असम में विपक्षी एकता पर सवाल, कांग्रेस-रायजोर दल में भरोसे का संकट
x

असम में विपक्षी एकता पर सवाल, कांग्रेस-रायजोर दल में भरोसे का संकट

असम चुनाव से पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन में सीट बंटवारे और रायजोर दल पर भरोसे की कमी से बातचीत अटकी है, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।


असम में 2026 के विधानसभा चुनाव में अब केवल एक महीना बाकी है और राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के नेतृत्व में बना यूनाइटेड ऑपोज़िशन फोरम, जिसे लोकप्रिय रूप से असम सोनमिलितो मोर्चा (ASOM) कहा जाता है, बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि सीट बंटवारे को लेकर मतभेद और रायजोर दल के साथ भरोसे की कमी के कारण गठबंधन वार्ता अधर में लटकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस रायजोर दल के बिना भी बीजेपी के खिलाफ जीतने वाला गठबंधन बना सकती है।

आठ विपक्षी दलों का साझा मोर्चा

अब तक आठ विपक्षी दल औपचारिक रूप से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके हैं। इनमें कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M), असम जातीय परिषद (AJP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन (CPI-ML) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (APHLC) समेत अन्य दल शामिल हैं।यह गठबंधन बीजेपी और उसके एनडीए सहयोगियों के खिलाफ मुख्य चुनौती बनने की कोशिश कर रहा है।

सीट बंटवारे को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। संभावित समझौते के मुताबिक AJP को 12 सीटें मिल सकती हैं, जिनमें खोवांग, सादिया, सरूपाथर, महमोरा और गुवाहाटी सेंट्रल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। CPI(M) रंगिया और सरभोग सीटों से चुनाव लड़ सकती है, जबकि CPI डेमो से उम्मीदवार उतार सकती है। CPI(ML) बेहाली सीट से और APHLC डिप्हू व रोंगखांग (ST) सीट से उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।

भरोसे की कमी बना सबसे बड़ा मुद्दा

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है और AJP के साथ भी सहमति बनने के करीब है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यह है कि क्या रायजोर दल गठबंधन में शामिल होगा।इस अनिश्चितता की मुख्य वजह विचारधारा नहीं बल्कि भरोसे की कमी है। कांग्रेस रायजोर दल से इसलिए नाराज बताई जा रही है क्योंकि उसने हाल ही में पार्टी छोड़कर आए कई पूर्व कांग्रेसी नेताओं को अपने साथ शामिल कर लिया है।

इनमें सबसे चर्चित नाम शर्मन अली अहमद का है। कांग्रेस के निलंबित विधायक अहमद ने 17 फरवरी को रायजोर दल जॉइन किया और उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया गया। अब वे मांडिया सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।अहमद पहले ही कांग्रेस से विवादों में रहे हैं। 2021 में उन्हें पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने पर निलंबित किया गया था। उन्होंने 1983 के नेल्ली नरसंहार और असम आंदोलन को लेकर विवादित बयान दिए थे, जिससे पार्टी में नाराजगी पैदा हुई थी। हाल ही में उन्होंने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई पर तंज कसते हुए पूछा—“गौरव गोगोई कौन हैं?” इस बयान के बाद कांग्रेस और ज्यादा नाराज हो गई।

गौरव गोगोई ने सार्वजनिक रूप से कहा कि निलंबित नेताओं को शामिल करने और उन्हें टिकट देने की संभावना से भरोसा कमजोर हुआ है। उनके अनुसार इससे यह संदेश जाता है कि रायजोर दल असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं को शामिल कर फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

नया विवाद: अब्दुर राशिद मंडल

तनाव का एक और कारण अब्दुर राशिद मंडल हैं, जो वेस्ट गोलपारा से तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर रायजोर दल जॉइन कर लिया है। कुछ कांग्रेसी नेता मानते हैं कि गोलपारा ईस्ट सीट से मंडल को संयुक्त उम्मीदवार बनाया जा सकता है। लेकिन वे शर्मन अली अहमद को उम्मीदवार बनाने के सख्त खिलाफ हैं।

