और वह आगे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस फैसले को राज्य की राजनीति में संभावित बदलाव और नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सोमवार को बिहार विधानसभा में पांच राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के दौरान मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने यह घोषणा की। उन्होंने अपने निर्णय को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि यदि नीतीश कुमार ही सक्रिय राजनीति में नहीं रहेंगे तो उनके लिए विधायक बने रहने का कोई विशेष अर्थ नहीं रह जाता।

अनंत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पहले से ही इस बात का संकेत दे चुके थे कि नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने की स्थिति में वह भी चुनावी राजनीति से दूरी बना लेंगे। उनका कहना है कि इस बार विधायक बनना उनका अंतिम चुनाव था और अब वह आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे।

हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मोकामा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक विरासत जारी रहेगी। अनंत सिंह के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव में उनका बेटा चुनाव मैदान में उतर सकता है और परिवार ही आगे राजनीतिक जिम्मेदारी संभालेगा। इसे उनके राजनीतिक प्रभाव को परिवार के भीतर स्थानांतरित करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

इस दौरान अनंत सिंह ने अपने कानूनी मामलों पर भी टिप्पणी की और दावा किया कि उन्हें उम्मीद है कि वह करीब एक महीने के भीतर जेल से बाहर आ जाएंगे। उन्होंने समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील भी की।बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर पूछे गए सवाल पर अनंत सिंह ने कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही करेंगे।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह का लंबे समय से मजबूत जनाधार और प्रभाव रहा है। ऐसे में उनके चुनावी राजनीति से हटने के फैसले को केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में संभावित पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि उनके बेटे को मोकामा की जनता कितना समर्थन देती है और यह फैसला आने वाले चुनावों में किस तरह के नए समीकरण बनाता है।

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