चुनाव से पहले कांग्रेस को असम में बड़ा झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने छोड़ी पार्टी
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भूपेन बोरा 2006 से 2016 तक बिहपुरिया विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे हैं और उन्हें 2021 में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। (फोटो : X/@BhupenKBorah)

चुनाव से पहले कांग्रेस को असम में बड़ा झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने छोड़ी पार्टी

भूपेन बोरा ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि यह आत्मसम्मान का सवाल है। ऐसी रिपोर्टें हैं कि दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व बोरा को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की हरसंभव कोशिश करेगा।


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असम में कांग्रेस ने जिन नेता को गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने का जिम्मा सौंपा था, वही कांग्रेस को बाय-बाय करके चले गए हैं। असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूपेन बोरा ने सोमवार सुबह लगभग 8 बजे अपना इस्तीफा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया। बोरा पिछले साल तक असम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। उसके बाद जून 2025 में गौरव गोगोई राज्य कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष बने।

बोरा ने कहा, “यह आत्मसम्मान का सवाल है और मैंने पार्टी के संचालन के तरीके को लेकर अपनी चिंताओं से भी केंद्रीय नेतृत्व को अवगत करा दिया है… जब हमारी गाड़ी मजुली गई, अगर पार्टी यह तय नहीं कर सकती कि किसे जाना चाहिए और किसे नहीं, तो ऐसे में पार्टी का भविष्य क्या होगा। मैंने यह बात केंद्रीय नेतृत्व को बता दी है।”

वे पिछले शुक्रवार मजुली में आयोजित कांग्रेस रैली का जिक्र कर रहे थे, जिसका नेतृत्व गौरव गोगोई ने किया था। इस रैली में बोरा, असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देब्रत सैकिया और सांसद रकिबुल हुसैन भी मौजूद थे।

इस बीच, दिल्ली में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि पार्टी नेतृत्व ने अभी बोरा का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है और उन्हें मनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह, जो असम के लिए एआईसीसी प्रभारी हैं, ने भूपेन बोरा और गौरव गोगोई के साथ बैठक की।

भूपेन बोरा 2006 से 2016 तक बिहपुरिया से दो बार विधायक रहे हैं और 2021 में राज्य चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। 55 वर्षीय बोरा 1994 से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं।

लगभग चार वर्षों तक पार्टी की कमान संभालने के दौरान, जब असम में कांग्रेस को लगातार नुकसान और क्षरण का सामना करना पड़ा और नेता व कार्यकर्ता पार्टी छोड़ते रहे, तब बोरा का एक प्रमुख लक्ष्य भाजपा-विरोधी क्षेत्रीय गठबंधन तैयार करना था। इसके लिए उन्होंने Raijor Dol, Asom Jatiyo Parishad, Communist Party of India, Communist Party of India (Marxist) और All Party Hill Leaders Conference जैसी पार्टियों के साथ पहल की और 2023 की शुरुआत से इस दिशा में काम कर रहे थे।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में इन दलों ने सफलतापूर्वक गठबंधन किया, लेकिन अन्य मौकों पर सीट-बंटवारे को लेकर मतभेद सामने आए। उपचुनावों में सीट साझा करने के समझौते टूट गए और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें सीटों में पर्याप्त हिस्सेदारी देने को तैयार नहीं था। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह मुद्दा अब भी विवादित बना हुआ है।

यद्यपि पार्टी मामलों की कमान गौरव गोगोई के हाथ में है, लेकिन संभावित गठबंधन सहयोगियों के साथ अच्छे संबंध रखने वाले बोरा को पिछले सप्ताह गठबंधन वार्ता को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका सौंपी गई थी। चुनाव की घोषणा अगले कुछ सप्ताह में होने की उम्मीद है। हालांकि, यह जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और संकेत दिया कि गठबंधन वार्ता में उन्हें सीमित भूमिका दिए जाने से वे असंतुष्ट थे।

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