केजरीवाल का मास्टरस्ट्रोक: हाई कोर्ट से याचिका वापस लेकर ED को चौंकाया!
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केजरीवाल का मास्टरस्ट्रोक: हाई कोर्ट से याचिका वापस लेकर ED को चौंकाया!

दिल्ली आबकारी घोटाले में 'समन कांड' पर नया मोड़; ट्रायल कोर्ट से नोटिस मामले में बरी होने के बाद केजरीवाल का बड़ा कदम, अब ED ने दी हाई कोर्ट में चुनौती देने की खुली चेतावनी।


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Arvind Kejriwal And Delhi Liquor Policy Scam : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन के खिलाफ दायर अपनी याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट से वापस ले लिया है। यह फैसला तब सामने आया जब निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने उन्हें समन की अवहेलना करने के मामले में पहले ही बरी कर दिया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील ने अदालत को बताया कि चूंकि अब उनके मुवक्किल को ट्रायल कोर्ट से राहत मिल चुकी है, इसलिए वे इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। हालांकि, यह मामला यहीं शांत होता नहीं दिख रहा है। ED की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट में साफ कर दिया कि एजेंसी ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करेगी। इस कानूनी दांव-पेंच ने एक बार फिर दिल्ली की राजनीति और आबकारी घोटाले के मामले को सुर्खियों में ला दिया है।



ट्रायल कोर्ट से क्यों मिली केजरीवाल को बड़ी राहत?

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया था। एडिशनल जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास पारस दलाल ने माना कि ED यह साबित करने में विफल रही कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की थी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि समन केवल ईमेल के जरिए भेजना 'वैध तामील' (Valid Service) नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि एक तत्कालीन मुख्यमंत्री के पास भी अपने मौलिक अधिकार और आवाजाही की स्वतंत्रता है। इन्हीं आधारों पर ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को आईपीसी की धारा 174 के तहत दोषी नहीं माना और उन्हें बड़ी राहत दे दी।



गिरफ्तारी से पहले का 'समन कांड' और ED की शिकायत

दिल्ली आबकारी नीति मामले में गिरफ्तारी से पहले ED ने केजरीवाल को पूछताछ के लिए कुल 9 समन जारी किए थे। जब केजरीवाल बार-बार पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए, तो जांच एजेंसी ने कोर्ट में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। ED का आरोप था कि केजरीवाल जानबूझकर जांच में बाधा डाल रहे हैं और कानून की अनदेखी कर रहे हैं। इन शिकायतों के आधार पर ही ट्रायल कोर्ट ने पहले केजरीवाल को समन जारी कर पेश होने का आदेश दिया था। केजरीवाल ने इन्हीं शिकायतों और ट्रायल कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब उन्होंने आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है।



आबकारी घोटाला: संजय सिंह और मनीष सिसोदिया का क्या हुआ?

दिल्ली आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार के मामले ने आम आदमी पार्टी के कई शीर्ष नेताओं को जेल की हवा खिलाई है। इस मामले में आप सांसद संजय सिंह को 4 अक्टूबर 2024 को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 26 फरवरी 2023 को पहले सीबीआई और फिर 9 मार्च 2023 को ईडी ने गिरफ्तार किया था। वर्तमान में केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह तीनों को ही कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' और अन्य राजनीतिक चर्चाओं के बीच, आम आदमी पार्टी इस बरी होने के फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रही है।



क्या फिर बढ़ेगी केजरीवाल की मुश्किलें? हाईकोर्ट में नई जंग

केजरीवाल द्वारा याचिका वापस लेने के बाद अब सबकी नजरें ED के अगले कदम पर टिकी हैं। एएसजी एसवी राजू ने साफ संकेत दिए हैं कि वे ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। ED का तर्क है कि कानून के सामने हर व्यक्ति समान है और समन का जवाब न देना एक गंभीर उल्लंघन है। उधर, केजरीवाल के वकीलों का कहना है कि वे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकोर्ट में जब ED अपनी अपील दाखिल करेगी, तो अदालत का रुख क्या रहता है। यह कानूनी लड़ाई फिलहाल लंबी खिंचती नजर आ रही है।

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