
बीजेपी में 'नबीन युग’ … यूपी में पुरानी चुनौतियां
हाल ही में उत्तर प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी की नई टीम गठन से लेकर विधानसभा चुनाव में फाइनल टिकट बंटवारे में मुहर लगाने तक में अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की भूमिका होगी।ऐसे में यूपी बीजेपी में आगे की राजनीति और रणनीति की दिशा तय करने में भी नितिन नबीन की सोच और सांगठनिक कौशल की परीक्षा होगी।
Big challenges ahead for new BJP president in UP : बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष नितिन नबीन की ताजपोशी के बाद पार्टी में 'नबीन युग’ की शुरुआत हो गई।नए अध्यक्ष के सामने पहली चुनौती बंगाल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में चुनाव की है।पर अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव और सत्ता में हैट्रिक एंट्री को राष्ट्रीय सबसे मुश्किल चुनौती माना जा रहा है। सरकार के साथ संगठन का तालमेल, कार्यकर्ताओं की नाराज़गी दूर करना, जातीय समीकरण बनाना, गुटबाज़ी को ख़त्म करना और जनता की नाराज़गी का मुक़ाबला करना भी नए अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी होगी।
45 वर्षीय नितिन नबीन सोमवार को सदस्य संख्या के लिहाज से सबसे बड़े राजनीतिक दल बीजेपी के अध्यक्ष बन गए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के सभी शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में उनकी ताजपोशी हुई।नितिन नबीन को बीजेपी की कमान मिलना पार्टी में जेनरेशनल शिफ्ट माना जा रहा है।नितिन नबीन को नरेंद्र मोदी ने अपना 'बॉस’ बताते हुए कहा,'पार्टी के मामलों में नितिन नवीन जी मेरे बॉस हैं और मैं उनका कार्यकर्ता हूं।’ यह सिर्फ नितिन नबीन का स्वागत करने के लिए ही नहीं, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए भी है।अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि नए अध्यक्ष नितिन नबीन के सामने क्या चुनौतियाँ हैं।
चुनाव से पहले यूपी की राजनीति और रणनीति में होगी अहम भूमिका-
दरअसल बीजेपी संगठन की दृष्टि से इस समय सबसे मज़बूत दौर से गुज़र रही है।21 राज्यों में एनडीए की सरकार है जिसमें संगठन की अहम भूमिका रही है ऐसे में आने वाले समय में होने वाले चुनाव नितिन नबीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होंगे।इस साल पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं जिसमें दक्षिण भारत में विस्तार की रणनीति और घुसपैठिए के मुद्दे पर बीजेपी की सख्ती के स्टैंड की परीक्षा होगी। बंगाल जैसे राज्य के चुनाव में संगठन के मुखिया के तौर पर नितिन नबीन की भूमिका भले ही हो पर सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी इस चुनाव की लीड करेगी।इसके बाद अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को नितिन नबीन की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।वजह यह है कि इस बार यूपी में हैट्रिक बनाकर सत्ता में एंट्री कराने की जिम्मेदारी संगठन की होगी।यूपी बीजेपी के लिए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को साधना कहीं ज़्यादा मुश्किल होने वाला है।लोकसभा चुनाव में पीडीए समीकरण ने नतीजों पर असर डाला था।पीडीए समीकरण की वजह से समाजवादी पार्टी-कांग्रेस को मिली जीत के बाद अब बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव से पहले इस समीकरण को ध्यान में रखते हुए चुनाव की रणनीति बनाना ज़रूरी होगा।
प्रदेश में टीम गठन से लेकर चुनाव में फाइनल टिकट बँटवारे तक में सांगठनिक कौशल की परीक्षा-
इससे पहले जेपी नड्डा और अमित शाह दोनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले प्रभारी के रूप में यूपी की सियासी ज़मीन को समझने का अनुभव काम आया था।अमित शाह ने तो यूपी प्रभारी के रूप में यूपी में चुनावी सफलता का एक पैटर्न ही तय किया था।पर नए अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए यूपी बिल्कुल नई स्लेट की तरह है जिसपर उनको अपने सांगठनिक कौशल से सफलता की कहानी लिखनी होगी। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी की नई टीम गठन से लेकर विधानसभा चुनाव में फाइनल टिकट बंटवारे में मुहर लगाने तक में अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की भूमिका होगी।ऐसे में यूपी बीजेपी की नई टीम बनाने से लेकर आगे की राजनीति और रणनीति की दिशा तय करने में भी नितिन नबीन की सोच और सांगठनिक कौशल की परीक्षा होने वाली है।नितिन नबीन की एक और चुनौती यूपी में चुनाव से पहले बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और उनका मनोबल बढ़ाना है।पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनाव तक में पार्टी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी भूमिका होती है।ऐसे में ये टास्क भी प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से करना नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी होगी।सरकार और संगठन के नेताओं में खींचतान और सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी भी दिख रही है।ऐसे में चुनाव से पहले इस दूरी को पाटना ज़रूरी है।जल्द ही जब नितिन नबीन प्रदेशों का दौरा शुरू करेंगे तब वो यूपी में कार्यकर्ताओं और नेताओं को क्या संदेश देते हैं यह देखना भी दिलचस्प होगा।
संगठन और सरकार में तालमेल, कार्यकर्ताओं के मनोबल का चुनाव पर असर-
पिछले कुछ वर्षों में योगी आदित्यनाथ का कद बढ़ा है लेकिन शीर्ष नेतृत्व और संगठन से कई मुद्दों पर असहमति की बात भी चर्चा में आती रही है।ऐसे में संगठन की पकड़ को बनाने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष की है तो कई मुद्दों पर मुहर लगाने में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की अहम भूमिका होगी।यूपी में चुनाव की रणनीति बनाने के अलावा अधिकारियों की कार्यशैली और दूसरी वजहों से जनता में नाराज़गी का असर चुनाव पर पड़ सकता है उसको देखते हुए रणनीति तय करना और कार्यकर्ताओं को एक्टिव करके जीत के रथ को आगे ले जाने की जिम्मेदारी नए अध्यक्ष के कंधे कर होगी।ऐसे में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को यूपी में कई पुरानी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

