
यूपी की जंग में महिला वोटरों पर दांव:अखिलेश के 40 हज़ार की घोषणा Vs बीजेपी का ‘गुंडाराज’ नैरेटिव
वार-पलटवार के बीच सवाल यह है कि 2017 और 2022 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाली महिला वोटरों को साधने की सपा की कोशिश क्या रंग ला सकती है?
Betting on women voters, अखिलेश Yadav’s 40k announcement Vs BJP’s 'goonda raj’ narrative: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का समय बाकी है लेकिन समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला वोटरों को बड़ा संदेश देते हुए पहली चुनावी घोषणा कर दी है।उन्होंने सपा सरकार बनने पर गरीब महिलाओं को ‘नारी समृद्धि सम्मान योजना’ के तहत हर साल 40 हज़ार रुपये देने की घोषणा की है।महिला कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में अखिलेश ने महिला वोटरों को साधने के लिए PDA के 'A’ का मतलब 'आधी आबादी’ बताया।इसके बाद से बीजेपी लगातार इस बात पर हमलावर है और योगी सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता सपा सरकार के गुंडाराज और कानून व्यवस्था की याद दिला रहे हैं।
सपा सरकार बनने पर महिलाओं को 40 हज़ार रुपए देने का ऐलान-
यूपी चुनाव से पहले ही अखिलेश यादव ने महिला वोटरों को साधने के लिए बड़ा दांव चला है।सपा में महिला कार्यकर्ताओं और अलग-अलग वर्ग की महिलाओं के बीच अखिलेश यादव ने यह घोषणा कर दी कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर गरीब महिलाओं को 40 हज़ार रुपए सालाना दिए जाएँगे।'महिला सम्मान समृद्धि योजना’ के तहत ये पैसे महिलाओं के खाते में सीधे दिए जाएँगे।साथ ही पुरानी समाजवादी पेंशन योजना को फिर शुरू किया जाएगा।यही नहीं, अखिलेश यादव ने PDA के 'A’ को आधी आबादी बताकर यह साफ़ कर दिया कि इस बार सपा की नज़र महिला वोटरों पर है।
बीजेपी ने महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध और क़ानून व्यवस्था का सवाल उठाया-
अखिलेश यादव की इस घोषणा के बाद बीजेपी और योगी सरकार के मंत्रियों ने एक के बाद एक बयान जारी कर निशाना साधा।दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई मंत्रियों और नेताओं ने सपा सरकार में ‘गुंडाराज’ का आरोप लगाया और महिला सुरक्षा को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए याद दिलाया कि उस दौर में यूपी ‘जंगल राज’ के लिए बदनाम था।साथ ही बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया के ज़रिए यह भी बताना शुरू किया कि कई सपा नेता महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध और उत्पीड़न की घटनाओं में शामिल रहे।केशव प्रसाद मौर्य ने तो कहा कि समृद्धि से पहले सुरक्षा ज़रूरी है और अखिलेश यादव को पहले इसकी बात करनी चाहिए।इस वार-पलटवार के बीच सवाल यह है कि 2017 और 2022 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाली महिला वोटरों को साधने की सपा की कोशिशें क्या रंग ला सकती हैं? जानकारी के अनुसार सपा की इस कोशिश को देखते हुए बीजेपी भी अपने महिला वोटरों को ख़ास संदेश दे सकती है।
1090 हेल्पलाइन से कन्या विद्या धन तक की योजनाएँ याद दिलाने को तैयारी -
समाजवादी महिला सभा की अध्यक्ष जूही सिंह का कहना है कि ''बीजेपी को आख़िर इस घोषणा से दिक्कत क्या है? समाजवादी पार्टी ने पहले भी समाजवादी पेंशन, कन्या विद्या धन जैसी योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक मदद दी।उनकी(बिहार में एनडीए) तरह इलेक्शन के बीच में दस हज़ार रुपए नहीं दिए।… और जहाँ तक महिला सुरक्षा की बात है 1090( महिला हेल्पलाइन) की शुरुआत से लेकर रानी लक्ष्मीबाई फंड से एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की मदद भी सपा सरकार में हुई।बीजेपी सरकार में ऐसी संवेदनशीलता कहाँ है? जबकि यूपी में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।’’ समाजवादी महिला सभा आने वाले समय में महिलाओं के लिए सपा सरकार में किए गए काम को महिलाओं के बीच ले जा सकती हैं।