इस बीच स्थानीय स्तर पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। दलgaon जैसी सीटों को गठबंधन सहयोगियों को देने की संभावना के खिलाफ कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि इससे उन इलाकों में पार्टी कमजोर हो जाएगी जहां कांग्रेस पारंपरिक रूप से मजबूत रही है। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कहा है कि यदि यह सीट रायजोर दल को दी गई तो वे पार्टी छोड़कर AIUDF में शामिल हो जाएंगे।

रायजोर दल बनाम कांग्रेस

सिबसागर के विधायक और रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने 2 मार्च को गुवाहाटी में मीडिया से कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन की स्थिति और जटिल हो गई है और संभव है कि दोनों दल साथ न आ पाएं। मुख्य विवाद सीटों की संख्या को लेकर है। शुरू में गोगोई ने 27 सीटों की मांग की थी, बाद में इसे 22 और फिर 15 सीटों तक कम कर दिया। लेकिन कांग्रेस रायजोर दल को केवल चार सीटें देने को तैयार थी। साथ ही कुछ “फ्रेंडली कॉन्टेस्ट” या अन्य व्यवस्थाओं के जरिए कुल मिलाकर लगभग 13 सीटों की पेशकश की गई।

रायजोर दल के कार्यकारी अध्यक्ष भास्को डे सैकिया ने कहा कि पार्टी गठबंधन के पक्ष में है, लेकिन कांग्रेस का प्रस्ताव संतोषजनक नहीं है। उनके अनुसार अगर कांग्रेस एक और सीट देकर कुल संख्या पांच कर दे, तो समझौते की संभावना बन सकती है।

रायजोर दल का राजनीतिक आधार

रायजोर दल एक क्षेत्रीय पार्टी है जो बीजेपी और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करते हुए उभरी है। इसका गठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति आंदोलन से हुआ था और पार्टी खुद को एक प्रगतिशील विकल्प के रूप में पेश करती है।2021 के विधानसभा चुनाव में रायजोर दल कांग्रेस के नेतृत्व वाले ग्रैंड अलायंस में शामिल नहीं हुई थी। पार्टी ने 29 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतारे थे क्योंकि उसका पंजीकरण देर से हुआ था। उस चुनाव में केवल अखिल गोगोई सिबसागर से जीत पाए थे। पार्टी को राज्य भर में करीब 1 से 1.5 प्रतिशत वोट मिले थे।

बाद में विश्लेषकों ने कहा कि अपर असम के कुछ इलाकों में रायजोर दल और AJP के वोट बंटने से बीजेपी को लगभग 10–14 सीटों पर फायदा हुआ होगा, हालांकि यह सीधे तौर पर साबित नहीं हुआ।रायजोर दल का कहना है कि वह वैचारिक रूप से बीजेपी के खिलाफ है और उस पर वोट विभाजन का आरोप लगाना सही नहीं है।

बीजेपी का आत्मविश्वास

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा विपक्ष की संभावनाओं को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं दिखते। उन्होंने हाल ही में कहा कि अखिल गोगोई चाहे जितनी कोशिश कर लें, वे 500 साल में भी असम में सरकार नहीं बना पाएंगे।उन्होंने कांग्रेस और रायजोर दल की बातचीत पर भी तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल सिर्फ अपने फायदे के लिए साथ आने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले चुनाव का गणित

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-नीत एनडीए ने 44 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 75 सीटें जीती थीं। इनमें बीजेपी ने 60 सीटें, AGP ने 9 और UPPL ने 6 सीटें हासिल की थीं।वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले ग्रैंड अलायंस को कुल 50 सीटें मिली थीं। इसमें कांग्रेस को 29 सीटें, AIUDF को 16 सीटें और BPF को 4 सीटें मिली थीं।AJP को 3.66 प्रतिशत वोट मिलने के बावजूद कोई सीट नहीं मिली, जबकि रायजोर दल को 1.5 प्रतिशत वोट के साथ एक सीट मिली।

क्या विपक्ष एकजुट होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विपक्षी दल अपने मतभेद भुलाकर बीजेपी के खिलाफ एकजुट हो पाएंगे, या फिर 2026 का चुनाव भी विपक्षी वोटों के बिखराव का गवाह बनेगा।असम में चुनाव नजदीक आते ही आने वाले दिन तय करेंगे कि बीजेपी विरोधी दल एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे या फिर एक बार फिर बिखरे हुए मुकाबले में उतरेंगे।

Read More
Next Story