Baramati Plane Crash: दो बार लैंडिंग की कोशिश, मेडे कॉल नहीं दिया गया-डीजीसीए
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Baramati Plane Crash: दो बार लैंडिंग की कोशिश, मेडे कॉल नहीं दिया गया-डीजीसीए

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन हो गया है। कुछ सियासी दलों ने जांच की मांग की है। सवाल यह है कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या खराब मौसम से।


महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह एक बड़ा विमान हादसा सामने आया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी लोगों का निधन हो चुका है। विमानन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से भी इस दुर्घटना में किसी के बच न पाने की पुष्टि की है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने शुरुआती जांच में अहम जानकारी साझा की है। DGCA के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान के पायलटों को लैंडिंग के दौरान रनवे दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे उन्हें उतरने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।

DGCA के मुताबिक, विमान ने पहली बार लैंडिंग का प्रयास किया, लेकिन रनवे नजर न आने के कारण पायलटों ने गो-अराउंड किया और दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश की। इस दौरान क्रू की ओर से किसी भी तरह का मेडे (Mayday) कॉल नहीं दिया गया। हालांकि, विमान दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। मामले की जांच के लिए दिल्ली से एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम भेजी जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में तकनीकी खामी को हादसे का संभावित कारण बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पायलट ने संकरे रनवे पर उतरने के लिए इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी थी, लेकिन लैंडिंग के दौरान विमान का नोज रनवे से टकरा गया, जिससे यह गंभीर हादसा हुआ।

तकनीकी खामी बनती है बड़े हादसों की वजह

यूरोपियन ट्रांसपोर्ट सेफ्टी काउंसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब 90 प्रतिशत विमान हादसों की मुख्य वजह तकनीकी खराबी होती है। इसके अलावा खराब मौसम भी विमान दुर्घटनाओं के लिए एक बड़ा कारक माना जाता है।

टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान ज्यादा होते हैं विमान हादसे

एविएशन सेफ्टी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक विमान हादसे टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होते हैं। वर्ष 2023 में कुल 109 विमान दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 37 टेकऑफ के दौरान और 30 लैंडिंग के समय हुई थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते सात वर्षों में हर साल औसतन 200 विमान हादसे हुए हैं। टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान इंजन फेल होना आम तकनीकी कारणों में से एक है।

पायलट की गलती भी बन सकती है हादसे की वजह

wkw.com पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कई विमान दुर्घटनाओं में पायलट की गलती को भी बड़ा कारण माना गया है। विमान उड़ाने के लिए लंबी ट्रेनिंग, मैकेनिकल जानकारी और हाथ-आंखों के बेहतर तालमेल की जरूरत होती है।इसके अलावा उड़ान की योजना बनाना, मौसम की जांच करना और संभावित बदलावों का अनुमान लगाना भी एक सुरक्षित उड़ान के लिए बेहद जरूरी होता है।

6 साल में 813 विमान हादसे

एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 विमान दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,473 यात्रियों की जान गई। इनमें सबसे ज्यादा 261 हादसे लैंडिंग के दौरान हुए, जबकि 212 दुर्घटनाएं उड़ान के समय दर्ज की गईं। इसी अवधि में भारत में कुल 14 विमान हादसे हुए।

खराब मौसम और ATC की भूमिका

रिपोर्ट्स के अनुसार, खराब मौसम में फंसने या सही अनुमान न लगा पाने की स्थिति में भी विमान हादसा हो सकता है। बादलों के बीच उड़ान के दौरान पायलट भ्रमित हो सकते हैं, खासकर यदि कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट का सही तरीके से पालन न किया जाए।

इसके अलावा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की भूमिका भी बेहद अहम होती है। यदि ATC की ओर से गलत जानकारी दी जाती है या विमानों को सुरक्षित दूरी पर रखने में चूक होती है, तो टकराव की आशंका बढ़ जाती है।

बर्ड स्ट्राइक से भी बढ़ता है खतरा

Travel Radar की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हर दिन औसतन 150 बर्ड स्ट्राइक की घटनाएं होती हैं। अकेले अमेरिका में हर साल करीब 14 हजार ऐसे मामले सामने आते हैं। 2016 से 2021 के बीच पांच वर्षों में लगभग 2.73 लाख बर्ड स्ट्राइक की घटनाएं दर्ज की गईं। माना जाता है कि इनमें से करीब 80 प्रतिशत मामलों की रिपोर्टिंग ही नहीं हो पाती।

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