
सवालों के घेरे में आंध्र प्रदेश 2024 चुनाव, क्या 6 सेकंड में संभव है दो वोट?
आंध्र प्रदेश चुनाव 2024 में देर रात वोटिंग में अचानक बढ़ोतरी पर सवाल उठने लगे हैं। अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर का कहना है कि 6 सेकेंड में दो वोट कैसे संभव है।
आंध्र प्रदेश में 2024 के विधानसभा चुनावों में कथित वोटिंग गड़बड़ियों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इन चुनावों में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बड़ी जीत हासिल की थी।
इस मुद्दे पर ‘AI With Sanket’ के एक एपिसोड में ‘द फेडरल’ ने राज्य से जुड़े अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर से बातचीत की। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, “मुझे यह दिखाइए कि कोई मतदाता छह सेकंड में दो वोट कैसे डाल सकता है।” उन्होंने 2024 के चुनाव से जुड़े मतदान आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाए।विवाद की जड़ में देर रात तक मतदान में अचानक हुई बढ़ोतरी का दावा है, जो आधिकारिक मतदान समय से काफी आगे तक जारी रही।
डेटा का स्रोत क्या है?
परकला प्रभाकर ने कहा कि उनके द्वारा प्रस्तुत सभी आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल और आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के बयानों से लिए गए हैं। उनका कहना है कि यह सारा डेटा पहले से सार्वजनिक है, उन्होंने केवल इसे समय-श्रृंखला (टाइम सीरीज) के रूप में विश्लेषित किया है।
चुनाव में क्या असामान्य लगा?
प्रभाकर के अनुसार, शाम 5 बजे तक मतदान 68.04% था, जो 8 बजे तक मामूली बढ़कर 68.12% हुआ। लेकिन इसके बाद रात 8 बजे से 11:45 बजे के बीच मतदान में 8.38% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। फिर 11:45 बजे से रात 2 बजे के बीच इसमें और 4.16% का इजाफा हुआ। यह 4.16% लगभग 17.2 लाख वोटों के बराबर है। सीईओ के मुताबिक, इस दौरान केवल 3,500 बूथों पर मतदान जारी था। इस हिसाब से हर बूथ पर 135 मिनट में 491 वोट पड़े, यानी करीब 3.6 वोट प्रति मिनट।
यह गणना क्यों अहम है?
इसका मतलब है कि हर 20 सेकंड में एक वोट डाला गया। इस दौरान मतदाता को बूथ में प्रवेश, पहचान सत्यापन, रजिस्टर पर हस्ताक्षर, उंगली पर स्याही, दो मशीनों (लोकसभा और विधानसभा) पर वोट डालना और बाहर निकलना होता है। इसके अलावा वीवीपैट (VVPAT) में हर वोट के बाद 7 सेकंड का समय लगता है। यानी दो वोट में 14 सेकंड यहीं खर्च हो जाते हैं। ऐसे में प्रति मतदाता सिर्फ 6 सेकंड बचते हैं, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगता।
शाम 6 बजे के बाद मतदान के नियम क्या हैं?
नियमों के अनुसार, शाम 6 बजे तक लाइन में लगे सभी मतदाता वोट डाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए तीन शर्तें जरूरी हैं—गेट बंद हो, सभी को टोकन दिए जाएं और प्रिसाइडिंग ऑफिसर मतदाताओं की संख्या दर्ज करे।
साथ ही, लाइन में लगे मतदाताओं की वीडियोग्राफी भी होनी चाहिए। यदि अंतिम वोट रात 2 बजे पड़ा, तो इसका मतलब है कि वह मतदाता शाम 6 बजे से 8 घंटे तक लाइन में खड़ा रहा—जो सवाल खड़े करता है।
क्या इसका कोई सबूत है?
प्रभाकर ने कहा कि अगर सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ, तो टोकन, प्रिसाइडिंग ऑफिसर की डायरी और वीडियोग्राफी जैसे प्रमाण सामने आने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रात 2 बजे तक मतदान हुआ, तो उसकी एक भी तस्वीर या वीडियो क्यों नहीं है?इसके अलावा निर्वाचन आयोग ने यह भी नहीं बताया कि वे कौन से 3,500 बूथ थे जहां देर रात तक मतदान हुआ।
क्या यह बिना अधिकारियों की जानकारी के संभव है?
प्रभाकर के अनुसार, यदि हजारों अधिकारी और एजेंट मौजूद थे, तो इतने बड़े स्तर की गतिविधि को संभालना और छिपाना बेहद मुश्किल है। इसलिए मुख्य सवाल यह है कि क्या वास्तव में इतना मतदान हुआ भी था?
निर्वाचन आयोग का जवाब और उस पर प्रतिक्रिया
निर्वाचन आयोग का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। इस पर प्रभाकर ने कहा कि यह तर्क पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चुनाव रद्द करने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल प्रक्रिया की पारदर्शिता चाहते हैं।उन्होंने बताया कि 2017-18 से नागरिक समूह इस मुद्दे को उठा रहे हैं और 2022 से 2025 तक कई ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
आगे क्या किया जाना चाहिए?
प्रभाकर का कहना है कि निर्वाचन आयोग को पारदर्शिता दिखानी चाहिए। फॉर्म 17C के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, वीडियोग्राफी साझा की जाए और प्रिसाइडिंग अधिकारियों के रिकॉर्ड सामने लाए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ सही साबित होता है, तो वह अपनी बात वापस लेने को तैयार हैं। उनका जोर इस बात पर है कि मुद्दा जीत-हार का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का है।

