बिहार में सत्ता बदलाव से पहले खींचतान, स्पीकर-गृह मंत्रालय पर क्यों नहीं बन रही बात?
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बिहार में सत्ता बदलाव से पहले खींचतान, स्पीकर-गृह मंत्रालय पर क्यों नहीं बन रही बात?

बिहार में सीएम बदलने की चर्चा के बीच बीजेपी-जेडीयू में गृह मंत्रालय और स्पीकर पद को लेकर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। इसकी वजह से सत्ता समीकरण उलझते दिख रहे हैं।


बिहार के सीएम नीतीश कुमार विधान परिषद से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि वो सीएम पद से इस्तीफा कब देंगे उसकी तारीख तय नहीं है। इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि गृह मंत्रालय और स्पीकर किस दल का होगा। आपको याद होगा कि 20 नवंबर को सीएम नीतीश कुमार ने जब सीएम पद की शपथ ली थी तब भी इस विषय पर चर्चा थी। बीजेपी के नेता चाहते थे कि गृहमंत्रालय और स्पीकर का पद उनके दल को मिलना चाहिए। कई दिनों के मंथन के बाद गृहमंत्रालय की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मिली और स्पीकर भी बीजेपी कोटे से बना। अब जबकि चर्चा है कि सीएम बीजेपी कोटे से और डिप्टी सीएम जेडीयू कोटे से होंगे। ऐसे में पेंच इन्हीं दो पदों पर फंसता नजर आ रहा है।

बीजेपी, गृहमंत्रालय विभाग को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। बीजेपी का तर्क है कि जब आगे की लड़ाई का नेतृत्व उन्हें ही करना है। ऐसे में यह विभाग उनके पास ही रहना चाहिए। पार्टी का मानना है कि चुनावी अभियान के दौरान ही जंगलराज से मुक्ति उनका अहम मुद्दा रहा। बिहार की जनता ने पार्टी की बातों पर भरोसा भी किया ऐसे में गृहमंत्री का पद उनके पास ही होना चाहिए।

जेडीयू स्पीकर का पद क्यों चाहती है।

जेडीयू, दो खास वजहों से स्पीकर का पद चाहती है। जेडीयू के नेताओं को लगता है कि नीतीश कुमार दिल्ली जा रहे हैं। भले ही वो दिल्ली से ही पटना की राजनीति पर निगाह रखें।लेकिन व्यावहारिक तौर पर वो पटना में मौजूद नहीं होंगे। ऐसे में पार्टी के विधायकों के टूटने का खतरा बढ़ सता है। यदि स्पीकर उनके दल से नहीं होगा वैसी सूरत में विधानसभा में तस्वीर बदल सकती है। दूसरी वजह यह है कि पहली दफा बीजेपी नंबर एक पार्टी बनी है, विधायकों की संख्या 89 है। सरकार में बने रहने के लिए 122 विधायकों की जरूरत है। अगर विधानसभा की तस्वीर देखें तो जेडीयू के पास 85 विधायक, एलजेपी आर के 19, हम के पांच और आरएलएम के चार विधायक हैं। यदि जेडीयू को माइनस कर दें तो बीजेपी के 117 विधायक हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि आने वाले समय में अगर बीजेपी, जेडीयू से अलग होने के बारे में भी सोचे तो उसे सरकार बनाने के लिए और बने रहने के लिए सिर्फ चार विधायकों की जरूरत होगी। हाल ही में राज्यसभा चुनाव में जिस तरह कांग्रेस और आरजेडी के एक विधायक ने पाला बदल किया वो तस्वीर जेडीयू को डराती है।

1985 में दल बदल कानून में जिस तरह से बदलाव किया गया उसमें स्पीकर के पास असीमित शक्ति है।

1. दलबदल की सूरत में किसी विधायक को अयोग्य ठहराने का अधिकार स्पीकर के पास होता है।

2. छोटे दलों के विधायकों के टूटने का खतरा अधिक रहता है, स्पीकर अगर चाहे तो किसी भी विधायक के लिए दल बदल की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

3. दलबदल कानून में स्पीकर के फैसले को बदलने का सुप्रीम कोर्ट के पास सीमित अधिकार है।

4. एक जुलाई 2021 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा था कि दलबदल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के पास सीमित अधिकार है। इस कानून के तहत स्पीकर के फैसले को समय सीमा में नहीं बांधा जा सकता है।

बिहार की सियासत पर करीब से नजर रखने वाली वरिष्ठ पत्रकार अशोक मिश्रा कहते हैं, '' देखिए, इस समय बिहार की राजनीतिक में तीन विषय अहम हैं, पहला सीएम, दूसरा डिप्टी सीएम और तीसरा विधानसभा अध्यक्ष। अभी जो सियासी समीकरण और हालात हैं उसमें बीजेपी की तरफ से सीएम बनने की संभावना अधिक है। ऐसे में गृहमंत्री और स्पीकर का पद मायने रखता है। अगर सीएम, बीजेपी का होता है तो जेडीयू की तरफ से स्वाभाविक दावेदारी गृहमंत्री और स्पीकर के लिए हो सकती है।''

अशोक मिश्रा कहते हैं,'' अगर आप नीतीश कुमार की सियासत को देखें तो गृहमंत्रालय का पद उनके पास ही रहा, हालांकि 20 नवंबर को जब 10वीं दफा वो सीएम बने तो बड़ा बदलाव यह हुआ कि गृहमंत्रालय के पद को उन्होंने छोड़ दिया है। इस सूरत में अगर जेडीयू की तरफ से इस पद पर दावेदारी की जाए तो गलत नहीं होगा।'' सामान्य तौर पर अगर सीएम बीजेपी कोटे से बनता है कि तो शेष दोनों पदों के लिए वो दावेदारी करें या दबाव बनाए वो न्यायसंगत नजर नहीं आता। लेकिन सियासत में कुछ भी संभव है।

क्या बिहार में भी ढाई ढाई साल सीएम वाले फॉर्मूले पर काम हो रहा है। इस सवाल पर अशोक मिश्रा कहते हैं, '' पटना में इस संभावना पर भी चर्चा तेज है। लेकिन यदि आप संख्या बल को देखें तो बीजेपी के पास विकल्पों की कमी नहीं है। लेकिन सियासी दल छोटी अवधि के फायदे के बारे में नहीं सोचते। ऐसे में यह संभव है कि नीतीश कुमार के बिहार में सक्रिय ना होने की सूरत में जेडीयू इस फॉर्मूले पर ज्यादा दवाब ना बनाएं। लेकिन इसमें दो मत नहीं कि स्पीकर और गृहमंत्रालय पर पेंच फंसा हुआ है।

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