
क्या बिहार में बीजेपी खुलकर खेल रही, नीतीश कुमार के लिए कोई संदेश?
क्या बिहार में बीजेपी ने अब खुलकर खेलने का मन बना लिया है। दरअसल सीएम कौन होगा के सवाल पर बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि फैसला संसदीय बोर्ड करेगा।
Bihar Politics: क्या इस वजह से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने कहा था कि उनके पिता को सीएम का चेहरा घोषित करना चाहिए था। दरअसल बिहार बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से सवाल पूछा गया कि बिहार का अगला सीएम कौन होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव तो नीतीश कुमार के चेहरे के नाम पर लड़ेंगे। लेकिन सीएम कौन होगा उसके बारे में संसदीय दल बोर्ड तय करेगा। अब इस बयान के बाद प्रतिक्रिया सबसे पहले आरजेडी की तरफ से आई। पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि जेडीयू को अब भी समझना चाहिए। पहले तो मंत्रिमंडल विस्तार के समय और अब बिहार बीजेपी अध्यक्ष का बयान स्पष्ट करता है कि उनके नेता क्या सोच रहे हैं।
सवाल यह है कि बीजेपी की तरफ से यह बयान क्यों आया। इसके जवाब में जानकार कहते हैं कि आप भागलपुर के पीएम मोदी के दौरे को याद करिए, वहां उन्होंने नीतीश कुमार को लाड़ला बताया। अब बिहार में लाड़ला को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से लिया जाता है। भागलपुर के मंच से वो ललन सिंह की कुछ अधिक ही तारीफ करते हुए नजर आए। इसके साथ ही यह भी सच है कि बिहार की राजनीति में बीजेपी ने खुद को स्थापित कर चुकी है। 80 विधायकों के साथ वो नंबर एक की पार्टी है। ऐसी सूरत में सहयोगी दलों का सशंकित होना और विपक्ष की तरफ से हमले होते रहेंगे। सियासत में कभी कुछ भी संभव है। इस बात को कौन सोच सकता था कि यूपी में मायवती और अखिलेश यादव एक साथ आ सकते थे। मायावती ने मुलायम सिंह यादव के साथ अदावत को भुलाकर साइकिल की सवारी करना समय के हिसाब से मुनासिब समझा।
अब जहां तक बिहार की राजनीति का सवाल है कि बीजेपी को पता है कि उसे अपने सामाजिक दायरे को बढ़ाने के लिए जेडीयू, हम, एलजेपी, आरएलएसपी जैसी पार्टियों की जरूरत है। वहीं नीतीश कुमार भी पता है कि चार फीसद कुर्मी वोट के जरिए वो प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन अपने इस सामाजिक आधार के बलबूते सफर आसान नहीं है।
अगर नीतीश कुमार की सियासत को देखें तो तो बिहार में आमतौर पर धारणा बनती है कि भले ही उन्होंने अलग अलग समय पर अलग अलग दलों का दामन थामा हो। लेकिन बिहार में कम से कम कानून व्यवस्था को सुधारा, राज्य को विकास की पटरी पर ले आए। मौजूदा समय में ना सिर्फ बिहार बल्कि उनकी व्यक्तिगत राजनीति के लिए बीजेपी लाभदायक है। वहीं लाभार्थी वर्ग के उदय के बाद बीजेपी को भी भरोसा हो चला है कि वो मैजिक नंबर 122 को आक्रामक रुख अख्तियार कर हासिल कर सकती है।