इंदौर जैसी जल-प्रदूषण की दहशत, बेंगलुरु के लिंगराजपुरम में मचा हड़कंप
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बेंगलुरु के लिंगराजपुरम के एक निवासी ने इलाके के नलों से आ रहे गंदे पानी की बोतल दिखाई, जो सेहत के लिए एक गंभीर खतरा है।

इंदौर जैसी जल-प्रदूषण की दहशत, बेंगलुरु के लिंगराजपुरम में मचा हड़कंप

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि जल बोर्ड ने 30 साल से ज्यादा पुराने पाइप अब तक नहीं बदले हैं। उन्होंने कहा कि सीवेज का पानी पीने के पानी की पाइपों में मिल रहा है।


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मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए जल प्रदूषण कांड को अभी एक सप्ताह ही बीता है, लेकिन देश के अन्य शहरों से भी इसी तरह की घटनाएं सामने आने लगी हैं। देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में लिंगराजपुरम के केएसएफसी इलाके में पेयजल पाइपलाइनों में सीवेज का पानी मिलने की पुष्टि हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। करीब दो सप्ताह पहले, इंदौर की घटना की जानकारी रखने वाले कुछ सतर्क निवासियों ने जब दशकों पुराने पाइपों से गंदा और बदबूदार पानी निकलते देखा तो तुरंत पानी का उपयोग बंद कर दिया और वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर निजी टैंकरों से पानी मंगवाना शुरू किया।

हालांकि कुछ लोग डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए, लेकिन आपसी सतर्कता और व्हाट्सऐप के जरिए तुरंत जानकारी शेयर करने के कारण इंदौर जैसी भयावह स्थिति यहां टल गई। इसके बावजूद इलाके के लोगों को अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।

केएसएफसी की निवासी और दो बच्चों (सात वर्ष और एक वर्ष) की दादी रोजा ने चिंता जताते हुए कहा कि हम अपने बच्चों को पहले जल बोर्ड (बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवेज बोर्ड – BWSSB) का पानी पिलाते थे। अब पानी प्रदूषित हो चुका है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि वह करीब दो हफ्ते तक पेट दर्द और डायरिया से पीड़ित रहीं। इलाज के बाद वह ठीक तो हो गईं, लेकिन इंदौर की घटना ने पूरे परिवार को डरा दिया है। बातचीत के दौरान उन्होंने एक बोतल में भरा काला पानी दिखाया, जो जल बोर्ड के नल से आ रहा था।

तीन दशक पुराने पाइप

स्थानीय निवासी मोसेस ने आरोप लगाया कि जल बोर्ड ने 30 साल से ज्यादा पुराने पाइप अब तक नहीं बदले हैं। उन्होंने कहा कि सीवेज का पानी पीने के पानी की पाइपों में मिल रहा है। मेरी बहू गर्भवती है और उसे रोज डायरिया हो रहा है। मेरी मां को पेट दर्द हुआ। मेरी बेटी डॉक्टर है, उसे भी पेट दर्द हुआ। तब मुझे यकीन हुआ कि यह सब पानी की वजह से है। उन्होंने बताया कि व्हाट्सऐप ग्रुप में चर्चा होने के बाद ही उन्हें पानी प्रदूषण की असल वजह का पता चला।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवेज का पानी पास से गुजर रही कावेरी जल आपूर्ति पाइपलाइन में मिल रहा है। एक अन्य निवासी अन्नपूर्णा ने कहा कि उनके घर के संप में आने वाले पानी से अलग तरह की बदबू आ रही थी। जांच करने पर काला पानी निकलने लगा, जिसके बाद उन्होंने पानी का इस्तेमाल बंद कर दिया और कैन का पानी लेना शुरू कर दिया।

उनका कहना है कि पेयजल की पाइपलाइनें 30 साल पुरानी हैं, जिनमें गंदगी भरी हुई है और इन्हें तुरंत बदले जाने की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा पानी हम कैसे इस्तेमाल करें? हम अपना स्वास्थ्य कैसे बचाएं? बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए स्थिति और भी गंभीर है। रोजा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद खाने में कुछ गड़बड़ है, लेकिन जब नल से काला पानी निकला तो उन्हें यकीन हो गया कि पीने का पानी ही दूषित है।

व्हाट्सऐप के जरिए एक-दूसरे को किया सतर्क

करीब 15 दिन पहले इलाके के निवासियों ने व्हाट्सऐप के जरिए एक-दूसरे को आगाह किया कि नल से आने वाला पानी साफ नहीं है। कुछ दिनों बाद उन्होंने जल बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बोर्ड ने कार्रवाई करते हुए प्रभावित इलाकों में पानी की आपूर्ति बंद कर दी। अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक की मदद से प्रदूषण के स्थानों की पहचान की गई और मरम्मत कार्य शुरू किया गया।

जल बोर्ड ने लोगों को सलाह दी कि समस्या के समाधान तक नल के पानी का उपयोग न करें और टैंकर से पानी मंगवाएं। निवासियों की इसी सतर्कता के कारण लिंगराजपुरम, इंदौर के भगिरथपुरा इलाके जैसी भयावह स्थिति का शिकार होने से बच गया, जहां कई लोगों की जान गई थी। मोसेस ने कहा कि अगर थोड़ी भी लापरवाही होती तो बच्चों और गर्भवती महिलाओं समेत कई लोगों की जान दूषित पानी से जा सकती थी।

लोगों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

हालांकि निजी टैंकरों पर निर्भरता से लोगों को स्थायी राहत नहीं मिली है। टैंकर संचालकों ने स्थिति का फायदा उठाकर पानी के दाम बढ़ा दिए हैं। मजबूरी में लोगों को टैंकर और बोतलबंद पानी दोनों पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। रोजा ने बताया कि जल बोर्ड के अधिकारियों ने निरीक्षण कर शुक्रवार (9 जनवरी) तक समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया है। पाइपलाइन की मरम्मत जारी है और पानी की कमी से बचने के लिए सरकार द्वारा संचालित ‘संचारी कावेरी’ मोबाइल टैंकरों के जरिए प्रभावित इलाकों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

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