बिहार विधानसभा चुनाव 2025,  सीटों का समीकरण और सियासी हलचल
x

बिहार विधानसभा चुनाव 2025, सीटों का समीकरण और सियासी हलचल

बिहार चुनाव 2025 में एनडीए और महागठबंधन आमने-सामने हैं। तेजस्वी यादव वोटर अधिकार यात्रा से जनता तक पहुंच रहे हैं, नीतीश-बीजेपी पलटवार में जुटे हैं।


बिहार विधानसभा के लिए अभी चुनावी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन सियासी फिजा में गरमी है। महागठबंधन के नेता स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के मुद्दे पर वोटर अधिकार यात्रा के जरिए सड़क पर हैं, वहीं एनडीए के नेता इसे व्यर्थ का प्रयास बता रहे हैं। इन सबके बीच सवाल यह है कि जनता का मूड क्या है, इसे समझने के लिए द फेडरल देश की टीम ने जमीनी स्तर पर लोगों से बातचीत की उनके नेताओं से सियासी हवा को समझा। इस संबंध में बड़ा सवाल यह था कि महागठबंधन को क्यों लगता है कि इस दफा तेजस्वी यादव की अगुवाई में सरकार बनने जा रही है। इसके जवाब में आरजेडी के प्रवक्ता और राज्यसभा के सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि जनता का मिजाज हमारे पक्ष में है। हकीकत यह है कि बीजेपी के नेता अपने आंतरिक सर्वेक्षण में मान रहे हैं कि हम लोग सरकार बनाने जा रहे हैं।

अब जब प्रोफेसर मनोज कुमार झा इस तरह के दावे कर रहे थे तो एक बात साफ है कि वो मैजिक नंबर 122 की बात कर रहे थे। यहां बता दें कि बिहार विधानसभा में सीटों की संख्या 243 है। सियासी पंडित कहते हैं कि सत्ता की लड़ाई में रोड शो, जुबानी हमले, स्लोगन उत्प्रेरक की तरह काम करते हैं, बुनियादी तौर पर उम्मीदवारों का चयन, संगठन की मजबूती और मतदान केंद्रों तक वोटर्स की पहुंच अहम होती है। ऐसे में द फेडरल देश ने मनोज झा से सवाल किया कि क्या सीटों के चयन में 2020 की गलती से बचेंगे। 2020 की गलती का मतलब कांग्रेस को सीट से लेकर था। ऐसा कहा जाता है कि आरजेडी के वरिष्ठ नेता कांग्रेस को अधिक सीट दिए जाने के पक्ष में नहीं थे। नतीजों के बाद मंथन में आरजेडी नेताओं ने कहा कि अगर हम कुछ और अधिक सीटों पर लड़े होते तो तस्वीर अलग रही होती। अब 2020 की तस्वीर कैसी थी उस पर एक नजर डालते हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में दलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा था

बीजेपी – 74 सीटें

जेडीयू – 43 सीटें

आरजेडी – 75 सीटें

कांग्रेस – 19 सीटें

सीपीआई (एमएल) – 12 सीटें

एआईएमआईएम – 5 सीटें

सीपीआई – 2 सीटें

सीपीएम – 2 सीटें

बसपा – 1 सीट

हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) – 4 सीटें

लोक जनशक्ति पार्टी – 1 सीट

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) – 4 सीटें

बिहार चुनाव 2020 में इस बार चार प्रमुख गठबंधन मैदान में थे।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/NDA)

महागठबंधन

ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट (GDSF)

प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (PDA)

महागठबंधन की रणनीति

सत्ता में वापसी की कोशिश में राजद ने कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ महागठबंधन बनाया था।

राजद – 144 सीटों पर

कांग्रेस – 70 सीटों पर

वामपंथी दल – 29 सीटों पर चुनाव लड़े।

एनडीए (राजग) की रणनीति

एनडीए गठबंधन नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ा।

जेडीयू – 122 सीटों पर

बीजेपी – 121 सीटों परहम (जीतन राम मांझी की पार्टी) – 7 सीटें (जेडीयू के हिस्से से)

वीआईपी (मुकेश साहनी की पार्टी) – 11 सीटें (बीजेपी के हिस्से से)

गौरतलब है कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) इस बार राजग का हिस्सा नहीं थी।

ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट (GDSF)

इस गठबंधन में कई छोटे दल शामिल थे

रालोसपा (उपेंद्र कुशवाहा)

बसपा (मायावती)

एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी)

जनवादी पार्टी (समाजवादी) – संजय चौहान

सोहेलदेव भारतीय समाज पार्टी

प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (PDA)

यह गठबंधन जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष पप्पू यादव ने बनाया था।

आजाद समाज पार्टी – चंद्रशेखर आजाद

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) – एमके फैजी

बहुजन मुक्ति पार्टी – बीपीएल मातंग

(इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग इस गठबंधन का हिस्सा नहीं थी।)

2020 की इस तस्वीर पर आरजेडी प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा कि उस समय निश्चित तौर पर उम्मीदवारों के चयन में गड़बड़ी हुई थी। लेकिन इस दफा तस्वीर अलग है। हमारे सभी घटक दल बिहार की भलाई के लिए एक हैं। इसे आप ऐसे समझिए कि उम्मीदवार किसी भी दल का हो मकसद बीजेपी और एनडीए को हराना है। जहां तक सीट शेयरिंग की बात है तो इस हमारे घटक दलों के शीर्ष नेता फैसला करेंगे। लेकिन एक बात तो तय है कि वोटर अधिकार यात्रा से बीजेपी और एनडीए नेताओं का दम फूल रहा है।

Read More
Next Story