Indore: दूषित पानी ने तोड़ी गरीबों की कमर, RO लगवाने के लिए परिवार ले रहे कर्ज
x

Indore: दूषित पानी ने तोड़ी गरीबों की कमर, RO लगवाने के लिए परिवार ले रहे कर्ज

Bhagirathpura contaminated water: भागीरथपुरा के लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब जल ही जीवन है तो साफ पानी क्यों नहीं मिल पा रहा? इतना ही नहीं, लोगों का भरोसा नगर निगम के टैंकर और नर्मदा जल सप्लाई पर भी टूट गया है।


Click the Play button to hear this message in audio format

Bhagirathpura Water Crisis: अगर पानी ही जहर बन जाए तो इंसान क्या करे? भागीरथपुरा के लोग आज इसी सवाल के साथ जी रहे हैं, जहां साफ पानी पाने के लिए गहने और कर्ज तक दांव पर लगाए जा रहे हैं। यहां पहले लोगों की मौतों की खबरें सामने आईं और अब उल्टी-दस्त, बुखार, संक्रमण और किडनी फेल जैसी गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। हालात से डरे लोग अब अपने घरों में मजबूरी में RO लगवाने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाज बेहद महंगा है और सरकारी स्तर पर पूरी तरह मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल रही। गरीब परिवार अपनी जान बचाने के लिए अपने गहने गिरवी रख रहे हैं या कर्ज ले रहे हैं, ताकि पीने का पानी जहरीला न रहे।

दूषित पानी से बढ़ रही गंभीर बीमारियां

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि कुछ बुजुर्गों की किडनी तक फेल हो चुकी है। मजदूर और गरीब परिवारों पर इलाज, जांच और दवाइयों का खर्च भारी पड़ रहा है। भागीरथपुरा में सुरक्षित पीने का पानी अब लोगों के लिए सबसे बड़ी और महंगी जरूरत बन चुका है। मजबूरी में कोई गहने गिरवी रख रहा है। कोई ब्याज पर कर्ज ले रहा है। लोगों का कहना है कि यह खर्च वे शौक से नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए कर रहे हैं।

नगर निगम के पानी पर पूरी तरह टूटा भरोसा

इलाके की गलियों में आज भी उस त्रासदी का असर साफ दिखता है, जिसने पूरे भागीरथपुरा को झकझोर दिया। दूषित पानी से हुई बीमारियों ने कई परिवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम की जल आपूर्ति पर भरोसा खत्म हो चुका है। टैंकर और नर्मदा जल सप्लाई भी भरोसेमंद नहीं लगती। ऐसे में लोग अपनी जान बचाने के लिए कर्ज और गहनों की कुर्बानी देने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा में पानी अब जीवन नहीं, बल्कि डर का दूसरा नाम बन गया है।

मजदूर परिवार की मजबूरी

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम के पानी पर अब भरोसा नहीं रहा। इसलिए कर्ज लेकर घर में RO लगवाना पड़ रहा है। 10-12 हजार रुपये मजदूरों के लिए बहुत बड़ी रकम है, लेकिन बच्चों की जान से बड़ा कुछ नहीं। सरकार अब तक साफ पानी देने में नाकाम रही है। रोज 40 रुपये का RO पानी खरीदना कब तक संभव है? इसलिए मजबूरी में घर पर RO लगवाना पड़ रहा है। कर्ज धीरे-धीरे चुका लेंगे, लेकिन परिवार की सुरक्षा सबसे जरूरी है।

इलाज में भी लापरवाही के आरोप

लोगों का कहना है कि बीमार होने पर भागीरथपुरा के आरोग्य केंद्र में दिखाने जाने पर डॉक्टर ने पर्चे पर पांच दवाइयां लिखीं, लेकिन चार ही दी गईं। यह नहीं बताया गया कि एक दवा उपलब्ध नहीं है। बाद में मेडिकल दुकान पर पता चला कि सबसे जरूरी दवा दी ही नहीं गई थी।

सवालों के घेरे में सिस्टम

भागीरथपुरा के लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब जल ही जीवन है तो साफ पानी क्यों नहीं मिल पा रहा? नगर निगम के टैंकर और नर्मदा जल सप्लाई पर भरोसा क्यों टूट गया? क्या गरीबों को अपनी जान बचाने के लिए कर्ज और गहनों की कुर्बानी ही देनी पड़ेगी? इलाके के लोग अब जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Read More
Next Story