
मोदी सरकार की नाकाम विदेश नीति का असर, गैस संकट पर केजरीवाल ने साधा निशाना
अरविंद केजरीवाल ने एलपीजी किल्लत को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने विदेश नीति को जिम्मेदार बताते हुए रोजगार पर बड़े संकट की आशंका जताई।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने एलपीजी गैस की कथित किल्लत को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति और हालिया अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से देश में गैस आपूर्ति का संकट पैदा हुआ है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर निशाना
बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केजरीवाल ने कहा कि देश इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है और कई हिस्सों में एलपीजी गैस की भारी कमी देखने को मिल रही है। उनका दावा है कि देश में गैस उत्पादन करीब 50 प्रतिशत तक घट गया है, जबकि कुल खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है।
केजरीवाल के मुताबिक इस आयात का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता था, लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण वहां से सप्लाई बाधित हो गई है।
विदेश नीति पर सवाल
आप प्रमुख ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत लंबे समय तक गुटनिरपेक्ष नीति का पालन करता रहा, लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल का पक्ष लेकर ईरान जैसे पुराने सहयोगी देश से दूरी बना ली, जिससे मौजूदा संकट गहरा गया।उन्होंने यह भी सवाल किया कि युद्ध शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे की क्या जरूरत थी।
रोजगार पर असर का दावा
केजरीवाल ने कहा कि गैस आपूर्ति में कमी का असर कई उद्योगों और छोटे कारोबारों पर पड़ रहा है। उन्होंने मुंबई, तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर, बिहार और राजस्थान का जिक्र करते हुए दावा किया कि हजारों होटल और छोटे व्यवसाय बंद हो चुके हैं।उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात के मोरबी में टाइल्स उद्योग से जुड़े करीब एक लाख लोग बेरोजगार हो चुके हैं और देशभर में लगभग एक करोड़ लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।
ट्रंप को लेकर विवादित टिप्पणी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री ट्रंप के दबाव में फैसले ले रहे हैं और भारत को अमेरिका की “कॉलोनी” बनाने की कोशिश हो रही है।केजरीवाल ने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री को किसी तरह के खुलासे का डर है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन देश को संकट में नहीं डालना चाहिए।हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

