
दीवाली पर बने सीएम होली के बाद विदाई,इतने साल तक नीतीश कुमार ने संभाली बिहार की कमान
बिहार के सीएम नीतीश कुमार का कहना है कि अब वो राज्यसभा जाएंगे। यहां पर उनके सियासी पारी के बारे में बताएंगे।
नीतीश कुमार कुछ समय बाद बिहार के सीएम तौर पर नजर नहीं आएंगे। उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला किया है। इसे लेकर कयासों का बाजार गर्म था। लेकिन उन्होंने एक्स पर अपने मन की बात लिखी। संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
नीतीश कुमार ने जिस तरह से लिखा कि उनकी इच्छा थी कि वो संसद के दोनों सदनों की सदस्य बने। यह चर्चा का विषय हो सकता है कि जो शख्स औरों को राज्यसभा पहुंचाता था, वो इतने वर्षों तक अपनी इच्छा को दबाए क्यों रखा। क्या अब बिहार की सियासत में सुशासन बाबू के नाम से मशबूर नीतीश के सामने चुनौती अधिक आ रही थी लिहाजा उन्होंने मन बदला या बीजेपी ने चुपके चुपके सत्ता हथियाने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।
बिहार की सियासत पर नजर रखने वाले कहते हैं कि देर सबेर तो यह होना ही था। कछुए की चाल चलते हुए बीजेपी अब उस मुकाम पर पहुंच चुकी है उसे दरकिनार कर पाना नीतीश कुमार के लिए संभव नहीं था। इस कहानी की निर्णायक साल 2020 को मान सकते हैं जब बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनी और जेडीयू तीसरे नंबर पर आ गई। बीजेपी के नेताओं को लगने लगा कि अब अंतिम हथौड़ा मारना बाकी रह गया। साल 2025 के चुनाव से ठीक पहले बीजेपी के नेता खुलकर नीतीश कुमार के सीएम चेहरे पर कुछ नहीं बोलते थे। लेकिन सियासत के चतुर खिलाड़ी ने जब बीजेपी को लंगड़ी मारी तो भगवाधारी नेता कहने लगे कि नीतीश जी ही हमारे नेता हैं। हालांकि नतीजे जब सामने आए तो तस्वीर करीब करीब साफ हो गई कि आगे क्या होने वाला है।
बिहार के जानकार कहते हैं कि नीतीश कुमार एक्स पर भले ही अपने मन का भाव लिखें हों। लेकिन कड़वी सच्चाई वो जानते हैं कि आगे का रास्ता क्या है। इन सबके बीच नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर को भी समझिए।
नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव
1985: पहली बार बिहार विधानसभा के लिए विधायक चुने गए।
1989: लालू प्रसाद यादव को विपक्ष का नेता बनने में समर्थन दिया।
1994: लालू के खिलाफ बगावत के बाद जनता दल (जॉर्ज) का गठन, जिसमें नीतीश कुमार प्रमुख रणनीतिकार रहे; बाद में इसका नाम समता पार्टी हुआ।
1996: भाजपा के साथ राजनीतिक गठबंधन किया।
1998–2004: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल, सड़क परिवहन और कृषि मंत्री रहे।
2010: एनडीए की जीत के बाद फिर मुख्यमंत्री बने।
2013: नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भाजपा से गठबंधन तोड़ा।
2015: लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव जीता और फिर मुख्यमंत्री बने।
2017: महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ सरकार बनाई और छठी बार मुख्यमंत्री बने।
2020: एनडीए की जीत के बाद सातवीं बार मुख्यमंत्री बने।
उतार-चढ़ाव वाला सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव और गठबंधनों के बदलाव से भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जनता दल से की और वर्ष 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा के लिए विधायक चुने गए। उस दौर में वे लालू प्रसाद यादव के समर्थकों में गिने जाते थे और 1990 में लालू को मुख्यमंत्री बनाने के लिए उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
1994 में बिहार की राजनीति ने बड़ा मोड़ लिया। जनता दल के 14 सांसदों ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ बगावत कर दी। इस समूह को समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस के नाम पर जनता दल (जॉर्ज) कहा गया। जॉर्ज फर्नांडिस इस गुट का प्रमुख चेहरा थे, लेकिन इसकी रणनीति तैयार करने में नीतीश कुमार की अहम भूमिका मानी जाती है। बाद में इस समूह का नाम बदलकर समता पार्टी कर दिया गया।
1996 में नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के साथ राजनीतिक गठबंधन किया। साल 2000 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, हालांकि उनकी सरकार सिर्फ सात दिन ही चल सकी। लेकिन 2005 में उन्होंने दोबारा सत्ता संभाली और इसके बाद बिहार की राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित हो गए।
नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर में गठबंधनों का बदलना भी अहम रहा है। 2015 में उन्होंने भाजपा से अलग होकर लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाया और चुनाव जीतकर फिर मुख्यमंत्री बने। लेकिन यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला और 2017 में उन्होंने महागठबंधन छोड़कर फिर से भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली।
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिली। हालांकि जदयू की सीटें घटकर 43 रह गईं, इसके बावजूद नीतीश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में एनडीए ने बड़ी जीत दर्ज की। 243 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं और नीतीश कुमार रिकॉर्ड दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने।