लाभार्थी महिलाएँ बनीं बीजेपी के लिए 'गेम चेंजर’-
दरअसल यूपी में आधी आबादी के वोट को लेकर यह जंग यूँ ही नहीं है।अतीत में जाएँ तो महिलाओं का वोट पहले भी राजनीतिक दलों को मिलता रहा है पर वो एकजुट होकर किसी और वोट बैंक की तरह वोट नहीं करती थीं।लेकिन 2017 में अलग-अलग केंद्रीय योजनाओं का लाभ पाने वाली महिलाओं ने बड़ी संख्या में बीजेपी को वोट दिया।चुनाव के बाद यह बात सामने आयी कि ऐसी महिलाओं ने जाति और वर्ग से अलग हटकर अपने वोट बीजेपी के पक्ष में दिया जिससे ‘लाभार्थी वर्ग’ (beneficiaries) के रूप में एक नया वर्ग सामने आ गया।2022 के चुनाव में भी यह ट्रेंड जारी रहा।लोकनीति-CSDS और लगभग सभी सर्वे के अनुसार महिलाओं ने बीजेपी को पुरुषों से ज्यादा वोट दिया।महिलाओं में बीजेपी को SP+ पर 13 प्रतिशत का लीड मिला जबकि पुरुषों में केवल 5 प्रतिशत का लीड मिला।इसके पीछे सरकारी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी को बड़ी वजह माना गया।महिलाएं फ्री राशन,शौचालय, प्रधानमंत्री आवास, उज्जवला योजना में सीधे लाभार्थी रहीं और इन्हीं योजनाओं को बीजेपी के लिए 'गेम चेंजर’ माना गया।इसके अलावा मध्य प्रदेश में लाड़ली बहन योजना और पिछले साल हुए बिहार चुनाव में 10 हज़ार रुपए वाले स्कीम को भी ट्रम्प कार्ड के रूप में देखा गया।
बीजेपी से इस मामले में मुक़ाबला मुश्किल-
दरअसल यूपी में पिछले कुछ समय में महिलाओं के वोटिंग पैटर्न में बदलाव आया है।इन वर्षों में महिलाओं का वोटिंग के मामले में घर के पुरुष मतदाताओं के प्रभाव से मुक्त होना भी एक ख़ास वजह है जिससे महिलाएँ अलग से एक वोट बैंक के रूप में सामने आई हैं।वरिष्ठ पत्रकार शहिरा नईम कहती हैं ''महिलाएँ पहले घर के पुरुषों के कहने पर या उनसे प्रभावित होकर वोट करती रही हैं लेकिन अब यह स्थिति बदली है।इसलिए अब यह बहुत बड़ा वोट बैंक बन गया है।’’ हालाँकि शहिरा नईम मानती हैं कि सपा को रेवड़ी बाँटने की पॉलिटिक्स से अलग महिलाओं को सशक्त बनाने और उनको सुरक्षित करने के लिए काम करना चाहिए।शहिरा नईम कहती हैं ''जिस तरह से हर योजना और हर लाभ से मोदी और योगी को जोड़कर देखा जाता है (किसी भी चीज़ को बाँटने तक में उनकी फोटो होती है) ऐसे में अखिलेश यादव के लिए इस मामले में बीजेपी से मुकाबला करना मुश्किल होगा।पीडीए के लिए काम करने की बात करने वाली समाजवादी पार्टी को अपना नज़रिया बदलना होगा।’’
घोषणा का सबसे ज़्यादा लाभ PDA वर्ग की महिलाओं को-
हालाँकि पार्टी कार्यकर्ता इस घोषणा से उत्साहित हैं और मानते हैं कि इस घोषणा का असर होगा।दरअसल इसके पीछे महिलाओं के वोटिंग का पैटर्न है।अखिलेश यह जानते हैं कि अगर महिला वोटरों को आर्थिक मदद की घोषणा की जाती है तो वो चुनावी लड़ाई में सपा को आगे ले जा सकती हैं।लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन की सफलता का आधार बने पीडीए की बात अखिलेश यादव लगातार कर रहे हैं और 40 हज़ार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा का सबसे ज़्यादा लाभ भी PDA वर्ग की महिलाओं को ही मिलेगा।ऐसे में समाजवादी पार्टी के लिए यह घोषणा उनको ख़ास तौर पर इन वर्गों की महिलाओं का समर्थन दिला सकती है।
ख़राब क़ानून व्यवस्था और महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध का नैरेटिव-
हालाँकि इस घोषणा के बाद भी सपा को महिला वोटरों का साथ लेने में कई चुनौतियों का सामना करना होगा।वजह सपा सरकार में क़ानून व्यवस्था का नेरेटिव है।2017 के चुनाव में बीजेपी ने सपा के गुंडाराज की बात कहकर क़ानून व्यवस्था को ही सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था।वहीं 2022 के चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा रहा है। हालांकि आंकड़ों के अनुसार यूपी में अपराधों की संख्या अभी भी देश में सबसे ऊपर है लेकिन कन्विक्शन रेट ज़्यादा होने की वजह से महिला अपराधों में कार्रवाई करने और सज़ा दिलाने की बात को बीजेपी सामने रख सकती है।ऐसे में सपा के लिए इस नैरेटिव से लड़ने की चुनौती होगी।राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि सपा की बात आने पर बीजेपी मुलायम सिंह यादव के पुराने एक बयान की बात उठाती है।ऐसे में महिला वोटरों को सुरक्षा का भरोसा तो सपा को देना ही होगा।
ज़मीनी महिला कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधित्व का सवाल-
महिला वोटों के मामले में सपा के सामने बीजेपी से लड़ने की चुनौती के अलावा अपनी पार्टी में भी महिला कार्यकर्ताओं को टिकट देने का दबाव होगा।वैसे देखा जाए तो यूपी में हर पार्टी महिलाओं को टिकट देने में पीछे रही है।अगर सपा की बात की जाए तो इस समय लोकसभा में यूपी में समाजवादी पार्टी को 5 महिला सांसद हैं।लेकिन बीजेपी इस बात को लेकर सवाल उठाती रही है कि डिंपल यादव, इकरा हसन, प्रिया सरोज जैसी महिला सांसदों को अपने परिवार और राजनीतिक पृष्ठभूमि की वजह से ही टिकट मिला न कि कार्यकर्ता समझकर सपा ने टिकट दिया।वहीं 2022 में यूपी विधानसभा में सिर्फ़ 47 महिला विधायक चुन कर विधानसभा के पहुंचीं।इसमें सपा की महिला विधायकों की संख्या सिर्फ़ 14 है।इसमें से पूजा पाल को सपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया है।अखिलेश यादव के लिए इस बात पर ध्यान देना भी ज़रूरी होगा कि पार्टी की ज़मीनी कार्यकर्ताओं का टिकट देने ध्यान रखा जाए।हालाँकि हर पार्टी की तरह सपा भी जातीय समीकरणों के अलावा 'जिताऊ’ प्रत्याशी पर ही दांव लगाती रही है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सपा को कुछ ज़मीनी महिला कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट देकर इस छवि की तोड़ना होगा।वरिष्ठ पत्रकार शहिरा नईम कहती हैं कि किसी ''महिलाओं की कम भागीदारी या टिकट कम मिलना किसी एक पार्टी की बात नहीं है।लेकिन सपा के साथ यह धारणा और मज़बूत तरीके से जुड़ती है।इसके लिए चुनाव में तो टिकट देना ज़रूरी है ही, शुरुआती लेवल से ही महिलाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।जैसे यूनिवर्सिटी में चुनाव,पार्टी के पदों पर महिलाओं को मौक़ा देना चाहिए।’’
पार्टी में महिलाओं को भागीदारी के बारे में समाजवादी महिला सभा की अध्यक्ष जूही सिंह कहती हैं ''देखिए अब महिलाओं की भागीदारी तो हर पार्टी में ही कम है।लेकिन सपा ने हमेशा महिलाओं को मौक़ा दिया है।’’ जूही सिंह हाल ही में समाजवादी महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष बनीं रुक्मिणी सिंह की बात भी कहती हैं जिनको बहुत ही सामान्य पृष्ठभूमि से आने के बाद भी सपा के महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।रुक्मिणी सिंह स्व. फूलन देवी की बहन हैं और पार्टी में लंबे समय से कमा कर रही हैं।निषाद वोटरों को संदेश देने की दृष्टि से भी उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है।

